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Sirsa News: मनप्रीत कौर ने 80 महिलाओं को हुनर सिखा बनाया आत्मनिर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 06 Apr 2026 11:55 PM IST
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महिलाओं को मशीन से डिजिटल प्रिंटिंग सीखाती मनप्रीत कौर। स्वयं
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कालांवाली की मनप्रीत कौर डिजिटल प्रिंटिंग को बना रहीं कॅरिअर, डिजिटल मशीन से सूट, साड़ियां, कप, टीशर्ट्स व अन्य सामान कर रहीं प्रिंट
- सिरसा से लेकर आस-पास के क्षेत्रों से प्रिंट के लिए आते हैं कपड़े
फोटो- 34
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। कालांवाली क्षेत्र की रहने वाली मनप्रीत कौर आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर कुछ करना चाहती हैं। डिजिटल प्रिंटिंग मशीन के माध्यम से उन्होंने न केवल अपना व्यवसाय स्थापित किया है बल्कि आसपास के गांवों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया है।
मनप्रीत कौर पिछले एक साल से डिजिट प्रिंटिंग का कार्य कर रही हैं। उनके इस काम में सूट प्रिंट, साड़ी प्रिंट, टी-शर्ट प्रिंट, कप प्रिंटिंग और फोटो डिजाइनिंग जैसे कई काम शामिल हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ महिलाओं को इस तकनीक का प्रशिक्षण देना भी शुरू किया। आज उनके पास करीब 80 महिलाएं नियमित रूप से काम सीखने आती हैं।
अब तक उनके द्वारा प्रशिक्षित 25 महिलाएं अपना खुद का छोटा व्यवसाय शुरू कर चुकी हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। मनप्रीत का कहना है कि उनका सपना सिर्फ खुद का नाम बनाना नहीं था बल्कि उन महिलाओं को भी रोजगार देना था जो बेरोजगार थीं और कुछ करना चाहती थीं।
दुकानदार व बुटिक संचालक करवाते हैं प्रिंटिंग
मनप्रीत के इस व्यवसाय को बाजार में भी अच्छी पहचान मिल रही है। उनसे स्थानीय दुकानदार और बुटिक संचालक प्रिंटिंग का काम करवा रहे हैं। दुकानदार उनसे कप, टीशर्ट्स व अन्य सामान प्रिंट करवाते हैं। वहीं, बुटिक संचालक उनसे सूट, साड़ी, दुपट्टा व अन्य प्रिंट करवाते हैं। उन्हें हर महीने लगभग 90 से 100 ऑर्डर प्राप्त हो जाते हैं। इससे उनका काम लगातार बढ़ रहा है।
ऑनलाइन भी आते हैं ऑर्डर
ऑफलाइन के साथ-साथ मनप्रीत ने अपने काम को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक भी पहुंचाया है। इंस्टाग्राम के जरिए उन्हें ऑर्डर मिलते हैं। व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहक सीधे संपर्क करते हैं। मनप्रीत कौर ने अपनी एक इंस्टाग्राम आईडी बना रखी है। इसमें वह अपने द्वारा डिजाइन किए गए सूटों, साड़ियों व अन्य सामानों की पोस्ट डालती रहती हैं। इससे उन्हें काफी फायदा मिल रहा है। यहीं से उनके पास ऑर्डर आते हैं। वहीं, इंस्टा पर फोन नंबर डालने से उनके पास लोग कॉल भी करते हैं। यही कारण है कि उनके प्रोडक्ट्स अब सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं बल्कि हैदराबाद, अमृतसर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे विभिन्न स्थानों तक कूरियर के माध्यम से भेजे जा रहे हैं।
पति का रहता है पूरा सहयोग
मनप्रीत के इस सफर में उनके पति गुरप्रीत सिंह का भी पूरा सहयोग है। गुरप्रीत सिंह पिज्जा रेस्टोरेंट का काम करते हैं। परिवार को हर संभव समर्थन देते हैं। दोनों के दो बच्चे हैं। वे पढ़ाई कर रहे हैं। मनप्रीत कौर ने अब डिजिटल माध्यम से भी प्रशिक्षण देना शुरू किया है ताकि दूर-दराज की महिलाएं भी इस हुनर को सीख सकें। उनका मानना है कि आज के समय में तकनीक के साथ जुड़कर महिलाएं घर बैठे भी अच्छा व्यवसाय कर सकती हैं।
रोजगार देने के मकसद से शुरू किया काम
मनप्रीत कौर बताती हैं कि उन्हें सिलाई का काम पहले से ही आता था। ससुराल में आने के बाद परिवार में इतना व्यस्त हो गई कि कॅरिअर की ओर ध्यान ही नहीं गया। ऐसे में उन्होंने डिजिटल प्रिंटिंग का काम सीखा। इस दौरान उनके मन में आया कि बहुत सी ऐसी महिलाएं और भी होंगी जो बेरोजगार घर पर बैठी होंगी। इसी सोच को आगे ले जाते हुए उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया। अब महिलाएं प्रशिक्षण लेने के बाद घर पर ही अपना रोजगार खोल रही हैं।
