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Sirsa News: प्लांट में कचरे के ढेर में दब गए ग्रामीणों को दिखाए गए सुनहरे सपने
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 22 Apr 2026 11:53 PM IST
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दिल्ली की टीम जांच करते हुए। फाइल फोटो।
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20 साल पहले गांव बकरियांवाली कचरा प्लांट के लिए ली गई थी जमीन
दो साल में महज चहारदीवारी ही बनवा सके अधिकारी, पुराने कचरे का नहीं हो पाया निस्तारण
- गांव बकरियांवाली कचरा प्लांट के अंदर फूड कोर्ट से लेकर अन्य सुविधाएं की जानी थीं विकसित
- अगस्त 2023 में धरने पर बैठे थे ग्रामीण व महिलाएं, अधिकारियों ने व्यवस्था बनाने का दिया था आश्वासन
- अब सब मीटर खोलेंगे राज, मशीन चली या बंद रही
फोटो-- 9,10
सुनील बैनीवाल
सिरसा। गांव बकरियांवाली कचरा निस्तारण प्लांट वर्ष 2006 में शुरू किया गया। कांग्रेस सरकार में सुनहरे सपने दिखाकर ग्रामीणों से 13 एकड़ भूमि ली गई। ये सुनहरे सपने आज कचरे के ढेर में दबकर रह गए हैं। ग्रामीण अब कचरा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन देना अपनी गलती मान रहे हैं। वहीं, सांसद कुमारी सैलजा भी खेद जता चुकी हैं कि कांग्रेस के काल में उन्होंने यह जगह दिलवाई।
कचरा निस्तारण प्लांट की मंगलवार को उपायुक्त की गठित टीम ने जांच की। जांच में पाया गया कि कचरा निस्तारण प्लांट में पूजा वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी और जिम्मेदारी अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही है। शहर में स्वच्छता पर दम भरने वाला नगर परिषद प्रशासन कचरा निस्तारण प्लांट पर चुप्पी साध जाता है।
मुख्यालय स्तर पर अगस्त 2023 में पूजा वेस्ट मैनेजमेंट को सिरसा जिले के कचरा निस्तारण का टेंडर दिया गया। उसमें सालों से बकरियांवाली प्लांट में पड़े कचरे के निस्तारण को लेकर उसे अनुबंध में विशेष क्लॉज डाला गया था। इसमें लिखा था कि दो साल में कचरा निस्तारण प्लांट में पड़े पुराने कचरे का निस्तारण करेगा।
इसके बाद एक माह तक कचरा निस्तारण की प्रक्रिया नहीं शुरू करने पर 12 सितंबर 2023 को ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। 14 दिनों तक कचरा निस्तारण प्लांट पर धरना चला और 14 हजार मीट्रिक टन कचरा प्लांट में नहीं डालने दिया गया। इस दौरान गांव की महिलाओं ने भी कचरा निस्तारण प्लांट पर आकर धरने का समर्थन दिया और बच्चों की सलामती मांगी। प्रशासन ने ग्रामीणों की मांगों को माना और जल्द से जल्द व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद प्लांट पर काम शुरू हुआ।
18 दिसंबर 2023 को दिल्ली से पर्यावरण विभाग की टीम गांव बकरियांवाली पहुंची। वहां पर आकर टीम ने मिट्टी के सैंपल लिए और जमीन के हालात का जायजा लिया। इसके बाद टीम चली गई। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि वे पर्यावरण विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे।
नवंबर 2024 तक काम ढिलाई से चला और ग्रामीणों ने उपायुक्त से गुहार लगाई। ग्रामीणों की गुहार पर तत्कालीन उपायुक्त आरके सिंह ने प्लांट के अंदर संवाद कार्यक्रम किया। इस दौरान नगर परिषद के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि 15 फीट ऊंची दीवार व पांच फीट की जाली लगाई जाएगी। इससे कचरा प्लांट से बाहर नहीं जाएगा। इस पर एक करोड़ 86 लाख रुपये का खर्च आएगा। अक्तूबर 2025 में यह दीवार बनकर तैयार हुई।
