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Sonipat News: महाराष्ट्र से फलाहार सीखने नरवाना पहुंचीं दो युवतियां, बीके अश्वनी दीवान से ले रहीं प्रशिक्षण
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फोटो 2 नरवाना। फलाहार व मेडिटेशन की जानकारी देते हुए बीके अश्वनी दीवान। स्रोत बीके अश्विनी।
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नरवाना। बदलती जीवनशैली और खानपान को बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण बताते हुए बीके अश्वनी दीवान लोगों को फलाहार, मेडिटेशन और काउंसलिंग के जरिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। उनके अभियान से प्रभावित होकर महाराष्ट्र के अकोला जिले की दो युवतियां चंचल मिश्रा और सविता बहन फलाहार की विधि सीखने नरवाना पहुंची हैं।
हेड पोस्ट ऑफिस के नजदीक नन्हूमल कॉम्प्लेक्स स्थित गॉडली फ्रूट क्लिनिक में अकोला निवासी कुमारी चंचल मिश्रा और सविता बहन प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से जूम मीटिंग, स्वास्थ्य शिविरों, कक्षाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से बीके अश्वनी दीवान से जुड़ी हैं। जीवनशैली में बदलाव से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में लाभ महसूस करने के बाद उन्होंने फलाहार की विधि को विस्तार से सीखने के लिए नरवाना आने का निर्णय लिया।
बीके अश्वनी दीवान ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से खानपान और जीवनशैली में बदलाव, फलाहार, मेडिटेशन और काउंसलिंग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके अनुसार, कई लोगों ने इस पद्धति को अपनाकर अपने स्वास्थ्य में सुधार महसूस किया है। कुछ माह पहले गॉडली फ्रूट क्लिनिक और ब्रह्माकुमारीज संस्था के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय निशुल्क फलाहार शिविर भी आयोजित किया गया था।
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लोगों ने साझा किए अनुभव
कान्हा खेड़ा निवासी बीके विकास नैन ने टाइप-1 डायबिटीज में लाभ और दवाओं की मात्रा कम होने का अनुभव बताया। कुमारी नूपुर ने मस्कुलर डिस्ट्रोफी के दौरान जीवनशैली परिवर्तन से शारीरिक सक्रियता और आत्मविश्वास बढ़ने की बात कही। पूर्व एचएसएससी सदस्य लक्ष्मण मिर्धा ने वजन, सांस और दर्द संबंधी समस्याओं में सुधार बताया। राजू सेतिया, संजीव गोयल, जयपाल, राकेश मित्तल, मेहरचंद पुजारी, महाराष्ट्र की जयश्री और पवनजीत बनवाला ने भी अपने अनुभव साझा किए। बीके अश्वनी दीवान ने स्पष्ट किया कि किसी बीमारी की दवा या इलाज बंद करने का निर्णय चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए।
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हेड पोस्ट ऑफिस के नजदीक नन्हूमल कॉम्प्लेक्स स्थित गॉडली फ्रूट क्लिनिक में अकोला निवासी कुमारी चंचल मिश्रा और सविता बहन प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से जूम मीटिंग, स्वास्थ्य शिविरों, कक्षाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से बीके अश्वनी दीवान से जुड़ी हैं। जीवनशैली में बदलाव से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में लाभ महसूस करने के बाद उन्होंने फलाहार की विधि को विस्तार से सीखने के लिए नरवाना आने का निर्णय लिया।
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बीके अश्वनी दीवान ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से खानपान और जीवनशैली में बदलाव, फलाहार, मेडिटेशन और काउंसलिंग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके अनुसार, कई लोगों ने इस पद्धति को अपनाकर अपने स्वास्थ्य में सुधार महसूस किया है। कुछ माह पहले गॉडली फ्रूट क्लिनिक और ब्रह्माकुमारीज संस्था के संयुक्त तत्वावधान में पांच दिवसीय निशुल्क फलाहार शिविर भी आयोजित किया गया था।
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लोगों ने साझा किए अनुभव
कान्हा खेड़ा निवासी बीके विकास नैन ने टाइप-1 डायबिटीज में लाभ और दवाओं की मात्रा कम होने का अनुभव बताया। कुमारी नूपुर ने मस्कुलर डिस्ट्रोफी के दौरान जीवनशैली परिवर्तन से शारीरिक सक्रियता और आत्मविश्वास बढ़ने की बात कही। पूर्व एचएसएससी सदस्य लक्ष्मण मिर्धा ने वजन, सांस और दर्द संबंधी समस्याओं में सुधार बताया। राजू सेतिया, संजीव गोयल, जयपाल, राकेश मित्तल, मेहरचंद पुजारी, महाराष्ट्र की जयश्री और पवनजीत बनवाला ने भी अपने अनुभव साझा किए। बीके अश्वनी दीवान ने स्पष्ट किया कि किसी बीमारी की दवा या इलाज बंद करने का निर्णय चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए।