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Rohtak News: गिझी और नया बांस के स्कूलों के गिर रहे प्लास्टर, दीवारें क्षतिग्रस्त, ड्यूल डेस्क भी नहीं
Sun, 19 Jul 2026 06:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 19 Jul 2026 06:57 AM IST
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10-रोहतक के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गिझी के जर्जर कमरें में लगा डिजिटल बोर्ड। संवाद
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पड़ताल :
रोहित राठौर
रोहतक। डिजिटल हरियाणा और स्मार्ट शिक्षा के दावों के बीच जिले के गिझी और नया बांस के सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां बच्चों को बैठने के लिए ड्यूल डेस्क नहीं मिल है तो छत से प्लास्टर गिर रहा है और क्षतिग्रस्त दीवारों के बीच पढ़ाई कराई जा रही है।
सांपला कस्बे राजकीय विद्यालयों की संवाद प्रतिनिधि ने हकीकत परखी तो तस्वीर बेहद चिंताजनक निकली। गिझी के राजकीय उच्च विद्यालय में 6वीं से 10वीं तक करीब 90 बच्चे नामांकित हैं लेकिन बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर नहीं है।
बच्चे आज भी टाट-पट्टी पर फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। डिजिटल बोर्ड की संख्या 4 है। बच्चों ने भी ड्यूल डेस्क को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए बैठने के लिए बेहतर और सुरक्षित स्थानों की मांग की है।
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राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गिझी की हालत और भी बदतर है। यहां करीब 70 छात्राओं के लिए सिर्फ दो डिजिटल बोर्ड हैं। इनमें से एक डिजिटल बोर्ड जर्जर कमरे में लगा होने से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। भवन की दीवारें जर्जर हैं। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
कमरों की कमी के कारण विज्ञान प्रयोगशाला और लाइब्रेरी में ही बच्चों की कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं जबकि प्राथमिक विंग में 51 बच्चों पर केवल दो शिक्षक हैं और वहां डिजिटल बोर्ड का प्रयोग भी नहीं हो रहा। सबसे खतरनाक स्थिति टेबल टेनिस कक्ष की है। जहां से लगातार प्लास्टर गिर रहा है।
सुरक्षा कारणों से बच्चों को खेल गतिविधियों से दूर रखा गया है। विद्यालयों के कई कमरों पर विद्यालय प्रबंधन ने प्रवेश प्रतिबंध का पोस्टर चिपका रखा है। साथ ही कमरों के छज्जे गिरने की हालत में रस्सी लगाकर प्रतिबंध लगाया गया है।
जर्जर भवनों से बच्चों को दूर रखने के लिए कक्षाओं को साइंस लैब में शिफ्ट किया गया है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। स्कूल प्रशासन ने वर्ष 2022 से लगातार विभाग को पत्र लिखकर भवन मरम्मत मांग की है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नया बांस में बच्चों के लिए कमरों की कमी
नया बांस के राजकीय उच्च विद्यालय में स्कूल में भी विभाग की ओर से तीन डिजिटल बोर्ड दिए गए थे लेकिन एक के खराब होने के बाद दूसरी कक्षाएं डिजिटल शिक्षा से वंचित हैं। यहां भी बच्चे के लिए पर्याप्त कमरे नहीं है। विद्यालय में करीब 200 विद्यार्थी हैं। बच्चों को फर्श पर बैठना पड़ रहा है। साथ ही परिसर में उगी घास से मानसून में कीट-पतंगों के काटने का डर रहता है।
वर्जन
जिन विद्यालयों में ड्यूल डेस्क नहीं है वहां जल्द की मुहैया करवाए जाएंगे। डिजिटल बोर्ड एक साथ सभी कक्षाओं में उपलब्ध करवाया जाना मुश्किल है। हालांकि, विद्यालयों से डिजिटल बोर्ड की डिमांड और स्थिति की रिपोर्ट मंगाई जा रही है ताकि बजट उपलब्ध करवाया जा सके। -सूरजभान, खंड शिक्षा अधिकारी सांपला।
फोटो : 12
सरकारी स्कूलों में न तो सुरक्षित बुनियादी ढांचा है और न ही डिजिटल शिक्षा के संसाधन। जब तक डेस्क-बेंच, सुरक्षित कमरे और कामकाजी डिजिटल उपकरण नहीं मिलेंगे, तब तक नई शिक्षा नीति और डिजिटल क्लास के दावे जमीनी स्तर पर सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे। वार्ड के स्कूलों रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी।
धीरज मलिक, वार्ड-8, जिला पार्षद
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रोहित राठौर
