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Rohtak News: फसल बुआई से लेकर कटाई तक की लागत का मुआवजा दे बीमा कंपनी
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन नागेंद्र सिंह कादियान का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान को बुआई से लेकर कटाई तक की लागत व नुकसान को देखकर पूरा मुआवजा मिलना चाहिए। किलोई गांव निवासी भूपेंद्र को बीमा कंपनी बची हुई राशि 42,391 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित दे। आयोग ने 30 मार्च को निर्णय सुनाते हुए पांच हजार हर्जाना व पांच हजार कानूनी खर्च देने के आदेश दिए हैं।
आयोग के मुताबिक, भूपेंद्र ने 2021 में दायर अर्जी में बताया था कि वे चार एकड़ जमीन के मालिक हैं। 2019 में गेहूं की फसल की बिजाई की थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से बीमा करवाया गया। लाढ़ौत के देना बैंक की तरफ से प्रीमियम काटा गया।
मार्च 2020 में जब उनकी चार एकड़ गेहूं की फसल पक कर तैयार हो गई तो बारिश से खराब हो गई थी। कृषि विभाग ने सर्वे में 80 प्रतिशत नुकसान बताया जबकि शिकायतकर्ता के मुताबिक, नुकसान 100 प्रतिशत था। बीमा कंपनी ने किसान के खाते में मात्र 27,539 रुपये क्लेम के तौर पर जमा करवाए।
बीमा योजना के तहत कंपनी को 25,200 रुपये प्रति एकड़ की दर से 1,00,800 रुपये देने थे। आयोग ने बीमा कंपनी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा तो बताया गया कि नुकसान के आकलन के लिए सर्वेयर नियुक्त किया गया है। उसी की रिपोर्ट के बाद 27,539 रुपये का भुगतान किया गया।
आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद निर्णय देते हुए कहा है कि गेहूं की फसल आमतौर पर नवंबर और दिसंबर के बीच बोई जाती है। मार्च और अप्रैल के बीच काटी जाती है। किसान का मार्च 2020 में गेहूं की फसल में नुकसान हुआ था। खेती में लगने वाली सारी लागत लगा दी थी। ऐसे में 75 प्रतिशत नुकसान के हिसाब से बची राशि 42,391 रुपये ब्याज सहित दिए जाएं।
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रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन नागेंद्र सिंह कादियान का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान को बुआई से लेकर कटाई तक की लागत व नुकसान को देखकर पूरा मुआवजा मिलना चाहिए। किलोई गांव निवासी भूपेंद्र को बीमा कंपनी बची हुई राशि 42,391 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित दे। आयोग ने 30 मार्च को निर्णय सुनाते हुए पांच हजार हर्जाना व पांच हजार कानूनी खर्च देने के आदेश दिए हैं।
आयोग के मुताबिक, भूपेंद्र ने 2021 में दायर अर्जी में बताया था कि वे चार एकड़ जमीन के मालिक हैं। 2019 में गेहूं की फसल की बिजाई की थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से बीमा करवाया गया। लाढ़ौत के देना बैंक की तरफ से प्रीमियम काटा गया।
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मार्च 2020 में जब उनकी चार एकड़ गेहूं की फसल पक कर तैयार हो गई तो बारिश से खराब हो गई थी। कृषि विभाग ने सर्वे में 80 प्रतिशत नुकसान बताया जबकि शिकायतकर्ता के मुताबिक, नुकसान 100 प्रतिशत था। बीमा कंपनी ने किसान के खाते में मात्र 27,539 रुपये क्लेम के तौर पर जमा करवाए।
बीमा योजना के तहत कंपनी को 25,200 रुपये प्रति एकड़ की दर से 1,00,800 रुपये देने थे। आयोग ने बीमा कंपनी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा तो बताया गया कि नुकसान के आकलन के लिए सर्वेयर नियुक्त किया गया है। उसी की रिपोर्ट के बाद 27,539 रुपये का भुगतान किया गया।
आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद निर्णय देते हुए कहा है कि गेहूं की फसल आमतौर पर नवंबर और दिसंबर के बीच बोई जाती है। मार्च और अप्रैल के बीच काटी जाती है। किसान का मार्च 2020 में गेहूं की फसल में नुकसान हुआ था। खेती में लगने वाली सारी लागत लगा दी थी। ऐसे में 75 प्रतिशत नुकसान के हिसाब से बची राशि 42,391 रुपये ब्याज सहित दिए जाएं।