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Sirsa News: राजपूत प्रतिनिधि सभा ने महाराणा प्रताप को दी श्रद्धांजलि
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 21 Jan 2026 12:05 AM IST
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सिरसा। महाराणा प्रताप की 429वीं पुण्यतिथि मनाते हुए समाज के लोग। संस्था।
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महाराण प्रताप के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प
फोटो - 6
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा । हिसार रोड स्थित महाराणा प्रताप चौक पर राजपूत प्रतिनिधि सभा की ओर से मंगलवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 429वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सभा के प्रधान रविंद्र सिंह चौहान ने की। इस अवसर पर भीम सिंह राठौड़, मास्टर राजकुमार चौहान, छगन सिंह राठौड़, भीम सिंह बिक्का, चानन सिंह खींची, कौशल सिंह पंवार, प्राचार्य शत्रुजीत सिंह, पुखराज सिंह चौहान, आनंद रावत और ओजस्वी सिसोदिया आदि उपस्थित थे।
सभा के मीडिया प्रभारी गोविल सिसोदिया ने बताया कि महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, बलिदान, अदम्य साहस और स्वाभिमान का प्रतीक रहा। उन्होंने युद्ध के मैदान में 81 किलोग्राम वजनी भाला, 72 किलोग्राम का कवच और 55 किलोग्राम की तलवार के साथ उतरकर दुश्मनों को परास्त किया। उनका हाथी रामप्रसाद हल्दीघाटी युद्ध में मुगलों के 13 हाथियों को अकेले ही मार गिराने में सक्षम था, लेकिन अकबर द्वारा बंदी बनाए जाने के बावजूद उसने 18 दिनों तक अन्न जल त्याग कर अपने स्वामी के प्रति निष्ठा दिखाई।
सिसोदिया ने कहा कि महाराणा प्रताप ने महलों का त्याग कर कठिन परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान को कभी नहीं खोया। उन्होंने देशभक्ति और शौर्य का ऐसा आदर्श स्थापित किया, जो आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने महाराणा प्रताप के जीवन और उनके अदम्य साहस को याद करते हुए उनके संघर्ष और त्याग को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा । हिसार रोड स्थित महाराणा प्रताप चौक पर राजपूत प्रतिनिधि सभा की ओर से मंगलवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 429वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सभा के प्रधान रविंद्र सिंह चौहान ने की। इस अवसर पर भीम सिंह राठौड़, मास्टर राजकुमार चौहान, छगन सिंह राठौड़, भीम सिंह बिक्का, चानन सिंह खींची, कौशल सिंह पंवार, प्राचार्य शत्रुजीत सिंह, पुखराज सिंह चौहान, आनंद रावत और ओजस्वी सिसोदिया आदि उपस्थित थे।
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सभा के मीडिया प्रभारी गोविल सिसोदिया ने बताया कि महाराणा प्रताप का जीवन त्याग, बलिदान, अदम्य साहस और स्वाभिमान का प्रतीक रहा। उन्होंने युद्ध के मैदान में 81 किलोग्राम वजनी भाला, 72 किलोग्राम का कवच और 55 किलोग्राम की तलवार के साथ उतरकर दुश्मनों को परास्त किया। उनका हाथी रामप्रसाद हल्दीघाटी युद्ध में मुगलों के 13 हाथियों को अकेले ही मार गिराने में सक्षम था, लेकिन अकबर द्वारा बंदी बनाए जाने के बावजूद उसने 18 दिनों तक अन्न जल त्याग कर अपने स्वामी के प्रति निष्ठा दिखाई।
सिसोदिया ने कहा कि महाराणा प्रताप ने महलों का त्याग कर कठिन परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान को कभी नहीं खोया। उन्होंने देशभक्ति और शौर्य का ऐसा आदर्श स्थापित किया, जो आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने महाराणा प्रताप के जीवन और उनके अदम्य साहस को याद करते हुए उनके संघर्ष और त्याग को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
