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Sirsa News: चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में नैक और रैंकिंग विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 16 Jan 2026 11:25 PM IST
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फोटो-8संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से नैक एवं अन्य रैंकिंग प्रणालियों पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार को टैगोर लेक्चर थिएटर में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनआईटी कुरुक्षेत्र के पूर्व डीन (अकादमिक) डॉ. एसके चक्रवर्ती रहे।
डॉ. चक्रवर्ती ने कहा कि नैक और अन्य रैंकिंग उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षण, शोध और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करती हैं तथा संस्थानों को उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर करती हैं। उन्होंने बताया कि नैक की स्थापना 16 सितंबर 1994 को हुई थी, जबकि एनआईआरएफ पिछले सात वर्षों से उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन कर रहा है। उन्होंने नेक रिफॉर्म्स-2024, बाइनरी एक्रिडिटेशन प्रणाली और दस्तावेज में तथ्यात्मक सटीकता पर विशेष जोर दिया। साथ ही बताया कि नैक के मानदंड सात से बढ़ाकर अब दस कर दिए गए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विजय कुमार ने की। उन्होंने कहा कि नैक और अन्य रैंकिंग केवल मूल्यांकन नहीं बल्कि आत्ममंथन, गुणवत्ता सुधार और नवाचार की प्रक्रिया हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में हुई नैक विजिट के बाद अगली विजिट वर्ष 2027 में प्रस्तावित है, जिसके लिए अभी से ठोस तैयारी आवश्यक है।
कार्यशाला में कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार, डीन अकादमिक प्रो. सुशील कुमार, यूएसजीएस के डीन प्रो. काशिफ, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजकुमार सलार सहित सभी विभागाध्यक्ष, निदेशक, नोडल अधिकारी और आईक्यूएसी सदस्य उपस्थित रहे। इस कार्यशाला का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता और मानकों को निरंतर बेहतर बनाना है।
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से नैक एवं अन्य रैंकिंग प्रणालियों पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार को टैगोर लेक्चर थिएटर में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनआईटी कुरुक्षेत्र के पूर्व डीन (अकादमिक) डॉ. एसके चक्रवर्ती रहे।
डॉ. चक्रवर्ती ने कहा कि नैक और अन्य रैंकिंग उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षण, शोध और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करती हैं तथा संस्थानों को उत्कृष्टता की दिशा में अग्रसर करती हैं। उन्होंने बताया कि नैक की स्थापना 16 सितंबर 1994 को हुई थी, जबकि एनआईआरएफ पिछले सात वर्षों से उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन कर रहा है। उन्होंने नेक रिफॉर्म्स-2024, बाइनरी एक्रिडिटेशन प्रणाली और दस्तावेज में तथ्यात्मक सटीकता पर विशेष जोर दिया। साथ ही बताया कि नैक के मानदंड सात से बढ़ाकर अब दस कर दिए गए हैं।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विजय कुमार ने की। उन्होंने कहा कि नैक और अन्य रैंकिंग केवल मूल्यांकन नहीं बल्कि आत्ममंथन, गुणवत्ता सुधार और नवाचार की प्रक्रिया हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में हुई नैक विजिट के बाद अगली विजिट वर्ष 2027 में प्रस्तावित है, जिसके लिए अभी से ठोस तैयारी आवश्यक है।
कार्यशाला में कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार, डीन अकादमिक प्रो. सुशील कुमार, यूएसजीएस के डीन प्रो. काशिफ, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजकुमार सलार सहित सभी विभागाध्यक्ष, निदेशक, नोडल अधिकारी और आईक्यूएसी सदस्य उपस्थित रहे। इस कार्यशाला का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता और मानकों को निरंतर बेहतर बनाना है।