रोहतक। डिजिटल हरियाणा और स्मार्ट शिक्षा के दावों के बीच जिले के गिझी और नया बांस के सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां बच्चों को बैठने के लिए ड्यूल डेस्क नहीं मिल है तो छत से प्लास्टर गिर रहा है और क्षतिग्रस्त दीवारों के बीच पढ़ाई कराई जा रही है।
सांपला कस्बे राजकीय विद्यालयों की संवाद प्रतिनिधि ने हकीकत परखी तो तस्वीर बेहद चिंताजनक निकली। गिझी के राजकीय उच्च विद्यालय में 6वीं से 10वीं तक करीब 90 बच्चे नामांकित हैं लेकिन बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर नहीं है।
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बच्चे आज भी टाट-पट्टी पर फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। डिजिटल बोर्ड की संख्या 4 है। बच्चों ने भी ड्यूल डेस्क को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए बैठने के लिए बेहतर और सुरक्षित स्थानों की मांग की है।
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राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गिझी की हालत और भी बदतर है। यहां करीब 70 छात्राओं के लिए सिर्फ दो डिजिटल बोर्ड हैं। इनमें से एक डिजिटल बोर्ड जर्जर कमरे में लगा होने से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। भवन की दीवारें जर्जर हैं। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
कमरों की कमी के कारण विज्ञान प्रयोगशाला और लाइब्रेरी में ही बच्चों की कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं जबकि प्राथमिक विंग में 51 बच्चों पर केवल दो शिक्षक हैं और वहां डिजिटल बोर्ड का प्रयोग भी नहीं हो रहा। सबसे खतरनाक स्थिति टेबल टेनिस कक्ष की है। जहां से लगातार प्लास्टर गिर रहा है।
सुरक्षा कारणों से बच्चों को खेल गतिविधियों से दूर रखा गया है। विद्यालयों के कई कमरों पर विद्यालय प्रबंधन ने प्रवेश प्रतिबंध का पोस्टर चिपका रखा है। साथ ही कमरों के छज्जे गिरने की हालत में रस्सी लगाकर प्रतिबंध लगाया गया है।
जर्जर भवनों से बच्चों को दूर रखने के लिए कक्षाओं को साइंस लैब में शिफ्ट किया गया है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। स्कूल प्रशासन ने वर्ष 2022 से लगातार विभाग को पत्र लिखकर भवन मरम्मत मांग की है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नया बांस में बच्चों के लिए कमरों की कमी
नया बांस के राजकीय उच्च विद्यालय में स्कूल में भी विभाग की ओर से तीन डिजिटल बोर्ड दिए गए थे लेकिन एक के खराब होने के बाद दूसरी कक्षाएं डिजिटल शिक्षा से वंचित हैं। यहां भी बच्चे के लिए पर्याप्त कमरे नहीं है। विद्यालय में करीब 200 विद्यार्थी हैं। बच्चों को फर्श पर बैठना पड़ रहा है। साथ ही परिसर में उगी घास से मानसून में कीट-पतंगों के काटने का डर रहता है।
वर्जन
जिन विद्यालयों में ड्यूल डेस्क नहीं है वहां जल्द की मुहैया करवाए जाएंगे। डिजिटल बोर्ड एक साथ सभी कक्षाओं में उपलब्ध करवाया जाना मुश्किल है। हालांकि, विद्यालयों से डिजिटल बोर्ड की डिमांड और स्थिति की रिपोर्ट मंगाई जा रही है ताकि बजट उपलब्ध करवाया जा सके। -सूरजभान, खंड शिक्षा अधिकारी सांपला।
फोटो : 12
सरकारी स्कूलों में न तो सुरक्षित बुनियादी ढांचा है और न ही डिजिटल शिक्षा के संसाधन। जब तक डेस्क-बेंच, सुरक्षित कमरे और कामकाजी डिजिटल उपकरण नहीं मिलेंगे, तब तक नई शिक्षा नीति और डिजिटल क्लास के दावे जमीनी स्तर पर सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे। वार्ड के स्कूलों रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी।
धीरज मलिक, वार्ड-8, जिला पार्षद

10-रोहतक के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गिझी के जर्जर कमरें में लगा डिजिटल बोर्ड। संवाद

10-रोहतक के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गिझी के जर्जर कमरें में लगा डिजिटल बोर्ड। संवाद

10-रोहतक के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गिझी के जर्जर कमरें में लगा डिजिटल बोर्ड। संवाद

10-रोहतक के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गिझी के जर्जर कमरें में लगा डिजिटल बोर्ड। संवाद

10-रोहतक के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय गिझी के जर्जर कमरें में लगा डिजिटल बोर्ड। संवाद