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Sonipat News: मिशन एडमिशन...एनसीईआरटी से चार गुना महंगा निजी प्रकाशकों की किताबों का सेट

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 05:58 AM IST
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Mission Admission... Set of books from private publishers is four times more expensive than NCERT
फोटो : सोनीपत के मॉडल टाउन में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने पहुंचे अ​भिभावक। संवाद
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सोनीपत। अगले सप्ताह से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। निजी स्कूल प्रबंधन की ओर से निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बेचकर अभिभावकों की जेब काटी जा रही है। कक्षा तीसरी की निजी प्रकाशकों की सात किताबों का सेट 2300 रुपये का है तो एनसीईआरटी का यही सेट 560 रुपये में मिल रहा है।
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हर अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी तालीम देना चाहता है। विभाग के नियमानुसार सभी निजी व सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाना अनिवार्य है लेकिन कई निजी स्कूल संचालक एनसीईआरटी की किताबों के साथ निजी प्रकाशकों की किताबें भी लगवा रहे हैं।
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इनकी बिक्री व कमीशन के लालच में खासकर स्कूल संचालकों ने अलग-अलग दुकानों का चयन भी किया है। वहीं, पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष प्राथमिक कक्षाओं की किताबों के रेट में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में अभिभावकों की जेब कटने लगी है।
कुछ निजी स्कूलों में अलग-अलग प्रकाशकों की किताबें लगती हैं इसलिए उन प्रकाशकों की किताबों के रेट अलग तय किए जाते हैं। स्कूलों के आदेश के अनुसार अभिभावकों को भी तय दुकानों से ही निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ये किताबें एनसीईआरटी की अपेक्षा दोगुने से तीन गुना महंगी हैं।
पहली से आठवीं तक की एनसीईआरटी की एक किताब का मूल्य अगर 80 रुपये है तो वही किताब निजी प्रकाशक 150 से 500 रुपये तक दे रहे हैं। हालांकि, अपनी जेब ढीली करने के बावजूद अभिभावक कुछ भी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है।
यहां तक कि उन्होंने अपनी फोटो और पहचान भी बताने से इन्कार करते हुए केवल इतना कहा कि जेब तो ढीली हो रही है लेकिन क्या करें मजबूरी है। उन्होंने कहा कि यदि उनका नाम और फोटो कहीं आ गया तो संभव है कि स्कूल में उनके बच्चों को परेशान किया जाए।
नियम लागू, पर शिकायत व कार्रवाई कौन करे?
छात्र-अभिभावक संघ के प्रधान विमल किशोर ने बताया कि सरकार व न्यायालय ने बच्चों को शिक्षित करने के लिए नियम बनाएं हैं। उनकी मांग है कि यदि कोई निजी स्कूल अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें थोपता है या किसी एक दुकान से खरीदने के लिए बाध्य करता है तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। जांच में आरोप सही पाए जाने पर स्कूल पर जुर्माना लगाया जाए। बार-बार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता को रद्द की जाए। विमल किशोर ने कहा कि प्रशासन को महंगी किताबों पर संज्ञान लेते हुए जब निजी स्कूलों में संचालित दुकानों को बंद करवाया तो अब बाहर दुकानदारों से सेटिंग कर ली गई है। ऐसे में अभिभावकों को एकजुट होकर प्रशासन व जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत देनी चाहिए लेकिन अभिभावक भी अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए चुप रह जाते हैं।
सरकारी और निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाना अनिवार्य है। स्कूलों की ओर से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बेचने की कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी। विभाग की ओर से टीमों का गठन करके सोमवार से जांच अभियान भी शुरू कराया जाएगा। -नवीन गुलिया, जिला शिक्षा अधिकारी

फोटो : सोनीपत के मॉडल टाउन में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने पहुंचे अभिभावक। संवाद

फोटो : सोनीपत के मॉडल टाउन में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने पहुंचे अभिभावक। संवाद

फोटो : सोनीपत के मॉडल टाउन में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने पहुंचे अभिभावक। संवाद

फोटो : सोनीपत के मॉडल टाउन में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने पहुंचे अभिभावक। संवाद

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