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Sirsa News: स्कूल बंद कर गणना करने पहुंचे शिक्षक, स्कूल में छुट्टी का वीडियो वायरल
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 20 May 2026 12:44 AM IST
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सिरसा। प्राथमिक पाठशाला में पहुंची पार्षद चंचल रानी। पार्षद
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महिला शिक्षिका की डेप्यूटेशन हुई कैंसिल, वापस चतरगढ़पट्टी प्राइमरी स्कूल पहुंचीं
- शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी, उपायुक्त के संज्ञान में मामला आने के बाद उठाया कदम
पार्षद बोलीं-स्कूल में एक साल में घटे 90 से ज्यादा बच्चे, प्रवेश उत्सव जैसे अभियान को लेकर क्यों नहीं दिखाई जाती गंभीरता
फोटो-- -- -11 से 14
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चतरगढ़पट्टी के राजकीय प्राथमिक पाठशाला स्कूल में बच्चों की छुट्टी कर शिक्षकों का जनगणना करना विवादों में आ गया। मंगलवार को स्कूल में पहुंचे अभिभावकों का दूषित पानी और छुट्टी करने पर खरी-खोटी सुनाने का वीडियो वायरल हो गया। उपायुक्त के मामला संज्ञान में आने के साथ ही शिक्षा अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिए।
प्राथमिक पाठशाला से डेप्यूटेशन पर गई महिला टीचर की डेप्यूटेशन तुरंत प्रभाव से कैंसिल कर दी गई। उन्हें प्राथमिक पाठशाला में शिक्षण कार्य करने के आदेश जारी हुए हैं। वहीं, इस मामले की जांच शिक्षा विभाग कर रहा है। वहीं, पार्षद चंचल रानी ने स्लम एरिया में बने इस स्कूल के भविष्य को खतरे में होने की बात कही है।
पार्षद ने कहा कि स्कूल में पिछले वर्ष तक 180 बच्चे थे। अब 90 के आसपास बच्चे हैं। एक साल में 90 बच्चे कम होना बड़ा सवाल है। शिक्षा विभाग के प्रवेश उत्सव के बाद भी इस प्रकार स्कूल के बच्चों की संख्या घटना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। इस संबंध में उपायुक्त से लेकर एडीसी तक को पत्र दिया जाएगा। गरीबों के बच्चों को बेहतर सुविधा मिले। यह सरकार का ध्येय है।
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शिक्षा विभाग ने प्रगणक का कार्य करने वाले शिक्षकों को पहले ही पत्र के माध्यम से अवगत करवाया था कि वे स्कूलों को बंद नहीं करेंगे। स्कूलों की छुट्टी करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। जहां शिक्षक कम हैं तो वे सुबह व शाम के अनुसार अपनी गणना का काम करेंगे।
यह भी कहा गया था कि जहां पर एक विषय के दो शिक्षक हैं तो एक सुबह व शाम के समय में अपनी गणना करेगा। किसी भी कीमत पर बच्चों की शिक्षा को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
स्लम क्षेत्र में बच्चों के लिए अहम है प्राइमरी स्कूल
चतरगढ़पट्टी क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है। आसपास बड़ी-बड़ी कॉलोनियां बन गई हैं। उनके साथ यह प्राइमरी स्कूल हैं। स्कूल के आसपास का सारा क्षेत्र गरीब लोगों का है। वे सालों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। उनके छोटे बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए चतरगढ़पट्टी प्राइमरी स्कूल ही सहारा है। निजी स्कूलों के महंगे खर्च को वे व्यय नहीं कर सकते हैं। इसलिए प्रशासन का दायित्व बनता है कि विशेष रूप से इस क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर और बेहतर सुविधा देकर स्कूल को अपग्रेड किया जाएगा। पानी जैसी मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान हो।
दूषित पानी से शुरू हुआ विवाद
प्राइमरी स्कूल में सीमेंट की टंकी बनाई हुई है। उसकी सफाई नहीं होने के कारण यह विवाद शुरू हुआ। जब लोगों ने बताया कि स्कूल की गणना के चलते छुट्टी की हुई और बच्चों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। यह विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। स्कूल में छुट्टी के एक घंटे के अंदर ही शिक्षक प्रगणक का काम छोड़कर पढ़ाई करवाते हुए नजर आए। शिक्षकों ने स्कूल की छुट्टी नहीं होने का दावा किया।
घटती संख्या से बंद हो गया था राजकीय प्राथमिक पाठशाला कृषि फार्म खंड सिरसा दो
पार्षद चंचल रानी ने बताया कि स्कूलों को बंद करने का बड़े तरीके से सिस्टम चलता है। धीरे-धीरे स्कूल के बच्चों की संख्या घटाई जाती है। गरीब परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों की ओर भेजना शुरू किया जाता है। कारण यह कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक ध्यान नहीं देते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण राजकीय प्राथमिक पाठशाला कृषि फार्म खंड सिरसा दो है। यह कुछ साल पहले बच्चों की कमी के चलते बंद कर दिया गया। इसी प्रकार, अब चतरगढ़पट्टी की प्राथमिक पाठशाला को बंद करने की योजना है। एक साल में 90 बच्चों का कम होना बड़ा सवाल है। शिक्षकों की इसके प्रति जवाबदेही होनी चाहिए। उनकी योग्यता पर यह सवाल है।
कोट्स
स्कूल बंद कर प्रगणक का कार्य करने का मामला संज्ञान में आया है। शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, खैरपुर स्कूल में डेप्यूटेशन पर भेजी गई महिला शिक्षक को वापस स्कूल में भेज दिया गया है ताकि स्कूल का शिक्षण कार्य हो। एक-एक कर शिक्षक गणना का कार्य भी कर सके। वहीं, पेयजल समस्या का मुआयना कर समाधान करवाया जाएगा। इस संबंध में उपायुक्त को रिपोर्ट भेज दी गई है।
