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Sirsa News: जांच कमेटी के सामने पेश हुआ किसान ओम प्रकाश, नहीं निकला समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 21 Jan 2026 11:51 PM IST
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किसान का आरोप- अधिकारियों ने बनाया समझौते का दबाव
एसडीएम बोले- डीसी को रिपोर्ट सौंपेगी जांच कमेटी
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। गांव कालूआना निवासी किसान ओमप्रकाश द्वारा उपायुक्त सिरसा को इच्छामृत्यु कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने संबंधी पत्र लिखे जाने के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है। पत्र सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और उपायुक्त सिरसा ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया।
इस जांच कमेटी में डबवाली के एसडीएम अर्पित संगल, जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) तथा डबवाली हेडक्वार्टर के डीएसपी को शामिल किया गया। कमेटी की ओर से शिकायतकर्ता किसान ओमप्रकाश को बुधवार को डबवाली स्थित एसडीएम कार्यालय में जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया। इसके लिए प्रशासन द्वारा शिकायतकर्ता के गांव में लिखित नोटिस भिजवाया गया था, जिसमें उससे जांच से संबंधित दस्तावेज साथ लाने के लिए कहा गया था।
बुधवार को शिकायतकर्ता किसान ओमप्रकाश व उसका पुलिसकर्मी बेटा रोशन लाल अपने दस्तावेज लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां जांच कमेटी में एसडीएम अर्पित संगल, जिला राजस्व अधिकारी व सदर थाना प्रभारी शामिल हुए। वहीं, इस मामले से जुड़े दूसरे पक्ष के लोग भी मौके पर उपस्थित हुए, क्योंकि उन्होंने भी उपायुक्त सिरसा को जांच के लिए एक प्रार्थना पत्र सौंप रखा है। जांच के दौरान दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर उनका पक्ष सुना गया, लेकिन जांच का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया।
शिकायतकर्ता किसान ओमप्रकाश व रोशन लाल का आरोप है कि यहां पर भी अधिकारियों द्वारा इनपर समझौते का दबाव बनाया और वीडियोग्राफी करने लगे। जब उन्होंने कहा कि उनके बयान दर्ज करो तो कहा कि यही आपके बयान होंगे। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई करें, जिन्होंने उनकी जमीन को हिस्सों में बांट दिया तो उनका कहना है कि उनको चार्जशीट कर तो दिया गया है। शिकायतकर्ताओं ने दूसरे पक्ष को भी मौके पर बुलाने पर एतराज जताया, जिससे जांच जैसा कुछ नहीं हुआ।
किसान ने नहीं दिया संतोषजनक जवाब : एसडीएम
एसडीएम अर्पित संगल ने बताया कि जांच के दौरान एक पक्ष, जो कथित रूप से जमीन का 4/5 हिस्सा मालिक है, उसने आरोप लगाया कि किसान ओमप्रकाश उसे अपनी हिस्सेदारी की जमीन में बुवाई नहीं करने दे रहा है। दूसरे पक्ष ने यह भी कहा कि जब तक मामले का निपटारा नहीं होता, वह अपने हिस्से की जमीन में खेती करने को तैयार है, लेकिन किसान ओमप्रकाश ने इसके लिए साफ तौर पर मना कर दिया। उसने जांच कमेटी को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जिसके कारण मौके पर कोई समाधान नहीं निकल सका। एसडीएम ने कहा कि मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है। जांच कमेटी द्वारा पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त कार्यालय सिरसा को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गांव कालूआना के किसान ओमप्रकाश का पिछले लंबे समय से पारिवारिक जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा है। किसान का आरोप है कि पांच भाइयों में से कुछ ने अपने हिस्से की जमीन किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दी, जो कि एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति है। आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने कथित तौर पर गलत तरीके से रजिस्ट्री करवाकर जमाबंदी अपने नाम करवा ली, जिससे किसान ओमप्रकाश के हिस्से की जमीन तीन टुकड़ों में बंट गई और उसके खेत तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
किसान का कहना है कि इसी कारण वह मानसिक रूप से परेशान है। उसने संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। ओमप्रकाश का आरोप है कि नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी ने आपसी मिलीभगत से गलत तरीके से रजिस्ट्री की। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने उसके खेत तक पहुंचने के लिए रास्ता और सिंचाई के लिए पानी की नाली भी नहीं छोड़ी।
किसान ओमप्रकाश ने इस मामले को लेकर सीएम विंडो से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत दर्ज करवाई है। न्याय न मिलने से हताश होकर किसान ने राष्ट्रपति के नाम इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए पत्र लिखा। इसके अलावा, उसने उपायुक्त सिरसा को भी पत्र भेजकर इच्छामृत्यु समारोह आयोजित करने की बात कहते हुए उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया।
