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Sirsa News: हादसों के बाद पुरातन जोहड़ पर चहारदीवारी निर्माण शुरू
Sun, 12 Jul 2026 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 12 Jul 2026 11:46 PM IST
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गांव रोड़ी के मुख्य बाजार में श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के सामने स्थित है पुरातन जोहड़
फोटो 14 व 15
संवाद न्यूज एजेंसी
रोड़ी। गांव रोड़ी के मुख्य बाजार में श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के सामने स्थित पुरातन जोहड़ पर लगातार हो रहे हादसों और ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद प्रशासन ने चहारदीवारी निर्माण का कार्य शुरू करा दिया है। इससे ग्रामीणों में राहत की उम्मीद जगी है।
यह पुरातन जोहड़ कभी जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत हुआ करता था लेकिन लंबे समय से नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति खराब होती चली गई। जोहड़ में जमा गंदा पानी, कूड़ा-कचरा और जंगली घास के कारण आसपास के बाजार का वातावरण प्रभावित हो रहा है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं, दुकानदारों और राहगीरों को भी दुर्गंध व गंदगी के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।
बीते महीनों में जोहड़ में पशुओं के गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं। 13 दिसंबर 2025 को सीवर डिग्गी में गिरने से एक बछड़े की मौत हो गई थी। इसके बाद 3 मार्च 2026 को चार गायें जोहड़ में गिर गईं जिनकी मौत हो गई। वहीं, 17 अप्रैल 2026 को दो गायें फिर जोहड़ में गिरीं। इनमें एक को ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया जबकि दूसरी की मौत हो गई।
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इन घटनाओं के बाद ग्रामीण लगातार जोहड़ के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग कर रहे थे। अब प्रशासन ने जोहड़ के चारों ओर चहारदीवारी निर्माण का कार्य शुरू करा दिया है। ग्रामीण चमकौर सिंह, गुरविंदर सिंह, बलकार सिंह, मनदीप सिंह, भोला सिंह, बलजिंदर सिंह आदि का कहना है कि फिलहाल केवल चहारदीवारी बनाई जा रही है जबकि पिछले करीब एक वर्ष से जोहड़ की सफाई नहीं कराई गई है।
ऐसे में जोहड़ में जमा गंदगी, दूषित पानी और जंगली घास की समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि चहारदीवारी निर्माण के साथ-साथ जोहड़ की नियमित सफाई, जल निकासी और सुंदरीकरण भी कराया जाए ताकि यह पुरातन जल स्रोत सुरक्षित और स्वच्छ बन सके तथा बाजार क्षेत्र को गंदगी और दुर्गंध से भी राहत मिल सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोड़ी। गांव रोड़ी के मुख्य बाजार में श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के सामने स्थित पुरातन जोहड़ पर लगातार हो रहे हादसों और ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद प्रशासन ने चहारदीवारी निर्माण का कार्य शुरू करा दिया है। इससे ग्रामीणों में राहत की उम्मीद जगी है।
यह पुरातन जोहड़ कभी जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत हुआ करता था लेकिन लंबे समय से नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति खराब होती चली गई। जोहड़ में जमा गंदा पानी, कूड़ा-कचरा और जंगली घास के कारण आसपास के बाजार का वातावरण प्रभावित हो रहा है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं, दुकानदारों और राहगीरों को भी दुर्गंध व गंदगी के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।
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बीते महीनों में जोहड़ में पशुओं के गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं। 13 दिसंबर 2025 को सीवर डिग्गी में गिरने से एक बछड़े की मौत हो गई थी। इसके बाद 3 मार्च 2026 को चार गायें जोहड़ में गिर गईं जिनकी मौत हो गई। वहीं, 17 अप्रैल 2026 को दो गायें फिर जोहड़ में गिरीं। इनमें एक को ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया जबकि दूसरी की मौत हो गई।
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इन घटनाओं के बाद ग्रामीण लगातार जोहड़ के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग कर रहे थे। अब प्रशासन ने जोहड़ के चारों ओर चहारदीवारी निर्माण का कार्य शुरू करा दिया है। ग्रामीण चमकौर सिंह, गुरविंदर सिंह, बलकार सिंह, मनदीप सिंह, भोला सिंह, बलजिंदर सिंह आदि का कहना है कि फिलहाल केवल चहारदीवारी बनाई जा रही है जबकि पिछले करीब एक वर्ष से जोहड़ की सफाई नहीं कराई गई है।
ऐसे में जोहड़ में जमा गंदगी, दूषित पानी और जंगली घास की समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि चहारदीवारी निर्माण के साथ-साथ जोहड़ की नियमित सफाई, जल निकासी और सुंदरीकरण भी कराया जाए ताकि यह पुरातन जल स्रोत सुरक्षित और स्वच्छ बन सके तथा बाजार क्षेत्र को गंदगी और दुर्गंध से भी राहत मिल सके।