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Rohtak News: एमडीयू में पेंचक सिलाट चैंपियनशिप का आगाज
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8-एमडीयू में डॉ. मंगल सेन मल्टीपर्पज जिम्नेजियम हॉल में पेंचक सिलाट के दांव पेंच लगाते खिलाड़
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के खेल परिसर स्थित डॉ. मंगल सेन मल्टीपर्पज जिम्नेजियम हॉल में साेमवार को ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी पेंचक सिलाट (पुरुष) चैंपियनशिप का आगाज हुआ। इसमें देशभर के 51 विश्वविद्यालयों के 350 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।
प्रतियोगिता का उद्घाटन एमडीयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने की। कुलपति ने कहा, खेल भावना के साथ ईमानदारी और अनुशासन से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए।
उन्होंने खिलाड़ियों को सफलता और असफलता को अपने ऊपर हावी न होने देने की सीख दी। खेल केवल जीतने का माध्यम नहीं बल्कि हार से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।
कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने कहा, वे खेल भावना, अनुशासन और आपसी सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए प्रतियोगिता में भाग लें। खिलाड़ियों को फिटनेस, संतुलित आहार और खेल के नियमों का पालन करने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
खिलाड़ियों ने पेंचक सिलाट प्रतियोगिता का आकर्षक डेमो भी प्रस्तुत किया गया। कुलपति ने टूर्नामेंट के बेस्ट प्लेयर को अपना स्मृति चिह्न देने की घोषणा भी की।
एमडीयू खेल परिषद की अध्यक्ष डॉ. राजवंती शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। खेल निदेशक डॉ. शकुंतला बेनीवाल ने विश्वविद्यालय की खेल उपलब्धियों की जानकारी दी। ताइक्वांडो कोच अशोक कुमार ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर इरफान खान, प्रो. जितेंद्र कुमार, प्रो. भगत सिंह राठी, डॉ. स्वाति सिंह, सुरेश कौशिक, डॉ. जयपाल धनखड़, डॉ. मस्तराम, पंकज नैन व अन्य उपस्थित रहे।
क्या है पेंचक सिलाट खेल?
पेंचक सिलाट दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रचलित एक पारंपरिक मार्शल आर्ट है। इस खेल में खिलाड़ी आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन करते हैं जिनमें किक, पंच, पकड़, गिराने और बचाव की रणनीतियां शामिल होती हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों की ताकत, फुर्ती, संतुलन और तकनीकी कौशल का मूल्यांकन किया जाता है। यह खेल न केवल शारीरिक फिटनेस बढ़ाता है बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन भी विकसित करता है।
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प्रतियोगिता का उद्घाटन एमडीयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने की। कुलपति ने कहा, खेल भावना के साथ ईमानदारी और अनुशासन से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए।
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उन्होंने खिलाड़ियों को सफलता और असफलता को अपने ऊपर हावी न होने देने की सीख दी। खेल केवल जीतने का माध्यम नहीं बल्कि हार से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।
कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने कहा, वे खेल भावना, अनुशासन और आपसी सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए प्रतियोगिता में भाग लें। खिलाड़ियों को फिटनेस, संतुलित आहार और खेल के नियमों का पालन करने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
खिलाड़ियों ने पेंचक सिलाट प्रतियोगिता का आकर्षक डेमो भी प्रस्तुत किया गया। कुलपति ने टूर्नामेंट के बेस्ट प्लेयर को अपना स्मृति चिह्न देने की घोषणा भी की।
एमडीयू खेल परिषद की अध्यक्ष डॉ. राजवंती शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। खेल निदेशक डॉ. शकुंतला बेनीवाल ने विश्वविद्यालय की खेल उपलब्धियों की जानकारी दी। ताइक्वांडो कोच अशोक कुमार ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर इरफान खान, प्रो. जितेंद्र कुमार, प्रो. भगत सिंह राठी, डॉ. स्वाति सिंह, सुरेश कौशिक, डॉ. जयपाल धनखड़, डॉ. मस्तराम, पंकज नैन व अन्य उपस्थित रहे।
क्या है पेंचक सिलाट खेल?
पेंचक सिलाट दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रचलित एक पारंपरिक मार्शल आर्ट है। इस खेल में खिलाड़ी आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन करते हैं जिनमें किक, पंच, पकड़, गिराने और बचाव की रणनीतियां शामिल होती हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों की ताकत, फुर्ती, संतुलन और तकनीकी कौशल का मूल्यांकन किया जाता है। यह खेल न केवल शारीरिक फिटनेस बढ़ाता है बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन भी विकसित करता है।

8-एमडीयू में डॉ. मंगल सेन मल्टीपर्पज जिम्नेजियम हॉल में पेंचक सिलाट के दांव पेंच लगाते खिलाड़