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Sirsa News: नथोर गांव का ऐतिहासिक कुआं बना जल संरक्षण का मॉडल
Sun, 02 Aug 2026 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:12 PM IST
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गांव नाथोर के कुंए पर उकेरा गया जलसंरक्षण के संदेश । संवाद
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नाबार्ड, ग्राम पंचायत और प्रशासन की पहल से विरासत को मिला नया जीवन
छतों का पानी पाइपलाइन से पहुंच रहा कुएं तक
फोटो-- 5 से 7
संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। रानियां तहसील के नथोर गांव में जल संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। यहां का प्राचीन कुआं अब आधुनिक वर्षा जल संचयन प्रणाली से भूजल स्तर सुधार रहा है। ग्राम पंचायत, नाबार्ड और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह मॉडल विकसित हुआ है।
जुलाई 2025 में नाबार्ड ने एक्सपर्ट संस्था के सहयोग से इस कुएं का जीर्णोद्धार करवाया। गांव के कई घरों की छतों से वर्षा जल पाइपलाइन के माध्यम से सीधे कुएं तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बारिश का पानी भूमिगत जल भंडार को समृद्ध कर रहा है। नथोर गांव को प्रदेश के पहले मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ग्राम सरपंच नीतू झोरड़ ने बताया कि योजना से कई घर जुड़े हैं। पिछले वर्ष कम बारिश के बावजूद वर्षा जल कुएं में पहुंचा। इससे भूजल रिचार्ज बढ़ा और गलियों में जलभराव कम हुआ। यह पहल जल संरक्षण की दिशा में नई पहचान दे रही है।
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समाजसेवी नरेश झोरड़ ने बताया कि कुएं के जीर्णोद्धार से युवा पीढ़ी ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ रही है। यह स्थल स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यह जल है तो कल है, भूजल है तो भविष्य है का संदेश देता है।
ऐतिहासिक महत्व और पुनरुद्धार
यह प्राचीन कुआं कभी आधा दर्जन गांवों की पेयजल जरूरतों को पूरा करता था। यह सामुदायिक सहयोग और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रहा है। वर्ष 1945 में इस कुएं का व्यापक जीर्णोद्धार हुआ था। वर्ष 2025 में नाबार्ड की पहल से इसे दोबारा पुनर्जीवित किया गया। अब यह जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के लिए तैयार है।
भविष्य के लिए जल संसाधन और संदेश
अटल भूजल योजना से जुड़े पारुल कुमार ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधन उपलब्ध कराना है। किसानों को कम अवधि वाली धान की किस्मों और डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे भूजल का अत्यधिक दोहन कम होगा।
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छतों का पानी पाइपलाइन से पहुंच रहा कुएं तक
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। रानियां तहसील के नथोर गांव में जल संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। यहां का प्राचीन कुआं अब आधुनिक वर्षा जल संचयन प्रणाली से भूजल स्तर सुधार रहा है। ग्राम पंचायत, नाबार्ड और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह मॉडल विकसित हुआ है।
जुलाई 2025 में नाबार्ड ने एक्सपर्ट संस्था के सहयोग से इस कुएं का जीर्णोद्धार करवाया। गांव के कई घरों की छतों से वर्षा जल पाइपलाइन के माध्यम से सीधे कुएं तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बारिश का पानी भूमिगत जल भंडार को समृद्ध कर रहा है। नथोर गांव को प्रदेश के पहले मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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ग्राम सरपंच नीतू झोरड़ ने बताया कि योजना से कई घर जुड़े हैं। पिछले वर्ष कम बारिश के बावजूद वर्षा जल कुएं में पहुंचा। इससे भूजल रिचार्ज बढ़ा और गलियों में जलभराव कम हुआ। यह पहल जल संरक्षण की दिशा में नई पहचान दे रही है।
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समाजसेवी नरेश झोरड़ ने बताया कि कुएं के जीर्णोद्धार से युवा पीढ़ी ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ रही है। यह स्थल स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यह जल है तो कल है, भूजल है तो भविष्य है का संदेश देता है।
ऐतिहासिक महत्व और पुनरुद्धार
यह प्राचीन कुआं कभी आधा दर्जन गांवों की पेयजल जरूरतों को पूरा करता था। यह सामुदायिक सहयोग और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रहा है। वर्ष 1945 में इस कुएं का व्यापक जीर्णोद्धार हुआ था। वर्ष 2025 में नाबार्ड की पहल से इसे दोबारा पुनर्जीवित किया गया। अब यह जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के लिए तैयार है।
भविष्य के लिए जल संसाधन और संदेश
अटल भूजल योजना से जुड़े पारुल कुमार ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधन उपलब्ध कराना है। किसानों को कम अवधि वाली धान की किस्मों और डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे भूजल का अत्यधिक दोहन कम होगा।