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एसडीएम बोले- डीसी को रिपोर्ट सौंपेगी जांच कमेटी
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। गांव कालूआना निवासी किसान ओमप्रकाश द्वारा उपायुक्त सिरसा को इच्छामृत्यु कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने संबंधी पत्र लिखे जाने के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है। पत्र सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और उपायुक्त सिरसा ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया।
इस जांच कमेटी में डबवाली के एसडीएम अर्पित संगल, जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) तथा डबवाली हेडक्वार्टर के डीएसपी को शामिल किया गया। कमेटी की ओर से शिकायतकर्ता किसान ओमप्रकाश को बुधवार को डबवाली स्थित एसडीएम कार्यालय में जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया। इसके लिए प्रशासन द्वारा शिकायतकर्ता के गांव में लिखित नोटिस भिजवाया गया था, जिसमें उससे जांच से संबंधित दस्तावेज साथ लाने के लिए कहा गया था।
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बुधवार को शिकायतकर्ता किसान ओमप्रकाश व उसका पुलिसकर्मी बेटा रोशन लाल अपने दस्तावेज लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां जांच कमेटी में एसडीएम अर्पित संगल, जिला राजस्व अधिकारी व सदर थाना प्रभारी शामिल हुए। वहीं, इस मामले से जुड़े दूसरे पक्ष के लोग भी मौके पर उपस्थित हुए, क्योंकि उन्होंने भी उपायुक्त सिरसा को जांच के लिए एक प्रार्थना पत्र सौंप रखा है। जांच के दौरान दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर उनका पक्ष सुना गया, लेकिन जांच का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया।
शिकायतकर्ता किसान ओमप्रकाश व रोशन लाल का आरोप है कि यहां पर भी अधिकारियों द्वारा इनपर समझौते का दबाव बनाया और वीडियोग्राफी करने लगे। जब उन्होंने कहा कि उनके बयान दर्ज करो तो कहा कि यही आपके बयान होंगे। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई करें, जिन्होंने उनकी जमीन को हिस्सों में बांट दिया तो उनका कहना है कि उनको चार्जशीट कर तो दिया गया है। शिकायतकर्ताओं ने दूसरे पक्ष को भी मौके पर बुलाने पर एतराज जताया, जिससे जांच जैसा कुछ नहीं हुआ।
किसान ने नहीं दिया संतोषजनक जवाब : एसडीएम
एसडीएम अर्पित संगल ने बताया कि जांच के दौरान एक पक्ष, जो कथित रूप से जमीन का 4/5 हिस्सा मालिक है, उसने आरोप लगाया कि किसान ओमप्रकाश उसे अपनी हिस्सेदारी की जमीन में बुवाई नहीं करने दे रहा है। दूसरे पक्ष ने यह भी कहा कि जब तक मामले का निपटारा नहीं होता, वह अपने हिस्से की जमीन में खेती करने को तैयार है, लेकिन किसान ओमप्रकाश ने इसके लिए साफ तौर पर मना कर दिया। उसने जांच कमेटी को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जिसके कारण मौके पर कोई समाधान नहीं निकल सका। एसडीएम ने कहा कि मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है। जांच कमेटी द्वारा पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त कार्यालय सिरसा को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गांव कालूआना के किसान ओमप्रकाश का पिछले लंबे समय से पारिवारिक जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा है। किसान का आरोप है कि पांच भाइयों में से कुछ ने अपने हिस्से की जमीन किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दी, जो कि एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति है। आरोप है कि उक्त व्यक्ति ने कथित तौर पर गलत तरीके से रजिस्ट्री करवाकर जमाबंदी अपने नाम करवा ली, जिससे किसान ओमप्रकाश के हिस्से की जमीन तीन टुकड़ों में बंट गई और उसके खेत तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
किसान का कहना है कि इसी कारण वह मानसिक रूप से परेशान है। उसने संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। ओमप्रकाश का आरोप है कि नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी ने आपसी मिलीभगत से गलत तरीके से रजिस्ट्री की। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने उसके खेत तक पहुंचने के लिए रास्ता और सिंचाई के लिए पानी की नाली भी नहीं छोड़ी।
किसान ओमप्रकाश ने इस मामले को लेकर सीएम विंडो से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत दर्ज करवाई है। न्याय न मिलने से हताश होकर किसान ने राष्ट्रपति के नाम इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए पत्र लिखा। इसके अलावा, उसने उपायुक्त सिरसा को भी पत्र भेजकर इच्छामृत्यु समारोह आयोजित करने की बात कहते हुए उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया।
