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Sirsa News: ड्रॉप आउट बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनीं दिव्या
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 25 Jan 2026 11:51 PM IST
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सिरसा।दिव्या सांवरिया व उनकी टीम बच्चों को पढ़ाने के दौरान मौजूद। स्वयं
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पढ़ाई छोड़ चुके विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ रहीं
- ड्रॉप आउट बच्चों को निशुल्क पढ़ाती हैं, अब तक 1000 बच्चों को जोड़ चुकीं शिक्षा से
फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। आज के दौर में जहां पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं, प्रेम नगर की रहने वाली समाजसेविका दिव्या सांवरिया इन बच्चों के लिए उम्मीद की मजबूत किरण बनकर सामने आई हैं। पिछले 8 वर्षों से लगातार सामाजिक कार्य करते हुए वह ऐसे विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रही हैं, जो किसी न किसी कारण से स्कूल छोड़ चुके थे।
दिव्या सांवरिया का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ वह ड्रॉप आउट बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का कार्य कर रही हैं। अब तक वह करीब 1000 बच्चों को शिक्षा से जोड़ चुकी हैं, जिनमें से कई बच्चे आज नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं और पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
स्लम एरिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दिव्या सांवरिया का कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। आर्थिक तंगी, पारिवारिक मजबूरियां और जागरूकता की कमी के कारण यहां के कई बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में दिव्या न सिर्फ बच्चों को पढ़ाती हैं, बल्कि उनके परिजनों को भी शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करती हैं। वह घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करती हैं और बच्चों को दोबारा स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करती हैं।
वर्तमान में 150 बच्चों को शिक्षा दे रहीं दिव्या
दिव्या सांवरिया ने बताया कि वर्तमान में उनके पास करीब 150 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वहीं, इन बच्चों का दाखिला समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में करवाया जाता है। इनमें से कई बच्चों को पढ़ाई से जुड़े चार से पांच साल हो चुके हैं, जो अब शिक्षा की मुख्यधारा में मजबूती से जुड़े हुए हैं। स्कूल में दाखिले से पहले दिव्या बच्चों को बुनियादी पढ़ाई, लेखन और गणित की निशुल्क तैयारी भी करवाती हैं, ताकि वे कक्षा में पीछे न रहें।
उच्च शिक्षा ग्रहण कर चुकी हैं दिव्या
दिव्या सांवरिया ने चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय में एमए (नेट- जेआरएफ ) तथा एमएड की डिग्री प्राप्त की है। उनकी स्नातक शिक्षा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से हुई है। वह जेबीटी, बीएड प्रशिक्षित हैं और अंग्रेजी नेट-जेआरएफ, एचटेट, सीटेट एवं पीएसटीईटी जैसी प्रमुख परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुकी हैं। वर्ष 2018 से दिव्या सांवरिया शिक्षा से वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। वह वीर भगत सिंह यूथ सोसायटी और शहीद भगत सिंह ब्रिगेड समाज सुधार समिति की सक्रिय सदस्य हैं।
वर्जन
शिक्षा ही समाज को बदलने का सबसे मजबूत हथियार है। मेरा सपना है कि भविष्य में कोई भी बच्चा मजबूरी के कारण पढ़ाई न छोड़े। उनके इस प्रयास से न केवल बच्चों का भविष्य संवर रहा है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति एक नई सोच भी विकसित हो रही है।
- दिव्या सांवरिया, समाजसेवी।
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फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। आज के दौर में जहां पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं, प्रेम नगर की रहने वाली समाजसेविका दिव्या सांवरिया इन बच्चों के लिए उम्मीद की मजबूत किरण बनकर सामने आई हैं। पिछले 8 वर्षों से लगातार सामाजिक कार्य करते हुए वह ऐसे विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रही हैं, जो किसी न किसी कारण से स्कूल छोड़ चुके थे।
दिव्या सांवरिया का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ वह ड्रॉप आउट बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का कार्य कर रही हैं। अब तक वह करीब 1000 बच्चों को शिक्षा से जोड़ चुकी हैं, जिनमें से कई बच्चे आज नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं और पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
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स्लम एरिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दिव्या सांवरिया का कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। आर्थिक तंगी, पारिवारिक मजबूरियां और जागरूकता की कमी के कारण यहां के कई बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में दिव्या न सिर्फ बच्चों को पढ़ाती हैं, बल्कि उनके परिजनों को भी शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करती हैं। वह घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करती हैं और बच्चों को दोबारा स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करती हैं।
वर्तमान में 150 बच्चों को शिक्षा दे रहीं दिव्या
दिव्या सांवरिया ने बताया कि वर्तमान में उनके पास करीब 150 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वहीं, इन बच्चों का दाखिला समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में करवाया जाता है। इनमें से कई बच्चों को पढ़ाई से जुड़े चार से पांच साल हो चुके हैं, जो अब शिक्षा की मुख्यधारा में मजबूती से जुड़े हुए हैं। स्कूल में दाखिले से पहले दिव्या बच्चों को बुनियादी पढ़ाई, लेखन और गणित की निशुल्क तैयारी भी करवाती हैं, ताकि वे कक्षा में पीछे न रहें।
उच्च शिक्षा ग्रहण कर चुकी हैं दिव्या
दिव्या सांवरिया ने चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय में एमए (नेट- जेआरएफ ) तथा एमएड की डिग्री प्राप्त की है। उनकी स्नातक शिक्षा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से हुई है। वह जेबीटी, बीएड प्रशिक्षित हैं और अंग्रेजी नेट-जेआरएफ, एचटेट, सीटेट एवं पीएसटीईटी जैसी प्रमुख परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुकी हैं। वर्ष 2018 से दिव्या सांवरिया शिक्षा से वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। वह वीर भगत सिंह यूथ सोसायटी और शहीद भगत सिंह ब्रिगेड समाज सुधार समिति की सक्रिय सदस्य हैं।
वर्जन
शिक्षा ही समाज को बदलने का सबसे मजबूत हथियार है। मेरा सपना है कि भविष्य में कोई भी बच्चा मजबूरी के कारण पढ़ाई न छोड़े। उनके इस प्रयास से न केवल बच्चों का भविष्य संवर रहा है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति एक नई सोच भी विकसित हो रही है।
- दिव्या सांवरिया, समाजसेवी।