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प्राणीमात्र के सुख के लिए ईश्वर ने की संसार की रचना : स्वामी
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 08 Apr 2026 08:46 PM IST
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सोनीपत। आर्य समाज सेक्टर 15 में चल रहे आध्यात्मिक सत्संग का बुधवार को समापन हो गया। स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने कर्म के भेद बताए। उन्होंने कहा कि सांसारिक कामना से रहित होकर जो कर्म किया जाए उसे निष्काम कर्म कहते हैं।
स्वामी विवेकानंद ने कहा कि ईश्वर ने इस संसार की रचना प्राणीमात्र को सुख देने के लिए की है। वेदादि शास्त्र को पढ़कर ही व्यक्ति सत्य को जान सकता है अन्यथा वह स्वयं भ्रांति में स्वयं पड़ता है और अंधविश्वास को फैलाता है।
स्वामी ने बताया कि ईश्वर के आनंद को प्राप्त करके ही पूर्ण तृप्त हुआ जा सकता है। मन की एकाग्रता के उपायों को बताते हुए उन्होंने कहा कि जिस वस्तु में हमारी रुचि होती है उसी में एकाग्रता होती है। आध्यात्मिक शंकाओं का उन्होंने समाधान किया।
इस दौरान वैदिक विदुषी राज गुलाटी, दीनदयाल मदान, इंद्रा दहिया, राजेश धवन, राजबीर दहिया, महेंद्र शास्त्री भी मौजूद रहे।
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स्वामी विवेकानंद ने कहा कि ईश्वर ने इस संसार की रचना प्राणीमात्र को सुख देने के लिए की है। वेदादि शास्त्र को पढ़कर ही व्यक्ति सत्य को जान सकता है अन्यथा वह स्वयं भ्रांति में स्वयं पड़ता है और अंधविश्वास को फैलाता है।
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स्वामी ने बताया कि ईश्वर के आनंद को प्राप्त करके ही पूर्ण तृप्त हुआ जा सकता है। मन की एकाग्रता के उपायों को बताते हुए उन्होंने कहा कि जिस वस्तु में हमारी रुचि होती है उसी में एकाग्रता होती है। आध्यात्मिक शंकाओं का उन्होंने समाधान किया।
इस दौरान वैदिक विदुषी राज गुलाटी, दीनदयाल मदान, इंद्रा दहिया, राजेश धवन, राजबीर दहिया, महेंद्र शास्त्री भी मौजूद रहे।