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Sirsa News: गोसेवा आयोग के कारण शहर में बेसहारा पशुओं का जमावड़ा बढ़ा

Sun, 12 Jul 2026 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 12 Jul 2026 11:49 PM IST
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problem of animals on road
सिरसा। रोडी बाजार में घूमते बेसहारा पशु। संवाद
बेसहारा पशु यातायात बाधित करने के साथ ही दुर्घटनाओं का कारण बन रहे
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फोटो - 20
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर में बेसहारा पशुओं का जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है। इससे लोग परेशान हैं। अधिकारी मजबूर नजर आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण गोसेवा आयोग से नगर परिषद को अपेक्षित पत्र का इंतजार है।
आयोग की ओर से निर्धारित दरों पर कोई भी ठेकेदार बेसहारा पशुओं को पकड़ने का काम करने को तैयार नहीं है। इससे समस्या और गंभीर हो गई है। शहर की सड़कों पर घूमते बेसहारा पशु यातायात बाधित कर रहे हैं और दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहे हैं। नगर परिषद के अधिकारी इसको लेकर चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। कारण यह कि पूर्व में गोसेवा आयोग ने पशुओं को पकड़ने संबंधी ठेके की प्रक्रिया अपने पास ले ली थी।
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बाद में उन्होंने इसे पुनः नगर निकायों को सौंपने की तैयारी कर ली लेकिन कोई पत्र जारी नहीं किया। सूत्रों के अनुसार, गोसेवा आयोग 800 रुपये में पशु पकड़वाना चाहता है जबकि ठेकेदार 1800 रुपये से कम में पशु नहीं पकड़ने की बात कहते हैं। हालांकि, इस सब प्रक्रिया पर तभी बातचीत हो सकती है जब आयोग से कोई आधिकारिक आदेश नगर परिषद को प्राप्त होंगे। तब तक इसी प्रकार सड़कों पर बेसहारा पशु नजर आएंगे।
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आमजन की परेशानी और अधिकारियों की मजबूरी
शहर निवासी बेसहारा पशुओं के कारण लगातार परेशान हैं। ये पशु अक्सर सड़कों पर झुंड में घूमते रहते हैं जिससे यातायात बाधित होता है। पैदल चलने वालों के लिए भी खतरा पैदा होता है। कई बार इन पशुओं के कारण गंभीर सड़क दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद से कई बार शिकायतें की हैं लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वे गोसेवा आयोग के निर्देशों के चलते वे पशु नहीं पकड़ सकते हैं। उनकी मजबूरी है कि जब तक आयोग से हरी झंडी नहीं मिलती, वे कोई ठोस कदम नहीं उठा सकते।
नगर परिषद को आयोग के पत्र का इंतजार
गोसेवा आयोग से अपेक्षित समाधान नगर परिषद अब गोसेवा आयोग से एक आधिकारिक पत्र का इंतजार कर रही है जिसमें संशोधित दरें या समस्या के समाधान के लिए कोई नई योजना शामिल हो। अधिकारियों को उम्मीद है कि आयोग इस गंभीर स्थिति पर ध्यान देगा और ऐसी व्यवहार्य दरें निर्धारित करेगा, जिन पर ठेकेदार काम करने को तैयार हों। इसके अलावा, आयोग से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि वह बेसहारा पशुओं के प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक समाधान सुझाए ताकि शहर को इस बढ़ती समस्या से स्थायी रूप से मुक्ति मिल सके।


कोट्स
गोसेवा आयोग ने स्वयं पशु पकड़ने से इन्कार कर दिया है लेकिन अब तक कोई आदेश नगर परिषदों को जारी नहीं किए गए हैं। इतना ही नहीं, आयोग ने 800 से 1200 रुपये के बीच प्रति पशु पकड़ने का खर्च बताया है जो मौजूदा हालात में संभव नहीं है। जब तक पूर्ण आदेश नहीं आते हैं तब तक प्रशासन कोई पशु नहीं पकड़ सकता है।
-जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद
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