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Rohtak News: मंजिलें क्या हैं, रास्ता क्या है...आलोक के गीतों ने बांधा समा
Wed, 12 Aug 2026 10:12 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 12 Aug 2026 10:12 PM IST
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32 सुपवा में कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को स्मृति चिह्न देते
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी सुपवा) में बुधवार को तीन दिवसीय डिजाइन फेस्टिवल सूत्रम का ध्वजारोहण के साथ आगाज हुआ। प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव की प्रस्तुति ‘मुद्दतों खुद की कुछ खबर न लगे’, ‘मंजिलें क्या हैं, रास्ता क्या है, हौसला हो तो फासला क्या है’ और प्रसिद्ध अम्मा व बाबूजी की प्रस्तुतियों पर ऑडिटोरियम तालियों से गूंजता रहा।
14 अगस्त तक चलने वाले फेस्टिवल में छात्रों की रचनात्मकता के साथ कला, क्राफ्ट, फैशन और संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिल रहे हैं। फैकल्टी ऑफ डिजाइन की ओर से आयोजित फेस्टिवल में छात्रों ने पढ़ाई के दौरान तैयार किए गए डिजाइन और कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई। अलग-अलग प्रदेशों की कला व क्राफ्ट से परिचित कराने के लिए लाइव वर्कशॉप भी आयोजित की गईं।
फेस्टिवल का शुभारंभ प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव और कुलपति डॉ. अमित आर्य ने डिजाइन बिल्डिंग के बाहर सूत्रम के लिए तैयार विशेष ध्वज फहराकर किया। इसके बाद प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। अतिथियों ने छात्रों के डिजाइन और क्राफ्ट वर्क को देखा और उनकी सराहना की।
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शाम को सेंट्रल ऑडिटोरियम में आलोकनामा का आयोजन हुआ। प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव ने अपनी शायरी और गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ मुख्य अतिथि रहे।
फेस्टिवल में छात्रों ने चौपाटी नाम से फूड कोर्ट भी बनाया है जहां विभिन्न खाद्य पदार्थों का लोगों ने आनंद लिया। लाइव क्राफ्ट वर्कशॉप में छात्रों के साथ स्कूली विद्यार्थियों ने भी विशेषज्ञों से कला की बारीकियां सीखीं। रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. अजय कौशिक समेत विभिन्न फैकल्टी के प्रमुख मौजूद रहे।
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रोहतक। दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी सुपवा) में बुधवार को तीन दिवसीय डिजाइन फेस्टिवल सूत्रम का ध्वजारोहण के साथ आगाज हुआ। प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव की प्रस्तुति ‘मुद्दतों खुद की कुछ खबर न लगे’, ‘मंजिलें क्या हैं, रास्ता क्या है, हौसला हो तो फासला क्या है’ और प्रसिद्ध अम्मा व बाबूजी की प्रस्तुतियों पर ऑडिटोरियम तालियों से गूंजता रहा।
14 अगस्त तक चलने वाले फेस्टिवल में छात्रों की रचनात्मकता के साथ कला, क्राफ्ट, फैशन और संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिल रहे हैं। फैकल्टी ऑफ डिजाइन की ओर से आयोजित फेस्टिवल में छात्रों ने पढ़ाई के दौरान तैयार किए गए डिजाइन और कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई। अलग-अलग प्रदेशों की कला व क्राफ्ट से परिचित कराने के लिए लाइव वर्कशॉप भी आयोजित की गईं।
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फेस्टिवल का शुभारंभ प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव और कुलपति डॉ. अमित आर्य ने डिजाइन बिल्डिंग के बाहर सूत्रम के लिए तैयार विशेष ध्वज फहराकर किया। इसके बाद प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। अतिथियों ने छात्रों के डिजाइन और क्राफ्ट वर्क को देखा और उनकी सराहना की।
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शाम को सेंट्रल ऑडिटोरियम में आलोकनामा का आयोजन हुआ। प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार आलोक श्रीवास्तव ने अपनी शायरी और गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ मुख्य अतिथि रहे।
फेस्टिवल में छात्रों ने चौपाटी नाम से फूड कोर्ट भी बनाया है जहां विभिन्न खाद्य पदार्थों का लोगों ने आनंद लिया। लाइव क्राफ्ट वर्कशॉप में छात्रों के साथ स्कूली विद्यार्थियों ने भी विशेषज्ञों से कला की बारीकियां सीखीं। रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा, डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. अजय कौशिक समेत विभिन्न फैकल्टी के प्रमुख मौजूद रहे।

32 सुपवा में कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को स्मृति चिह्न देते