इसलिए वर्ष 2006 में बना था प्लांट
1. कचरा निस्तारण प्लांट में कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी।
2 चहारदीवारी के साथ साथ बड़े स्तर पर अंदर व बाहर पौधे लगाए जाएंगे।
3 नियमित रूप से कचरा निस्तारण होगा।
4 बदबू भरा माहौल नहीं होगा और फूड कोर्ट अंदर होगा।
5 फायर सेफ्टी सिस्टम लगा होगा।
6 कंपोस्ट खाद ग्रामीणों को सस्ती दरों पर आवंटित की जाएगी।
प्रदूषण बोर्ड की टीम निरंतर करती रही जांच
पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड की स्थानीय टीम लगातार कचरा निस्तारण प्लांट की जांच करती रही। हर तीसरे माह रिपोर्ट तैयार हुई और जुर्माने की कार्रवाई होती रही। प्लांट की प्रक्रिया देखने वाले इंजीनियर से लेकर सीएसआई विभाग के अधिकारी तक जल्द व्यवस्था सुधारने का दावा करते रहे। यही कारण रहा कि लगातार जुर्माना कार्रवाई नगर परिषद पर चलती रही।
यह जानना जरूरी
डंपिंग साइट : 13 एकड़
पूजा वेस्ट मैनेजमेंट एजेंसी को प्लांट के लिए जगह मिली थी : 6 एकड़
सिरसा शहर से प्रतिदिन निकलने वाला कचरा : 130 मीट्रिक टन
एजेंसी प्रतिदिन रानियां, सिरसा, ऐलनाबाद से उठाती है : 220 मीट्रिक टन
एजेंसी को प्रति टन भुगतान मिलता है : 2635 रुपये
प्लांट में पड़ा था पुराना कचरा - करीबन दो लाख मीट्रिक टन
इस प्रकार मॉनिटरिंग के दिए आदेश
उपायुक्त की गठित कमेटी ने नगर परिषद के अधिकारियों को आदेश दिए कि कचरा निस्तारण प्लांट में लगी प्रत्येक मशीन का अपना सब मीटर होना चाहिए। कौन सी मशीन प्रतिदिन कितना चली है। इसका डेटा रिकॉर्ड होना चाहिए। उसी आधार पर पता चल पाएगा कि प्लांट में मशीनें कितना काम कर रही हैं या बंद पड़ी हैं। संवाद
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दो साल में महज चहारदीवारी ही बनवा सके अधिकारी, पुराने कचरे का नहीं हो पाया निस्तारण
- गांव बकरियांवाली कचरा प्लांट के अंदर फूड कोर्ट से लेकर अन्य सुविधाएं की जानी थीं विकसित
- अगस्त 2023 में धरने पर बैठे थे ग्रामीण व महिलाएं, अधिकारियों ने व्यवस्था बनाने का दिया था आश्वासन
- अब सब मीटर खोलेंगे राज, मशीन चली या बंद रही
फोटो
सुनील बैनीवाल
सिरसा। गांव बकरियांवाली कचरा निस्तारण प्लांट वर्ष 2006 में शुरू किया गया। कांग्रेस सरकार में सुनहरे सपने दिखाकर ग्रामीणों से 13 एकड़ भूमि ली गई। ये सुनहरे सपने आज कचरे के ढेर में दबकर रह गए हैं। ग्रामीण अब कचरा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन देना अपनी गलती मान रहे हैं। वहीं, सांसद कुमारी सैलजा भी खेद जता चुकी हैं कि कांग्रेस के काल में उन्होंने यह जगह दिलवाई।
कचरा निस्तारण प्लांट की मंगलवार को उपायुक्त की गठित टीम ने जांच की। जांच में पाया गया कि कचरा निस्तारण प्लांट में पूजा वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी और जिम्मेदारी अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही है। शहर में स्वच्छता पर दम भरने वाला नगर परिषद प्रशासन कचरा निस्तारण प्लांट पर चुप्पी साध जाता है।
