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Sirsa News: जिले की अदालतों पर 52 हजार मामलों का बोझ, समय पर निपटारा चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 14 Apr 2026 11:54 PM IST
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अदालत से
लगातार बढ़ती जा रही है लंबित केसों की संख्या, पीड़ितों के लिए लंबी होती जा रही है न्याय की प्रतीक्षा
20 साल पुराने 4, 5 साल पुराने 148 व एक दशक पुराने 47 केसों का अब तक नहीं हुआ निपटारा
फोटो
सिरसा। जिले की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इससे न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। जिले की विभिन्न अदालतों में 52 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें कई ऐसे केस शामिल हैं जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विशेष रूप से अदालतों में चार मामले 20 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं।
इसके अलावा, 15 वर्ष से अधिक पुराने 7 मामले, 10 साल से अधिक पुराने 47 मामले व 5 साल से अधिक समय से लंबित 148 मामलों का अब तक निपटारा नहीं हो पाया है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या का प्रमुख कारण न्यायाधीशों की सीमित संख्या को माना जा रहा है। पूरे जिले में केवल 23 न्यायाधीश कार्यरत हैं। इन पर हजारों मामलों का बोझ है। इस स्थिति में हर मामले का समय पर निपटारा चुनौतीपूर्ण हो गया है। संवाद
सत्र अदालतों में 14 हजार व निचली अदालतों में 22 हजार से ज्यादा केस लंबित
न्यायिक परिसर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के अलावा, सात अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। इन आठ अदालतों में 14 हजार 923 के लंबित हैं। इनमें से 9 हजार 497 क्रिमिनल और 5 हजार 426 सिविल केस शामिल हैं। निचली अदालतों में 22 हजार 858 केस लंबित हैं। डबवाली की तीन अदालतों में 8 हजार 540, ऐलनाबाद की दो अदालतों में 5 हजार 973 व रानियां की एक अदालत में 155 केस लंबित हैं।
सत्र अदालताें में केसों की संख्या
आंकड़ों के मुताबिक, जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीश जिंदिया की अदालत में 760 केस, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत में 3 हजार 977, न्यायाधीश नरेश कुमार सिंघल की अदालत में 595, न्यायाधीश राजन वालिया की अदालत में 2 हजार 184, न्यायाधीश कृष्ण कांत की अदालत में 2 हजार 27, न्यायाधीश सुमित गर्ग की अदालत में 2 हजार 481, न्यायाधीश नितिन किनरा की अदालत में 1461 व न्यायाधीश नवजीत क्लेयर की अदालत में एक हजार 38 केस लंबित हैं।
23 अदालतों में कुल 10 एडीए
अधिवक्ता संजू बाला का कहना है कि लंबित मामलों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण न्यायाधीशों की कमी है। जिले की जनसंख्या करीब 16 लाख हो चुकी है। इस हिसाब से कम से कम 35 न्यायाधीश जिले में होने चाहिए। एडीए (सहायक जिला एटॉर्नी) की संख्या भी बहुत कम है। कुल 23 अदालतों में केवल 10 एडीए हैं।
कोट्स
न्यायाधीशों की कमी के कारण लंबित केसों की संख्या बढ़ रही है। केसों का बोझ इतना ज्यादा है कि एक केस का निपटारा करने में कम से कम तीन साल लग जाते हैं। फिर न्यायाधीश का तबादला हो जाता है। नए न्यायाधीश को फिर से केस को समझना पड़ता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जाए।
-केवल कंबोज, उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन सिरसा।
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लगातार बढ़ती जा रही है लंबित केसों की संख्या, पीड़ितों के लिए लंबी होती जा रही है न्याय की प्रतीक्षा
20 साल पुराने 4, 5 साल पुराने 148 व एक दशक पुराने 47 केसों का अब तक नहीं हुआ निपटारा
फोटो
सिरसा। जिले की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इससे न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। जिले की विभिन्न अदालतों में 52 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें कई ऐसे केस शामिल हैं जो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विशेष रूप से अदालतों में चार मामले 20 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं।
इसके अलावा, 15 वर्ष से अधिक पुराने 7 मामले, 10 साल से अधिक पुराने 47 मामले व 5 साल से अधिक समय से लंबित 148 मामलों का अब तक निपटारा नहीं हो पाया है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या का प्रमुख कारण न्यायाधीशों की सीमित संख्या को माना जा रहा है। पूरे जिले में केवल 23 न्यायाधीश कार्यरत हैं। इन पर हजारों मामलों का बोझ है। इस स्थिति में हर मामले का समय पर निपटारा चुनौतीपूर्ण हो गया है। संवाद
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सत्र अदालतों में 14 हजार व निचली अदालतों में 22 हजार से ज्यादा केस लंबित
न्यायिक परिसर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के अलावा, सात अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। इन आठ अदालतों में 14 हजार 923 के लंबित हैं। इनमें से 9 हजार 497 क्रिमिनल और 5 हजार 426 सिविल केस शामिल हैं। निचली अदालतों में 22 हजार 858 केस लंबित हैं। डबवाली की तीन अदालतों में 8 हजार 540, ऐलनाबाद की दो अदालतों में 5 हजार 973 व रानियां की एक अदालत में 155 केस लंबित हैं।
सत्र अदालताें में केसों की संख्या
आंकड़ों के मुताबिक, जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीश जिंदिया की अदालत में 760 केस, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल की अदालत में 3 हजार 977, न्यायाधीश नरेश कुमार सिंघल की अदालत में 595, न्यायाधीश राजन वालिया की अदालत में 2 हजार 184, न्यायाधीश कृष्ण कांत की अदालत में 2 हजार 27, न्यायाधीश सुमित गर्ग की अदालत में 2 हजार 481, न्यायाधीश नितिन किनरा की अदालत में 1461 व न्यायाधीश नवजीत क्लेयर की अदालत में एक हजार 38 केस लंबित हैं।
23 अदालतों में कुल 10 एडीए
अधिवक्ता संजू बाला का कहना है कि लंबित मामलों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण न्यायाधीशों की कमी है। जिले की जनसंख्या करीब 16 लाख हो चुकी है। इस हिसाब से कम से कम 35 न्यायाधीश जिले में होने चाहिए। एडीए (सहायक जिला एटॉर्नी) की संख्या भी बहुत कम है। कुल 23 अदालतों में केवल 10 एडीए हैं।
कोट्स
न्यायाधीशों की कमी के कारण लंबित केसों की संख्या बढ़ रही है। केसों का बोझ इतना ज्यादा है कि एक केस का निपटारा करने में कम से कम तीन साल लग जाते हैं। फिर न्यायाधीश का तबादला हो जाता है। नए न्यायाधीश को फिर से केस को समझना पड़ता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जाए।
-केवल कंबोज, उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन सिरसा।

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