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Rohtak News: विद्यार्थियों ने समझी हरियाणा की शिल्प विरासत
Sat, 08 Aug 2026 07:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 08 Aug 2026 07:36 PM IST
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14-इंडिया इंटरनेशनल फुटवियर फेयर नई दिल्ली का दौरा के दौरान एफडीडीआई के छात्र। स्रोत- संस्थान
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर एफडीडीआई रोहतक के विद्यार्थियों ने डिजाइन लैंग्वेज इंडिया पहल के तहत बोहर गांव स्थित ललिता द्वारा रेजा का शैक्षणिक भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने हरियाणा की पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प कला को करीब से समझा।
बच्चों ने जाना कि किस तरह स्थानीय विरासत को आधुनिक डिजाइन से जोड़कर नए उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं। विद्यार्थियों ने इंडिया इंटरनेशनल फुटवियर फेयर, नई दिल्ली का भी दौरा कर फुटवियर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक मैटीरियल और तकनीकों की जानकारी हासिल की।
भ्रमण के दौरान डॉ. ललिता ने विद्यार्थियों को पारंपरिक वस्त्रों, स्थानीय शिल्प तकनीकों, रंगों, पैटर्न और टेक्सचर के साथ कारीगरों की कार्यशैली से परिचित कराया। विद्यार्थियों ने हथकरघा प्रदर्शनी में स्थानीय बुनकरों एवं कारीगरों की ओर से तैयार उत्पादों का डिजाइन के दृष्टिकोण से अध्ययन किया।
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उन्होंने समझा कि स्वदेशी सामग्री और पारंपरिक तकनीकों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालकर लोकल से ग्लोबल तक नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
विद्यार्थियों को कक्षा शिक्षण के साथ वास्तविक उद्योग और भारतीय शिल्प परंपराओं से जोड़ने पर जोर दे रहा है। इस भ्रमण से विद्यार्थियों को परंपरा, रचनात्मकता, मटेरियल, तकनीक और बाजार को एक साथ समझने का अवसर मिला।
आईआईएफएफ में विद्यार्थियों ने फुटवियर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले नए रॉ मैटेरियल, कंपोनेंट्स, सोल मटेरियल, फैब्रिक्स और एक्सेसरीज का अवलोकन किया। उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद कर विद्यार्थियों ने उत्पादन तकनीक, मैटेरियल की गुणवत्ता, आराम, टिकाऊपन और बाजार की बदलती मांग के बारे में जानकारी ली।
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रोहतक। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर एफडीडीआई रोहतक के विद्यार्थियों ने डिजाइन लैंग्वेज इंडिया पहल के तहत बोहर गांव स्थित ललिता द्वारा रेजा का शैक्षणिक भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने हरियाणा की पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प कला को करीब से समझा।
बच्चों ने जाना कि किस तरह स्थानीय विरासत को आधुनिक डिजाइन से जोड़कर नए उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं। विद्यार्थियों ने इंडिया इंटरनेशनल फुटवियर फेयर, नई दिल्ली का भी दौरा कर फुटवियर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक मैटीरियल और तकनीकों की जानकारी हासिल की।
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भ्रमण के दौरान डॉ. ललिता ने विद्यार्थियों को पारंपरिक वस्त्रों, स्थानीय शिल्प तकनीकों, रंगों, पैटर्न और टेक्सचर के साथ कारीगरों की कार्यशैली से परिचित कराया। विद्यार्थियों ने हथकरघा प्रदर्शनी में स्थानीय बुनकरों एवं कारीगरों की ओर से तैयार उत्पादों का डिजाइन के दृष्टिकोण से अध्ययन किया।
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उन्होंने समझा कि स्वदेशी सामग्री और पारंपरिक तकनीकों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालकर लोकल से ग्लोबल तक नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
विद्यार्थियों को कक्षा शिक्षण के साथ वास्तविक उद्योग और भारतीय शिल्प परंपराओं से जोड़ने पर जोर दे रहा है। इस भ्रमण से विद्यार्थियों को परंपरा, रचनात्मकता, मटेरियल, तकनीक और बाजार को एक साथ समझने का अवसर मिला।
आईआईएफएफ में विद्यार्थियों ने फुटवियर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले नए रॉ मैटेरियल, कंपोनेंट्स, सोल मटेरियल, फैब्रिक्स और एक्सेसरीज का अवलोकन किया। उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद कर विद्यार्थियों ने उत्पादन तकनीक, मैटेरियल की गुणवत्ता, आराम, टिकाऊपन और बाजार की बदलती मांग के बारे में जानकारी ली।