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मुख्यालय स्तर पर अगस्त 2023 में पूजा वेस्ट मैनेजमेंट को सिरसा जिले के कचरा निस्तारण का टेंडर दिया गया। उसमें सालों से बकरियांवाली प्लांट में पड़े कचरे के निस्तारण को लेकर उसे अनुबंध में विशेष क्लॉज डाला गया था। इसमें लिखा था कि दो साल में कचरा निस्तारण प्लांट में पड़े पुराने कचरे का निस्तारण करेगा।
इसके बाद एक माह तक कचरा निस्तारण की प्रक्रिया नहीं शुरू करने पर 12 सितंबर 2023 को ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। 14 दिनों तक कचरा निस्तारण प्लांट पर धरना चला और 14 हजार मीट्रिक टन कचरा प्लांट में नहीं डालने दिया गया। इस दौरान गांव की महिलाओं ने भी कचरा निस्तारण प्लांट पर आकर धरने का समर्थन दिया और बच्चों की सलामती मांगी। प्रशासन ने ग्रामीणों की मांगों को माना और जल्द से जल्द व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद प्लांट पर काम शुरू हुआ।
18 दिसंबर 2023 को दिल्ली से पर्यावरण विभाग की टीम गांव बकरियांवाली पहुंची। वहां पर आकर टीम ने मिट्टी के सैंपल लिए और जमीन के हालात का जायजा लिया। इसके बाद टीम चली गई। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि वे पर्यावरण विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे।
नवंबर 2024 तक काम ढिलाई से चला और ग्रामीणों ने उपायुक्त से गुहार लगाई। ग्रामीणों की गुहार पर तत्कालीन उपायुक्त आरके सिंह ने प्लांट के अंदर संवाद कार्यक्रम किया। इस दौरान नगर परिषद के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि 15 फीट ऊंची दीवार व पांच फीट की जाली लगाई जाएगी। इससे कचरा प्लांट से बाहर नहीं जाएगा। इस पर एक करोड़ 86 लाख रुपये का खर्च आएगा। अक्तूबर 2025 में यह दीवार बनकर तैयार हुई।
इसलिए वर्ष 2006 में बना था प्लांट
1. कचरा निस्तारण प्लांट में कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी।
2 चहारदीवारी के साथ साथ बड़े स्तर पर अंदर व बाहर पौधे लगाए जाएंगे।
3 नियमित रूप से कचरा निस्तारण होगा।
4 बदबू भरा माहौल नहीं होगा और फूड कोर्ट अंदर होगा।
5 फायर सेफ्टी सिस्टम लगा होगा।
6 कंपोस्ट खाद ग्रामीणों को सस्ती दरों पर आवंटित की जाएगी।
प्रदूषण बोर्ड की टीम निरंतर करती रही जांच
पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड की स्थानीय टीम लगातार कचरा निस्तारण प्लांट की जांच करती रही। हर तीसरे माह रिपोर्ट तैयार हुई और जुर्माने की कार्रवाई होती रही। प्लांट की प्रक्रिया देखने वाले इंजीनियर से लेकर सीएसआई विभाग के अधिकारी तक जल्द व्यवस्था सुधारने का दावा करते रहे। यही कारण रहा कि लगातार जुर्माना कार्रवाई नगर परिषद पर चलती रही।
यह जानना जरूरी
डंपिंग साइट : 13 एकड़
पूजा वेस्ट मैनेजमेंट एजेंसी को प्लांट के लिए जगह मिली थी : 6 एकड़
सिरसा शहर से प्रतिदिन निकलने वाला कचरा : 130 मीट्रिक टन
एजेंसी प्रतिदिन रानियां, सिरसा, ऐलनाबाद से उठाती है : 220 मीट्रिक टन
एजेंसी को प्रति टन भुगतान मिलता है : 2635 रुपये
प्लांट में पड़ा था पुराना कचरा - करीबन दो लाख मीट्रिक टन
इस प्रकार मॉनिटरिंग के दिए आदेश
उपायुक्त की गठित कमेटी ने नगर परिषद के अधिकारियों को आदेश दिए कि कचरा निस्तारण प्लांट में लगी प्रत्येक मशीन का अपना सब मीटर होना चाहिए। कौन सी मशीन प्रतिदिन कितना चली है। इसका डेटा रिकॉर्ड होना चाहिए। उसी आधार पर पता चल पाएगा कि प्लांट में मशीनें कितना काम कर रही हैं या बंद पड़ी हैं। संवाद

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