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Sirsa News: विद्यार्थियों के सीड बाल प्रोजेक्ट ने मेले में बटोरीं सुर्खियां
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सिरसा सीड बॉल प्रोजेक्ट के बारे में जानते हुए महिला
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) के छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए पीएम श्री विश्वकर्मा मेले में सीड बॉल निर्माण का प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय के ऊर्जा और पर्यावरण विभाग के छात्र विनोद व उसके दोस्तों ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया है।
छात्रों ने जैविक कंपोस्ट और मिट्टी के साथ मिलाकर सीड बाल तैयार करने की विशेष मशीन विकसित की है। यह मशीन पूरी तरह पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई है।
इस मशीन की सहायता से बीजों को मिट्टी और जैविक खाद में सुरक्षित रूप से ढक दिया जाता है, जिससे बीज अंकुरण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के तहत सामान्य पौधों की सीड बॉल तैयार की जा रही हैं, जबकि आने वाले समय में फूलों की सीड बाल भी तैयार करने की योजना है। इस संबंध में विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर आलोक सरन ने बताया कि कुछ समय पहले सीड बॉल को लेकर विदेशों की प्रक्रिया को अपनाने का प्रयास देश में किया गया था, लेकिन वह पूरी तरह से कामयाब नहीं हुआ।
विद्यार्थियों की तैयार की गई तकनीकी में बीज की गुणवत्ता का ध्यान रखा गया है। इस सीड बाल के पौधे की बढ़ने व कामयाब होने की क्षमता ज्यादा है।
छात्रों ने बताया कि मौजूदा समय में सिरसा की भौगोलिक परिस्थिति के अनुरूप सीड बॉल बनाई गई हैं। कीकर, शीशम और खेजड़ी के बीजों की सीड बॉल तैयार की है। छात्रों ने बताया कि इस मशीन को बनाने में अभी प्राथमिक स्टेज पर कम लागत आई है।फूलों के पौधों के बीजों की सीड बॉल पर काम कर रहे हैं। जल्द ही शहरवासियों को सीड बॉल तैयार देंगे। इसे आसानी से ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में उपयोग में लाया जा सकता है।
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) के छात्रों ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए पीएम श्री विश्वकर्मा मेले में सीड बॉल निर्माण का प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय के ऊर्जा और पर्यावरण विभाग के छात्र विनोद व उसके दोस्तों ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया है।
छात्रों ने जैविक कंपोस्ट और मिट्टी के साथ मिलाकर सीड बाल तैयार करने की विशेष मशीन विकसित की है। यह मशीन पूरी तरह पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए डिजाइन की गई है।
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इस मशीन की सहायता से बीजों को मिट्टी और जैविक खाद में सुरक्षित रूप से ढक दिया जाता है, जिससे बीज अंकुरण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के तहत सामान्य पौधों की सीड बॉल तैयार की जा रही हैं, जबकि आने वाले समय में फूलों की सीड बाल भी तैयार करने की योजना है। इस संबंध में विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर आलोक सरन ने बताया कि कुछ समय पहले सीड बॉल को लेकर विदेशों की प्रक्रिया को अपनाने का प्रयास देश में किया गया था, लेकिन वह पूरी तरह से कामयाब नहीं हुआ।
विद्यार्थियों की तैयार की गई तकनीकी में बीज की गुणवत्ता का ध्यान रखा गया है। इस सीड बाल के पौधे की बढ़ने व कामयाब होने की क्षमता ज्यादा है।
छात्रों ने बताया कि मौजूदा समय में सिरसा की भौगोलिक परिस्थिति के अनुरूप सीड बॉल बनाई गई हैं। कीकर, शीशम और खेजड़ी के बीजों की सीड बॉल तैयार की है। छात्रों ने बताया कि इस मशीन को बनाने में अभी प्राथमिक स्टेज पर कम लागत आई है।फूलों के पौधों के बीजों की सीड बॉल पर काम कर रहे हैं। जल्द ही शहरवासियों को सीड बॉल तैयार देंगे। इसे आसानी से ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में उपयोग में लाया जा सकता है।