-डाॅ. विजय लक्ष्मी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
- शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी, उपायुक्त के संज्ञान में मामला आने के बाद उठाया कदम
पार्षद बोलीं-स्कूल में एक साल में घटे 90 से ज्यादा बच्चे, प्रवेश उत्सव जैसे अभियान को लेकर क्यों नहीं दिखाई जाती गंभीरता
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चतरगढ़पट्टी के राजकीय प्राथमिक पाठशाला स्कूल में बच्चों की छुट्टी कर शिक्षकों का जनगणना करना विवादों में आ गया। मंगलवार को स्कूल में पहुंचे अभिभावकों का दूषित पानी और छुट्टी करने पर खरी-खोटी सुनाने का वीडियो वायरल हो गया। उपायुक्त के मामला संज्ञान में आने के साथ ही शिक्षा अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिए।
प्राथमिक पाठशाला से डेप्यूटेशन पर गई महिला टीचर की डेप्यूटेशन तुरंत प्रभाव से कैंसिल कर दी गई। उन्हें प्राथमिक पाठशाला में शिक्षण कार्य करने के आदेश जारी हुए हैं। वहीं, इस मामले की जांच शिक्षा विभाग कर रहा है। वहीं, पार्षद चंचल रानी ने स्लम एरिया में बने इस स्कूल के भविष्य को खतरे में होने की बात कही है।
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पार्षद ने कहा कि स्कूल में पिछले वर्ष तक 180 बच्चे थे। अब 90 के आसपास बच्चे हैं। एक साल में 90 बच्चे कम होना बड़ा सवाल है। शिक्षा विभाग के प्रवेश उत्सव के बाद भी इस प्रकार स्कूल के बच्चों की संख्या घटना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। इस संबंध में उपायुक्त से लेकर एडीसी तक को पत्र दिया जाएगा। गरीबों के बच्चों को बेहतर सुविधा मिले। यह सरकार का ध्येय है।
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शिक्षा विभाग ने प्रगणक का कार्य करने वाले शिक्षकों को पहले ही पत्र के माध्यम से अवगत करवाया था कि वे स्कूलों को बंद नहीं करेंगे। स्कूलों की छुट्टी करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। जहां शिक्षक कम हैं तो वे सुबह व शाम के अनुसार अपनी गणना का काम करेंगे।
यह भी कहा गया था कि जहां पर एक विषय के दो शिक्षक हैं तो एक सुबह व शाम के समय में अपनी गणना करेगा। किसी भी कीमत पर बच्चों की शिक्षा को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
स्लम क्षेत्र में बच्चों के लिए अहम है प्राइमरी स्कूल
चतरगढ़पट्टी क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है। आसपास बड़ी-बड़ी कॉलोनियां बन गई हैं। उनके साथ यह प्राइमरी स्कूल हैं। स्कूल के आसपास का सारा क्षेत्र गरीब लोगों का है। वे सालों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। उनके छोटे बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए चतरगढ़पट्टी प्राइमरी स्कूल ही सहारा है। निजी स्कूलों के महंगे खर्च को वे व्यय नहीं कर सकते हैं। इसलिए प्रशासन का दायित्व बनता है कि विशेष रूप से इस क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर और बेहतर सुविधा देकर स्कूल को अपग्रेड किया जाएगा। पानी जैसी मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान हो।
दूषित पानी से शुरू हुआ विवाद
प्राइमरी स्कूल में सीमेंट की टंकी बनाई हुई है। उसकी सफाई नहीं होने के कारण यह विवाद शुरू हुआ। जब लोगों ने बताया कि स्कूल की गणना के चलते छुट्टी की हुई और बच्चों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। यह विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। स्कूल में छुट्टी के एक घंटे के अंदर ही शिक्षक प्रगणक का काम छोड़कर पढ़ाई करवाते हुए नजर आए। शिक्षकों ने स्कूल की छुट्टी नहीं होने का दावा किया।
घटती संख्या से बंद हो गया था राजकीय प्राथमिक पाठशाला कृषि फार्म खंड सिरसा दो
पार्षद चंचल रानी ने बताया कि स्कूलों को बंद करने का बड़े तरीके से सिस्टम चलता है। धीरे-धीरे स्कूल के बच्चों की संख्या घटाई जाती है। गरीब परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों की ओर भेजना शुरू किया जाता है। कारण यह कि सरकारी स्कूलों में शिक्षक ध्यान नहीं देते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण राजकीय प्राथमिक पाठशाला कृषि फार्म खंड सिरसा दो है। यह कुछ साल पहले बच्चों की कमी के चलते बंद कर दिया गया। इसी प्रकार, अब चतरगढ़पट्टी की प्राथमिक पाठशाला को बंद करने की योजना है। एक साल में 90 बच्चों का कम होना बड़ा सवाल है। शिक्षकों की इसके प्रति जवाबदेही होनी चाहिए। उनकी योग्यता पर यह सवाल है।
कोट्स
स्कूल बंद कर प्रगणक का कार्य करने का मामला संज्ञान में आया है। शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, खैरपुर स्कूल में डेप्यूटेशन पर भेजी गई महिला शिक्षक को वापस स्कूल में भेज दिया गया है ताकि स्कूल का शिक्षण कार्य हो। एक-एक कर शिक्षक गणना का कार्य भी कर सके। वहीं, पेयजल समस्या का मुआयना कर समाधान करवाया जाएगा। इस संबंध में उपायुक्त को रिपोर्ट भेज दी गई है।
-डाॅ. विजय लक्ष्मी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।