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Sonipat News: बायोमीट्रिक के विरोध में हड़ताल, किसानों पर पड़ी दोहरी मार
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 06 Apr 2026 04:56 AM IST
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सोनीपत के गोहाना की अनाज मंडी में आढतियों की हड़ताल के कारण किसान परेशान। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। बायोमीट्रिक सत्यापन सहित सरकार की तरफ से लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ आढ़तियों का विरोध रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। गोहाना अनाज मंडी में हड़ताल का व्यापक असर देखने के लिए मिला। पूरे दिन खरीद नहीं हुई।
हड़ताल की वजह से कोई किसान भी गेहूं लेकर मंडी नहीं पहुंचा। शनिवार शाम को एक-दो किसान जरूर गेहूं लेकर आए थे लेकिन किसी भी आढ़ती ने उसे मंडी में उतारने से इन्कार कर दिया था।
आढ़तियों और किसानों ने कहा कि बायोमीट्रिक व्यवस्था ने अनाज बेचने की प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। विशेषकर उन किसानों के लिए परेशानी अधिक बढ़ गई है जिनकी जमीन महिला सदस्यों के नाम पर है।
ऐसे मामलों में महिला का बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है जबकि बुजुर्ग महिलाओं को हर बार मंडी तक लाना व्यावहारिक रूप से कठिन साबित हो रहा है।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम लाल वशिष्ठ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नए नियम जमीनी हकीकत से परे हैं। इससे किसान और आढ़ती दोनों ही परेशान हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के पास ट्रैक्टर तक नहीं हैं तो उन पर ट्रैक्टर नंबर प्लेट अनिवार्य करने जैसे प्रावधान थोप दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि बायोमीट्रिक सत्यापन की बाध्यता ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक सरकार इन नियमों में व्यावहारिक संशोधन नहीं करती तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
मुंडलाना निवासी किसान जसबीर ने बताया कि उनकी जमीन उनकी मां के नाम पर है। फसल का पंजीकरण भी उन्हीं के नाम पर हुआ है। अब बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए मां की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। उन्होंने कहा कि किसान के सामने यह दुविधा खड़ी हो गई है कि वह कटाई पर ध्यान दे या अपनी बुजुर्ग मां को मंडी लेकर जाएं।
महमूदपुर के किसान अमित ने बताया कि हड़ताल के चलते किसान अपनी उपज मंडी में लाने से कतरा रहे हैं। यदि कोई किसान फसल लेकर पहुंचता भी है तो उसे बिना बेचे ही लौटना पड़ता है। उन्होंने चिंता जताई कि गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार है और हर बीतता दिन किसानों के लिए आर्थिक नुकसान बढ़ा रहा है।
मंडी में खरीद बंद होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है। आढ़तियों का कहना है कि सरकार यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो हड़ताल खत्म कर दी जाएगी। फिलहाल बायोमीट्रिक नियमों को लेकर जारी गतिरोध ने कृषि विपणन व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
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गोहाना। बायोमीट्रिक सत्यापन सहित सरकार की तरफ से लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ आढ़तियों का विरोध रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। गोहाना अनाज मंडी में हड़ताल का व्यापक असर देखने के लिए मिला। पूरे दिन खरीद नहीं हुई।
हड़ताल की वजह से कोई किसान भी गेहूं लेकर मंडी नहीं पहुंचा। शनिवार शाम को एक-दो किसान जरूर गेहूं लेकर आए थे लेकिन किसी भी आढ़ती ने उसे मंडी में उतारने से इन्कार कर दिया था।
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आढ़तियों और किसानों ने कहा कि बायोमीट्रिक व्यवस्था ने अनाज बेचने की प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। विशेषकर उन किसानों के लिए परेशानी अधिक बढ़ गई है जिनकी जमीन महिला सदस्यों के नाम पर है।
ऐसे मामलों में महिला का बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है जबकि बुजुर्ग महिलाओं को हर बार मंडी तक लाना व्यावहारिक रूप से कठिन साबित हो रहा है।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम लाल वशिष्ठ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नए नियम जमीनी हकीकत से परे हैं। इससे किसान और आढ़ती दोनों ही परेशान हैं। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों के पास ट्रैक्टर तक नहीं हैं तो उन पर ट्रैक्टर नंबर प्लेट अनिवार्य करने जैसे प्रावधान थोप दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि बायोमीट्रिक सत्यापन की बाध्यता ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक सरकार इन नियमों में व्यावहारिक संशोधन नहीं करती तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
मुंडलाना निवासी किसान जसबीर ने बताया कि उनकी जमीन उनकी मां के नाम पर है। फसल का पंजीकरण भी उन्हीं के नाम पर हुआ है। अब बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए मां की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। उन्होंने कहा कि किसान के सामने यह दुविधा खड़ी हो गई है कि वह कटाई पर ध्यान दे या अपनी बुजुर्ग मां को मंडी लेकर जाएं।
महमूदपुर के किसान अमित ने बताया कि हड़ताल के चलते किसान अपनी उपज मंडी में लाने से कतरा रहे हैं। यदि कोई किसान फसल लेकर पहुंचता भी है तो उसे बिना बेचे ही लौटना पड़ता है। उन्होंने चिंता जताई कि गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार है और हर बीतता दिन किसानों के लिए आर्थिक नुकसान बढ़ा रहा है।
मंडी में खरीद बंद होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है। आढ़तियों का कहना है कि सरकार यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो हड़ताल खत्म कर दी जाएगी। फिलहाल बायोमीट्रिक नियमों को लेकर जारी गतिरोध ने कृषि विपणन व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

सोनीपत के गोहाना की अनाज मंडी में आढतियों की हड़ताल के कारण किसान परेशान। संवाद

सोनीपत के गोहाना की अनाज मंडी में आढतियों की हड़ताल के कारण किसान परेशान। संवाद