सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   478,000 People Awaiting ABHA IDs

Yamuna Nagar News: आभा आईडी का 4.78 लाख लोगों को इंतजार

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 30 Mar 2026 01:32 AM IST
विज्ञापन
478,000 People Awaiting ABHA IDs
जिला नागरिक अस्पताल। आर्काइव
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
Trending Videos

यमुनानगर। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में आभा आईडी (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) अभियान ने अच्छी रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ना बाकी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले की कुल आबादी 13,85,375 है। इनमें से अब तक 9,06,742 लोगों की आभा आईडी बनाई जा चुकी है।
अभी भी 4,78,633 लोग अभी भी इस डिजिटल हेल्थ सिस्टम से बाहर हैं, जिससे विभाग के सामने लक्ष्य पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि आभा आईडी बनने से मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। टीबी जांच, अल्ट्रासाउंड और अन्य उपचार के दौरान डॉक्टर केवल आईडी नंबर से मरीज की पूरी हिस्ट्री देख सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

इससे इलाज में तेजी आएगी और मरीजों को बार-बार कागजी रिकॉर्ड लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, अभी भी करीब साढ़े चार लाख लोगों का इस सिस्टम से बाहर होना चिंता का विषय है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और तकनीकी दिक्कतें इसकी बड़ी वजह मानी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि आने वाले समय में अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि जिले का हर नागरिक आभा आईडी से जुड़ सके।
बाक्स
आभा आईडी के फायदे

किसी भी जांच या इलाज में डॉक्टर को तुरंत मरीज की पिछली मेडिकल जानकारी मिल जाएगी। मरीज को बार-बार रिपोर्ट लेकर जाने की जरूरत नहीं। डॉक्टर मरीज की पुरानी बीमारियों, एलर्जी और दवाइयों का रिकॉर्ड देखकर सही दवा और उपचार दे सकते हैं। इससे गलत इलाज की संभावना बहुत कम हो जाती है।
बाक्स

डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड के लाभ
पूरे भारत में स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल होने से मरीज को किसी भी अस्पताल या राज्य में इलाज के लिए आसानी होती है। स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन भी सरकारी और निजी अस्पतालों में बेहतर और व्यवस्थित हो जाता है। आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए आभा आईडी होना जरूरी है। कैशलेस इलाज और अस्पताल रेफरल सिस्टम में भी यह आईडी काम आती है।

वर्जन



आभा आईडी बनवाना बहुत जरूरी है। इसके बाद मरीज को अपने पुराने मेडिकल रिकॉर्ड लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी। डॉ. वागीश गुटेन, नोडल अधिकारी, आयुष्मान।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed