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Sonipat News: डिजिटल मनोवैज्ञानिक विश्लेषण पर हुई कार्यशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:14 AM IST
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फोटो : सोनीपत के हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई में विद्यार्थियों को जानकारी देते मुख्य विशेषज
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सोनीपत। हरियाणा खेल विश्वविद्यालय राई में वीरवार को “मनोवैज्ञानिक उपकरणों और व्यावहारिक उपयोग” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक मनोवैज्ञानिक तकनीकों और डिजिटल विश्लेषण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
मुख्य विशेषज्ञ सौरभ शर्मा ने प्रतिभागियों को विभिन्न मनोवैज्ञानिक उपकरणों जैसे न्यूरोफीडबैक, बायोफीडबैक तथा इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) के बारे में जानकारी दी। इनका व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया। विद्यार्थियों को इन उपकरणों का हैंड्स-ऑन अनुभव प्राप्त करने का अवसर भी मिला। उन्होंने अल्फा, बीटा और थीटा वेव्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन मस्तिष्क तरंगों का परीक्षण कैसे किया जाता है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में इनका किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।
डीन (स्पोर्ट्स साइंस) डॉ. विवेक कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए डिजाइन की जाती हैं। उनके छात्र जीवन के दौरान ऐसे आधुनिक उपकरणों को सीखने के अवसर बहुत सीमित थे। वरिष्ठ खेल सलाहकार प्रो. राजेंद्र प्रसाद गर्ग ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मनोवैज्ञानिक कारकों के डिजिटल आधारित विश्लेषण के महत्व को समझाना था जिससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सके। इस दौरान डीन (फिजिकल एजुकेशन एवं स्पोर्ट्स) प्रो. योगेश चंदर, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी डिप्लोमा इंचार्ज डॉ. अनु ग्रेवाल भी मौजूद रहे।
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मुख्य विशेषज्ञ सौरभ शर्मा ने प्रतिभागियों को विभिन्न मनोवैज्ञानिक उपकरणों जैसे न्यूरोफीडबैक, बायोफीडबैक तथा इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) के बारे में जानकारी दी। इनका व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया। विद्यार्थियों को इन उपकरणों का हैंड्स-ऑन अनुभव प्राप्त करने का अवसर भी मिला। उन्होंने अल्फा, बीटा और थीटा वेव्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन मस्तिष्क तरंगों का परीक्षण कैसे किया जाता है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में इनका किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।
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डीन (स्पोर्ट्स साइंस) डॉ. विवेक कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए डिजाइन की जाती हैं। उनके छात्र जीवन के दौरान ऐसे आधुनिक उपकरणों को सीखने के अवसर बहुत सीमित थे। वरिष्ठ खेल सलाहकार प्रो. राजेंद्र प्रसाद गर्ग ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मनोवैज्ञानिक कारकों के डिजिटल आधारित विश्लेषण के महत्व को समझाना था जिससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सके। इस दौरान डीन (फिजिकल एजुकेशन एवं स्पोर्ट्स) प्रो. योगेश चंदर, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी डिप्लोमा इंचार्ज डॉ. अनु ग्रेवाल भी मौजूद रहे।