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Republic Day: हरियाणा की इस हॉकी खिलाड़ी को मिलेगा पद्मश्री सम्मान, गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 25 Jan 2026 10:51 PM IST
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सार
सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार गोलकीपर रही हैं। शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें भारत की दीवार (वॉल ऑफ इंडिया ) कहा जाता है। गणतंत्र दिवस पर महिला खिलाड़ी को राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री अवॉर्ड मिलेगा।
सविता पूनिया, हॉकी खिलाड़ी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
गांव जोधकां निवासी भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान व गोलकीपर सविता पूनिया को गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। इसकी जानकारी मिलते ही रविवार को गांव जोधकां सहित पूरे जिले में खुशी का माहौल हो गया।
सविता पूनिया आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। शिक्षक ने छठी कक्षा में ही सविता की प्रतिभा को पहचान लिया। इससे पहले सविता को वर्ष 2018 में अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2022 में भीम अवॉर्ड भी मिल चुका है। सविता के पिता महेंद्र पूनिया ने बेटी को पद्मश्री के चयनित किए जाने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पूरे परिवार, समाज और गांव के लिए गर्व की बात है। सविता 18 जनवरी को ही उनसे मिलकर गई थी। इंडियन टीम के वर्ल्ड कप क्वालीफाई मुकाबले होने हैं। उसके लिए वह बंगलूरु में चल रहे शिविर में प्रशिक्षण लेने गई हैं।
वॉल ऑफ इंडिया के नाम से ख्यात
सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार गोलकीपर रही हैं। शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें भारत की दीवार (वॉल ऑफ इंडिया ) कहा जाता है। सविता को यह पहचान खासतौर पर टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 8 पेनाल्टी कॉर्नर बचाने के बाद मिली। सविता ने वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय कॅरिअर की शुरुआत की और अब तक 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं। वह 2016 रियो ओलंपिक और 2020 टोक्यो ओलंपिक (चौथा स्थान) में भारतीय टीम का हिस्सा थीं। 2018 एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली टीम की सदस्य भी रही हैं। सविता ने लगातार तीन बार एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीता है।
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सविता पूनिया आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। शिक्षक ने छठी कक्षा में ही सविता की प्रतिभा को पहचान लिया। इससे पहले सविता को वर्ष 2018 में अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2022 में भीम अवॉर्ड भी मिल चुका है। सविता के पिता महेंद्र पूनिया ने बेटी को पद्मश्री के चयनित किए जाने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पूरे परिवार, समाज और गांव के लिए गर्व की बात है। सविता 18 जनवरी को ही उनसे मिलकर गई थी। इंडियन टीम के वर्ल्ड कप क्वालीफाई मुकाबले होने हैं। उसके लिए वह बंगलूरु में चल रहे शिविर में प्रशिक्षण लेने गई हैं।
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वॉल ऑफ इंडिया के नाम से ख्यात
सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार गोलकीपर रही हैं। शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें भारत की दीवार (वॉल ऑफ इंडिया ) कहा जाता है। सविता को यह पहचान खासतौर पर टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 8 पेनाल्टी कॉर्नर बचाने के बाद मिली। सविता ने वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय कॅरिअर की शुरुआत की और अब तक 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं। वह 2016 रियो ओलंपिक और 2020 टोक्यो ओलंपिक (चौथा स्थान) में भारतीय टीम का हिस्सा थीं। 2018 एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली टीम की सदस्य भी रही हैं। सविता ने लगातार तीन बार एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीता है।
कक्षा छठी में खेलना किया शुरू
सविता गांव जोधकां के प्राइमरी स्कूल की छात्रा रही हैं। वर्ष 2003 में छठी कक्षा में पढ़ने वाली सविता को खेलते देखा तो खेल शिक्षक दीपचंद कंबोज ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिया। उन्होंने सविता के पिता महेंद्र पूनिया, जो स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट हैं, उनसे चर्चा की। उन्होंने कहा कि सविता को मौका दिया जाए तो बहुत आगे तक जा सकती है। महेंद्र पूनिया बताते हैं कि उस समय वेतन कुछ ज्यादा नहीं था, सुविधाओं का भी अभाव था। संघर्ष के पहले ही साल में सविता ने जूनियर वर्ग की नेशनल लेवल की हॉकी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सविता पूनिया की प्रमुख उपलब्धियां
- अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड : 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी।
- अर्जुन पुरस्कार (2018)।
- एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर (2020-21, 2021-22, 2022-23) अवार्ड ।
- एशिया कप 2017: स्वर्ण पदक (बेस्ट गोलकीपर का खिताब)।
- एशियाई खेल 2018: रजत पदक।
- एशिया कप 2013: कांस्य पदक।
- एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2018: रजत पदक
- एफआईएच महिला नेशंस लीग 2022: विजेता (कप्तान के रूप में)।
- एशिया कप 2022: तीसरा स्थान (कप्तान के रूप में)।
- ओलंपिक : 2016 और 2020 के ओलंपिक में भाग लिया।
- हरियाणा सरकार द्वारा भीम अवॉर्ड
सविता गांव जोधकां के प्राइमरी स्कूल की छात्रा रही हैं। वर्ष 2003 में छठी कक्षा में पढ़ने वाली सविता को खेलते देखा तो खेल शिक्षक दीपचंद कंबोज ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिया। उन्होंने सविता के पिता महेंद्र पूनिया, जो स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट हैं, उनसे चर्चा की। उन्होंने कहा कि सविता को मौका दिया जाए तो बहुत आगे तक जा सकती है। महेंद्र पूनिया बताते हैं कि उस समय वेतन कुछ ज्यादा नहीं था, सुविधाओं का भी अभाव था। संघर्ष के पहले ही साल में सविता ने जूनियर वर्ग की नेशनल लेवल की हॉकी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सविता पूनिया की प्रमुख उपलब्धियां
- अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड : 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी।
- अर्जुन पुरस्कार (2018)।
- एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर (2020-21, 2021-22, 2022-23) अवार्ड ।
- एशिया कप 2017: स्वर्ण पदक (बेस्ट गोलकीपर का खिताब)।
- एशियाई खेल 2018: रजत पदक।
- एशिया कप 2013: कांस्य पदक।
- एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2018: रजत पदक
- एफआईएच महिला नेशंस लीग 2022: विजेता (कप्तान के रूप में)।
- एशिया कप 2022: तीसरा स्थान (कप्तान के रूप में)।
- ओलंपिक : 2016 और 2020 के ओलंपिक में भाग लिया।
- हरियाणा सरकार द्वारा भीम अवॉर्ड