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Sonipat News: नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह पर शिकंजा, झारखंड से एक और आरोपी गिरफ्तार
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सोनीपत। सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दूसरे सदस्य को पुलिस ने झारखंड से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान प्रवीण उर्फ राहुल झा के रूप में हुई है। इससे पहले पुलिस इस मामले में अमित रंजन को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह युवाओं का विश्वास जीतने के लिए सुनियोजित तरीके से ठगी करता था। आरोपी सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर लाखों रुपये लेते थे। इसके बाद शक से बचने के लिए पीड़ितों के खातों में उसी रकम में से हर महीने वेतन के नाम पर पैसे भेजते रहते थे।
दिल्ली रेलवे स्टेशन पर करवाई फर्जी ड्यूटी
पुलिस के अनुसार गांव लहराड़ा निवासी अनिल से अमित रंजन ने रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब छह लाख रुपये लिए। इसके बाद उसे दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के नाम पर बुलाया जाता रहा। करीब आठ माह तक आरोपी उसके खाते में नियमित रूप से वेतन भेजता रहा। इससे उसे विश्वास हो गया कि उसकी नियुक्ति हो चुकी है।
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ग्रुप-सी में पदोन्नति का झांसा देकर ऐंठे 11 लाख
जब पीड़ित का भरोसा पूरी तरह जीत लिया गया तो आरोपियों ने उसे ग्रुप-डी से ग्रुप-सी में पदोन्नति दिलाने का लालच दिया। इस बहाने उससे करीब 11 लाख रुपये और वसूल लिए। बाद में पता चला कि न उसकी कहीं नियुक्ति हुई थी और न ही कोई सरकारी प्रक्रिया अपनाई गई थी। पुलिस के अनुसार पूरा खेल फर्जी नियुक्ति पत्रों और वेतन के नाम पर रकम भेजकर रचा गया था। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रदेश और अन्य राज्यों में कितने युवाओं को इस तरीके से ठगी का शिकार बनाया गया।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह युवाओं का विश्वास जीतने के लिए सुनियोजित तरीके से ठगी करता था। आरोपी सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर लाखों रुपये लेते थे। इसके बाद शक से बचने के लिए पीड़ितों के खातों में उसी रकम में से हर महीने वेतन के नाम पर पैसे भेजते रहते थे।
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दिल्ली रेलवे स्टेशन पर करवाई फर्जी ड्यूटी
पुलिस के अनुसार गांव लहराड़ा निवासी अनिल से अमित रंजन ने रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब छह लाख रुपये लिए। इसके बाद उसे दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के नाम पर बुलाया जाता रहा। करीब आठ माह तक आरोपी उसके खाते में नियमित रूप से वेतन भेजता रहा। इससे उसे विश्वास हो गया कि उसकी नियुक्ति हो चुकी है।
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ग्रुप-सी में पदोन्नति का झांसा देकर ऐंठे 11 लाख
जब पीड़ित का भरोसा पूरी तरह जीत लिया गया तो आरोपियों ने उसे ग्रुप-डी से ग्रुप-सी में पदोन्नति दिलाने का लालच दिया। इस बहाने उससे करीब 11 लाख रुपये और वसूल लिए। बाद में पता चला कि न उसकी कहीं नियुक्ति हुई थी और न ही कोई सरकारी प्रक्रिया अपनाई गई थी। पुलिस के अनुसार पूरा खेल फर्जी नियुक्ति पत्रों और वेतन के नाम पर रकम भेजकर रचा गया था। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि प्रदेश और अन्य राज्यों में कितने युवाओं को इस तरीके से ठगी का शिकार बनाया गया।