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Rohtak News: क्लबफुट पीड़ित बच्चे का इलाज संभव
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 04 Jun 2026 05:50 AM IST
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25-पीजीआई में क्लबफुट पीड़ित बच्चों के साथ केक काटते डॉक्टर। स्रोत: पीजीआई
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रोहतक। विश्व क्लबफुट दिवस के अवसर पर बुधवार को स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के हड्डी रोग विभाग ने क्लबफुट से पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए जागरूकता एवं प्रेरणा कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में इलाज करा रहे बच्चों, उनके माता-पिता और क्लबफुट क्लिनिक की टीम ने भाग लिया।
कुलसचिव एवं हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूप सिंह ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर केक काटा गया तथा बच्चों को बिस्कुट, चॉकलेट और उपहार वितरित किए गए।
डॉ. रूप सिंह ने बताया कि क्लबफुट कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। यदि जन्म के तुरंत बाद उपचार शुरू किया जाए और नियमित फॉलोअप किया जाए तो बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने बताया कि क्लबफुट जन्मजात पैरों की विकृति है, जिसमें पैर मुड़े हुए होते हैं।
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कुलसचिव ने कहा कि हर 1000 नवजात में से लगभग एक बच्चा इससे प्रभावित होता है। समय पर उपचार न मिलने पर बच्चा दिव्यांग हो सकता है। सही देखभाल से 95 प्रतिशत बच्चों के पैर पूरी तरह ठीक किए जा सकते हैं।
पीजीआई क्लबफुट क्लिनिक में 1000 से अधिक बच्चों का सफल इलाज
डॉ. जितेंद्र वाधवानी ने बताया कि यह क्लिनिक हर सोमवार, बुधवार और शनिवार को संचालित होता है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य पोंसेटी विधि से उपचार किया जाता है, जिसमें क्रमबद्ध प्लास्टर, आवश्यकता पड़ने पर छोटी शल्य प्रक्रिया, विशेष जूते-ब्रेस, परामर्श और लंबे समय तक फॉलोअप शामिल है।
डॉ. जितेंद्र वाधवानी ने बताया कि ओपीडी के दौरान प्रतिदिन लगभग 20 बच्चे प्लास्टर, जांच, ब्रेस और पुनर्वास के लिए आते हैं। यह कार्यक्रम क्योर इंडिया के सहयोग से क्लबफुट इंडिया प्रोग्राम के तहत चल रहा है। इसमें उपचार, ब्रेस, परामर्श और फॉलोअप पूरी तरह निशुल्क है। अब तक 1000 से अधिक बच्चों का उपचार किया जा चुका है।
कुलसचिव एवं हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूप सिंह ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर केक काटा गया तथा बच्चों को बिस्कुट, चॉकलेट और उपहार वितरित किए गए।
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डॉ. रूप सिंह ने बताया कि क्लबफुट कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। यदि जन्म के तुरंत बाद उपचार शुरू किया जाए और नियमित फॉलोअप किया जाए तो बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने बताया कि क्लबफुट जन्मजात पैरों की विकृति है, जिसमें पैर मुड़े हुए होते हैं।
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कुलसचिव ने कहा कि हर 1000 नवजात में से लगभग एक बच्चा इससे प्रभावित होता है। समय पर उपचार न मिलने पर बच्चा दिव्यांग हो सकता है। सही देखभाल से 95 प्रतिशत बच्चों के पैर पूरी तरह ठीक किए जा सकते हैं।
पीजीआई क्लबफुट क्लिनिक में 1000 से अधिक बच्चों का सफल इलाज
डॉ. जितेंद्र वाधवानी ने बताया कि यह क्लिनिक हर सोमवार, बुधवार और शनिवार को संचालित होता है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य पोंसेटी विधि से उपचार किया जाता है, जिसमें क्रमबद्ध प्लास्टर, आवश्यकता पड़ने पर छोटी शल्य प्रक्रिया, विशेष जूते-ब्रेस, परामर्श और लंबे समय तक फॉलोअप शामिल है।
डॉ. जितेंद्र वाधवानी ने बताया कि ओपीडी के दौरान प्रतिदिन लगभग 20 बच्चे प्लास्टर, जांच, ब्रेस और पुनर्वास के लिए आते हैं। यह कार्यक्रम क्योर इंडिया के सहयोग से क्लबफुट इंडिया प्रोग्राम के तहत चल रहा है। इसमें उपचार, ब्रेस, परामर्श और फॉलोअप पूरी तरह निशुल्क है। अब तक 1000 से अधिक बच्चों का उपचार किया जा चुका है।