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Sirsa News: लक्ष्मण ने काटे शूर्पणखा के नाक-कान, रावण ने किया सीता का हरण
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:33 AM IST
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गांव पन्नीवाला मोटा की श्री कृष्ण गोशाला में चल रही श्री राम कथा
फोटो-37
संवाद न्यूज एजेंसी
ओढ़ां। गांव पन्नीवाला मोटा की श्री कृष्ण गोशाला में चल रही श्री राम कथा में कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधीच ने शनिवार को राम के अत्रि मुनि से मिलने, शूर्पणखा के नाक-कान काटे जाने व सीता हरण प्रसंग सुनाया।
कथावाचक ने सुनाया कि श्री राम, लक्ष्मण व सीता वनवास के दौरान अत्रि मुनि से भेंट करते हैं। जहां उनकी धर्मपत्नी सती अनुसूईया सीता को पतिवर्ता धर्म के बारे में बताती हैं। वह कहती हैं कि पति की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। फिर श्रीराम पंचवटी में आ जाते हैं। जहां लंकेश रावण की बहन शूर्पणखा श्री राम को देखकर उन पर मोहित होकर सुंदर स्त्री का वेश धारण कर उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती हैं। श्री राम उसे अपने विवाहित होने की बात कहकर इन्कार कर देते हैं।
इसके बाद वह लक्ष्मण के समक्ष भी विवाह का प्रस्ताव रखती है, लेकिन लक्ष्मण के भी इन्कार करने शूर्पणखा क्रोध में आकर सीता को मारने के लिए दौड़ी। जिस पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए। अपमानित होकर शूर्पणखा विलाप करती हुई अपने भाई रावण के पास पहुंचती है। रावण से इस अपमान का बदला लेने के लिए कहती है।
कथावाचक ने सुनाया कि फिर रावण ने षडयंत्र रचते हुए मारीच को सोने का मृग बनाकर श्री राम की कुटिया के पास भेज दिया। सीता ने जब स्वर्ण मृग को देखा तो वह उस पर मुग्ध हो गईं और श्री राम को उस मृग को पकड़कर लाने के लिए कहती हैं। जब श्री राम मृग के पीछे जाते हैं और देर तक नहीं लौटते हैं तो माता सीता लक्ष्मण को उनके पीछे भेजती हैं।
लक्ष्मण कुटिया के आगे अपने तीर से सुरक्षा रेखा खींचते हुए माता सीता को उससे बाहर न आने की बात कहते हुए श्री राम के पीछे चले जाते हैं। इसी दौरान रावण साधु का वेश धारण कर आया और छल से माता सीता का हरण कर आकाश मार्ग से लंका की ओर चला जाता है। कथावाचक ने सुनाया कि माता सीता को विलाप करते देख पक्षीराज जटायु ने रावण पर हमला बोल दिया। लेकिन रावण ने अपनी तलवार से जटायु के पर काट दिए।
श्री राम व लक्ष्मण माता सीता को ढूंढ़ते हुए आते हैं जहां रास्ते में घायल जटायु से मिलते हैं। जटायु ने श्री राम को बताया कि लंकापति रावण उनकी पत्नी सीता का हरण कर ले गया है। कथा के दौरान कथावाचक द्वारा गाए गए सुंदर भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ओढ़ां। गांव पन्नीवाला मोटा की श्री कृष्ण गोशाला में चल रही श्री राम कथा में कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधीच ने शनिवार को राम के अत्रि मुनि से मिलने, शूर्पणखा के नाक-कान काटे जाने व सीता हरण प्रसंग सुनाया।
कथावाचक ने सुनाया कि श्री राम, लक्ष्मण व सीता वनवास के दौरान अत्रि मुनि से भेंट करते हैं। जहां उनकी धर्मपत्नी सती अनुसूईया सीता को पतिवर्ता धर्म के बारे में बताती हैं। वह कहती हैं कि पति की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। फिर श्रीराम पंचवटी में आ जाते हैं। जहां लंकेश रावण की बहन शूर्पणखा श्री राम को देखकर उन पर मोहित होकर सुंदर स्त्री का वेश धारण कर उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती हैं। श्री राम उसे अपने विवाहित होने की बात कहकर इन्कार कर देते हैं।
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इसके बाद वह लक्ष्मण के समक्ष भी विवाह का प्रस्ताव रखती है, लेकिन लक्ष्मण के भी इन्कार करने शूर्पणखा क्रोध में आकर सीता को मारने के लिए दौड़ी। जिस पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए। अपमानित होकर शूर्पणखा विलाप करती हुई अपने भाई रावण के पास पहुंचती है। रावण से इस अपमान का बदला लेने के लिए कहती है।
कथावाचक ने सुनाया कि फिर रावण ने षडयंत्र रचते हुए मारीच को सोने का मृग बनाकर श्री राम की कुटिया के पास भेज दिया। सीता ने जब स्वर्ण मृग को देखा तो वह उस पर मुग्ध हो गईं और श्री राम को उस मृग को पकड़कर लाने के लिए कहती हैं। जब श्री राम मृग के पीछे जाते हैं और देर तक नहीं लौटते हैं तो माता सीता लक्ष्मण को उनके पीछे भेजती हैं।
लक्ष्मण कुटिया के आगे अपने तीर से सुरक्षा रेखा खींचते हुए माता सीता को उससे बाहर न आने की बात कहते हुए श्री राम के पीछे चले जाते हैं। इसी दौरान रावण साधु का वेश धारण कर आया और छल से माता सीता का हरण कर आकाश मार्ग से लंका की ओर चला जाता है। कथावाचक ने सुनाया कि माता सीता को विलाप करते देख पक्षीराज जटायु ने रावण पर हमला बोल दिया। लेकिन रावण ने अपनी तलवार से जटायु के पर काट दिए।
श्री राम व लक्ष्मण माता सीता को ढूंढ़ते हुए आते हैं जहां रास्ते में घायल जटायु से मिलते हैं। जटायु ने श्री राम को बताया कि लंकापति रावण उनकी पत्नी सीता का हरण कर ले गया है। कथा के दौरान कथावाचक द्वारा गाए गए सुंदर भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे।
