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Sonipat News: शहर में कोचिंग सेंटरों की होगी जांच, सुरक्षा मानक पर खरे न उतरने पर होगी सीलिंग
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 25 Jun 2026 02:49 AM IST
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फोटो: सोनीपत के सुभाष चौक पर एक लाइब्रेरी में जाने के लिए संकरा रास्ता व तंग सीढि़यां। संवाद
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सोनीपत। लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड के बाद नगर निगम प्रशासन अलर्ट हो गया है। अब निगम क्षेत्र में संचालित हो रहे कोचिंग सेंटरों व लाइब्रेरियों की जांच की जाएगी। सुरक्षा मानक पर खरे न उतरने पर नगर निगम की ओर से नोटिस देकर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
मेयर राजीव जैन व निगम आयुक्त हर्षित कुमार के आदेश पर टाउन प्लानिंग शाखा की ओर से कॉमर्शियल भवनों की सूची तैयार की जा रही है। क्योंकि एजुकेशन सिटी के नाम से विख्यात सोनीपत शहर के कोचिंग सेंटरों में रोजाना हजारों युवा पढ़ाई करने पहुंचते हैं।
मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से शहर के कोचिंग सेंटरों की पड़ताल की गई थी। शहर के सुभाष चौक, गीता भवन चौक, आदर्श नगर, मॉडल टाउन, सेक्टर-14, 15 में व्यवसायिक गतिविधियां भी चल रही हैं। इन व्यवसायिक गतिविधियों के अंदर सुविधाओं की जांच के नाम पर कुछ नहीं है।
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पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश कोचिंग सेंटर छोटे और संकरे भवनों में संचालित हो रहे हैं। कई संस्थानों में आने-जाने के लिए केवल एक ही सीढ़ी का प्रावधान है। किसी भी भवन में वैकल्पिक आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं मिली। आग लगने या भगदड़ जैसी स्थिति में ऐसे भवन छात्रों के लिए मौत का जाल साबित हो सकते हैं।
कई कोचिंग सेंटरों में दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए मात्र ढाई फीट चौड़ी सीढ़ियां बनी हुई हैं। ऐसे में आपात स्थिति के दौरान एक साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का बाहर निकलना लगभग असंभव हो सकता है। भवनों की सीमित चौड़ाई के कारण फायर सेफ्टी मानकों का पालन भी नहीं हो पा रहा है।
दिए हैं जांच के आदेश
लखनऊ में दो दिन पहले हुए हादसे से सबक लेते हुए मेयर राजीव जैन ने अधिकारियों को कोचिंग सेंटरों की जांच के आदेश दिए है। शहर के अंदर 100 से ज्यादा कोचिंग संस्थान हैं लेकिन उनका एरिया 500 वर्ग गज से कम होने के कारण जिला अग्निशमन विभाग की ओर से उन्हें फायर एनओसी नहीं दिया जा रहा। 500 वर्ग गज से अधिक की व्यवसायिक संपत्तियों को फायर एनओसी का प्रावधान है। दमकल विभाग का कहना है कि 10-12 कोचिंग संस्थान संचालकों ने फायर एनओसी लिया है।
एक साल पहले फायर एनओसी के लिए दिया था नोटिस
पिछले साल 100 से ज्यादा व्यवसायिक संपत्तियों के मालिकों को फायर एनओसी के लिए नोटिस दिया था। इसमें से 20 ने आवेदन किया था। दमकल विभाग की ओर से इस साल छह माह बीतने के बाद भी इन भवनों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मेयर राजीव जैन व निगम आयुक्त हर्षित कुमार के आदेश पर टाउन प्लानिंग शाखा की ओर से कॉमर्शियल भवनों की सूची तैयार की जा रही है। क्योंकि एजुकेशन सिटी के नाम से विख्यात सोनीपत शहर के कोचिंग सेंटरों में रोजाना हजारों युवा पढ़ाई करने पहुंचते हैं।
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मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से शहर के कोचिंग सेंटरों की पड़ताल की गई थी। शहर के सुभाष चौक, गीता भवन चौक, आदर्श नगर, मॉडल टाउन, सेक्टर-14, 15 में व्यवसायिक गतिविधियां भी चल रही हैं। इन व्यवसायिक गतिविधियों के अंदर सुविधाओं की जांच के नाम पर कुछ नहीं है।
पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश कोचिंग सेंटर छोटे और संकरे भवनों में संचालित हो रहे हैं। कई संस्थानों में आने-जाने के लिए केवल एक ही सीढ़ी का प्रावधान है। किसी भी भवन में वैकल्पिक आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं मिली। आग लगने या भगदड़ जैसी स्थिति में ऐसे भवन छात्रों के लिए मौत का जाल साबित हो सकते हैं।
कई कोचिंग सेंटरों में दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए मात्र ढाई फीट चौड़ी सीढ़ियां बनी हुई हैं। ऐसे में आपात स्थिति के दौरान एक साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का बाहर निकलना लगभग असंभव हो सकता है। भवनों की सीमित चौड़ाई के कारण फायर सेफ्टी मानकों का पालन भी नहीं हो पा रहा है।
दिए हैं जांच के आदेश
लखनऊ में दो दिन पहले हुए हादसे से सबक लेते हुए मेयर राजीव जैन ने अधिकारियों को कोचिंग सेंटरों की जांच के आदेश दिए है। शहर के अंदर 100 से ज्यादा कोचिंग संस्थान हैं लेकिन उनका एरिया 500 वर्ग गज से कम होने के कारण जिला अग्निशमन विभाग की ओर से उन्हें फायर एनओसी नहीं दिया जा रहा। 500 वर्ग गज से अधिक की व्यवसायिक संपत्तियों को फायर एनओसी का प्रावधान है। दमकल विभाग का कहना है कि 10-12 कोचिंग संस्थान संचालकों ने फायर एनओसी लिया है।
एक साल पहले फायर एनओसी के लिए दिया था नोटिस
पिछले साल 100 से ज्यादा व्यवसायिक संपत्तियों के मालिकों को फायर एनओसी के लिए नोटिस दिया था। इसमें से 20 ने आवेदन किया था। दमकल विभाग की ओर से इस साल छह माह बीतने के बाद भी इन भवनों को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।