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Rohtak News: हरियाणवी पुस्तक ‘उर्मिला किमैं कहवे सै’ का विमोचन
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 20 Jan 2026 03:21 AM IST
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40....कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हरियाणवी पुस्तक ‘उर्मिला किमैं कहवे सै’ का विमोचन के अवसर प
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर हिंदी रहा। वरिष्ठ साहित्यकार अर्चना कोचर की हरियाणवी पुस्तक ‘उर्मिला किमैं कहवे सै’ का विधिवत विमोचन किया गया।
संगोष्ठी में अतिविशिष्ट वक्ता के रूप में प्रो. अवधेश कुमार (महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा), विशिष्ट वक्ता प्रो. जंगबहादुर पाण्डेय (रांची विश्वविद्यालय) व मुख्य वक्ता प्रो. विनय कुमार (मगध विश्वविद्यालय, बोधगया) ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ संगोष्ठी की संयोजिका प्रो. पुष्पा रानी ने कहा कि हिंदी का प्रयोग केवल औपचारिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी होना चाहिए। उन्होंने अर्चना कोचर की हरियाणवी कृति ‘उर्मिला किमैं कहवे सै’ पर विचार रखते हुए कहा कि यह पुस्तक रामायण की उपेक्षित पात्र उर्मिला को न्याय दिलाने का सशक्त साहित्यिक प्रयास है।
इस अवसर पर आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर, पंजाबी विभाग की लता खेरा, कैप्टन परमजीत सिंह, डॉ. आंबेडकर कॉलेज के प्राचार्य ऋषिपाल बेदी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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रोहतक। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर हिंदी रहा। वरिष्ठ साहित्यकार अर्चना कोचर की हरियाणवी पुस्तक ‘उर्मिला किमैं कहवे सै’ का विधिवत विमोचन किया गया।
संगोष्ठी में अतिविशिष्ट वक्ता के रूप में प्रो. अवधेश कुमार (महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा), विशिष्ट वक्ता प्रो. जंगबहादुर पाण्डेय (रांची विश्वविद्यालय) व मुख्य वक्ता प्रो. विनय कुमार (मगध विश्वविद्यालय, बोधगया) ने सहभागिता की।
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कार्यक्रम का शुभारंभ संगोष्ठी की संयोजिका प्रो. पुष्पा रानी ने कहा कि हिंदी का प्रयोग केवल औपचारिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी होना चाहिए। उन्होंने अर्चना कोचर की हरियाणवी कृति ‘उर्मिला किमैं कहवे सै’ पर विचार रखते हुए कहा कि यह पुस्तक रामायण की उपेक्षित पात्र उर्मिला को न्याय दिलाने का सशक्त साहित्यिक प्रयास है।
इस अवसर पर आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर, पंजाबी विभाग की लता खेरा, कैप्टन परमजीत सिंह, डॉ. आंबेडकर कॉलेज के प्राचार्य ऋषिपाल बेदी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।