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- सिरसा से लेकर आस-पास के क्षेत्रों से प्रिंट के लिए आते हैं कपड़े
फोटो- 34
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। कालांवाली क्षेत्र की रहने वाली मनप्रीत कौर आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर कुछ करना चाहती हैं। डिजिटल प्रिंटिंग मशीन के माध्यम से उन्होंने न केवल अपना व्यवसाय स्थापित किया है बल्कि आसपास के गांवों की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया है।
मनप्रीत कौर पिछले एक साल से डिजिट प्रिंटिंग का कार्य कर रही हैं। उनके इस काम में सूट प्रिंट, साड़ी प्रिंट, टी-शर्ट प्रिंट, कप प्रिंटिंग और फोटो डिजाइनिंग जैसे कई काम शामिल हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ महिलाओं को इस तकनीक का प्रशिक्षण देना भी शुरू किया। आज उनके पास करीब 80 महिलाएं नियमित रूप से काम सीखने आती हैं।
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अब तक उनके द्वारा प्रशिक्षित 25 महिलाएं अपना खुद का छोटा व्यवसाय शुरू कर चुकी हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। मनप्रीत का कहना है कि उनका सपना सिर्फ खुद का नाम बनाना नहीं था बल्कि उन महिलाओं को भी रोजगार देना था जो बेरोजगार थीं और कुछ करना चाहती थीं।
दुकानदार व बुटिक संचालक करवाते हैं प्रिंटिंग
मनप्रीत के इस व्यवसाय को बाजार में भी अच्छी पहचान मिल रही है। उनसे स्थानीय दुकानदार और बुटिक संचालक प्रिंटिंग का काम करवा रहे हैं। दुकानदार उनसे कप, टीशर्ट्स व अन्य सामान प्रिंट करवाते हैं। वहीं, बुटिक संचालक उनसे सूट, साड़ी, दुपट्टा व अन्य प्रिंट करवाते हैं। उन्हें हर महीने लगभग 90 से 100 ऑर्डर प्राप्त हो जाते हैं। इससे उनका काम लगातार बढ़ रहा है।
ऑनलाइन भी आते हैं ऑर्डर
ऑफलाइन के साथ-साथ मनप्रीत ने अपने काम को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक भी पहुंचाया है। इंस्टाग्राम के जरिए उन्हें ऑर्डर मिलते हैं। व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहक सीधे संपर्क करते हैं। मनप्रीत कौर ने अपनी एक इंस्टाग्राम आईडी बना रखी है। इसमें वह अपने द्वारा डिजाइन किए गए सूटों, साड़ियों व अन्य सामानों की पोस्ट डालती रहती हैं। इससे उन्हें काफी फायदा मिल रहा है। यहीं से उनके पास ऑर्डर आते हैं। वहीं, इंस्टा पर फोन नंबर डालने से उनके पास लोग कॉल भी करते हैं। यही कारण है कि उनके प्रोडक्ट्स अब सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं बल्कि हैदराबाद, अमृतसर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे विभिन्न स्थानों तक कूरियर के माध्यम से भेजे जा रहे हैं।
पति का रहता है पूरा सहयोग
मनप्रीत के इस सफर में उनके पति गुरप्रीत सिंह का भी पूरा सहयोग है। गुरप्रीत सिंह पिज्जा रेस्टोरेंट का काम करते हैं। परिवार को हर संभव समर्थन देते हैं। दोनों के दो बच्चे हैं। वे पढ़ाई कर रहे हैं। मनप्रीत कौर ने अब डिजिटल माध्यम से भी प्रशिक्षण देना शुरू किया है ताकि दूर-दराज की महिलाएं भी इस हुनर को सीख सकें। उनका मानना है कि आज के समय में तकनीक के साथ जुड़कर महिलाएं घर बैठे भी अच्छा व्यवसाय कर सकती हैं।
रोजगार देने के मकसद से शुरू किया काम
मनप्रीत कौर बताती हैं कि उन्हें सिलाई का काम पहले से ही आता था। ससुराल में आने के बाद परिवार में इतना व्यस्त हो गई कि कॅरिअर की ओर ध्यान ही नहीं गया। ऐसे में उन्होंने डिजिटल प्रिंटिंग का काम सीखा। इस दौरान उनके मन में आया कि बहुत सी ऐसी महिलाएं और भी होंगी जो बेरोजगार घर पर बैठी होंगी। इसी सोच को आगे ले जाते हुए उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया। अब महिलाएं प्रशिक्षण लेने के बाद घर पर ही अपना रोजगार खोल रही हैं।