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Sonipat News: नंगे पांव दौड़ने वाली गुमड़ की बेटी अब जापान में फहराएगी तिरंगा

Mon, 29 Jun 2026 06:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Mon, 29 Jun 2026 06:37 AM IST
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Gumad's barefoot runner will now wave the Tricolour in Japan.
सोनीपत। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इन पंक्तियों को सोनीपत के गांव गुमड़ की बेटी और अंतरराष्ट्रीय धाविका किरण पहल ने अपने संघर्ष, मेहनत और जुनून से फिर सच साबित कर दिखाया है।
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कभी आर्थिक तंगी के कारण नंगे पांव और स्कूल के जूतों में दौड़ने वाली किरण आज एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई कर देश का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं। उनकी यह यात्रा केवल खेल उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और अटूट आत्मविश्वास की प्रेरक मिसाल भी है।
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किरण को बचपन से ही दौड़ना बेहद पसंद था। गांव की दो लड़कियों को दौड़ते देखकर उनके मन में भी एथलीट बनने का सपना जन्मा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और खेलों के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में उन्होंने नंगे पांव और स्कूल के जूतों में ही सुबह-शाम अभ्यास करना शुरू कर दिया।
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उस समय उन्होंने स्पोर्ट्स शूज तक नहीं देखे थे, लेकिन सपनों की उड़ान को कभी थमने नहीं दिया।

दौड़ने के लिए घरवालों से भी लड़नी पड़ी लड़ाई
किरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल संसाधनों की कमी नहीं थी बल्कि सामाजिक सोच से भी जूझना पड़ा। गांव के लोगों के तानों और विरोध के चलते परिवार ने भी उन्हें दौड़ने से रोक दिया था। उन्होंने घरवालों से साफ कह दिया था कि अगर उन्हें दौड़ने की अनुमति नहीं मिली तो वह पढ़ाई भी नहीं करेंगी। उनकी जिद और जुनून के आगे आखिरकार परिवार को झुकना पड़ा और पिता ने बेटी के सपनों को पंख देने का निर्णय लिया। किरण के पिता ने समाज की परवाह किए बिना बेटी का साथ दिया। गांव वालों के तानों का जवाब देते हुए वह कहते थे मैं इसे बेटी नहीं, अपना बेटा मानता हूं। बेहतर प्रशिक्षण के लिए जब किरण ने बाहर जाने की इच्छा जताई तो आर्थिक तंगी के कारण शुरुआत में पिता ने मना कर दिया लेकिन बाद में उन्होंने हर मुश्किल उठाकर बेटी को रोहतक भेजा।

पिता के निधन के बाद भी नहीं टूटा हौसला
वर्ष 2022 में पिता के निधन ने किरण को गहरा आघात पहुंचाया। उनके सिर से सबसे मजबूत सहारे का साया उठ गया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पिता के सपनों और विश्वास को अपनी ताकत बनाकर वह लगातार आगे बढ़ती रहीं। 65वीं राष्ट्रीय अंतरराज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए किरण पहल ने एशियन गेम्स का क्वालीफिकेशन हासिल कर लिया है। अब वह आगामी एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी जो जापान के नागोया शहर में आयोजित होंगे।


भाई बोले- किरण ने बढ़ाया परिवार और गांव का मान
किरण के भाई रविंद्र पहल ने कहा कि उनकी बहन ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। उसने पूरे गांव और जिले का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उन्होंने कहा कि किरण की सफलता गांव की अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और यह संदेश देगी कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
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