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Yamuna Nagar News: जंगल में फिर भड़की आग, 20 एकड़ वन संपदा जली
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 27 Apr 2026 01:08 AM IST
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कलेसर जंगल में लगी आग व उठता धुआं। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। कलेसर जंगल में एक बार भी आग लग गई। आग लगने से करीब 20 एकड़ वन संपदा जल गई। इस घटना ने वन एवं वन्य प्राणी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जंगलों की सुरक्षा के लिए तैनात फायर वाचर और विभागीय कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आते। तेज हवा के बावजूद निगरानी में लापरवाही बरती जा रही है, जिसके कारण आग तेजी से फैल जाती है। इस घटना से जंगल में मौजूद पेड़-पौधों, घास-फूस और जैव विविधता को भारी नुकसान हुआ है।
जमीन पर रहने वाले छोटे जीव-जंतु जैसे सांप, बिच्छू, छिपकली, खरगोश, तीतर और बटेर के आशियाने पूरी तरह नष्ट हो गए। इनके घोंसले, अंडे और बच्चे भी आग की चपेट में आकर खत्म हो गए, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका है। कलेसर क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है।
इससे पहले चिक्कन, मोहदीनपुर और आसपास के कई इलाकों में भी आग लगने से बड़े क्षेत्र में जंगल जल चुका है। ताजेवाला बैरियर के सामने हाल ही में लगी आग में 10 से 12 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ था। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अति संवेदनशील कलेसर सेंचुरी क्षेत्र की जिम्मेदारी स्थाई रूप से किसी अधिकारी को नहीं सौंपी गई है। वर्तमान में इसकी जिम्मेदारी लगभग 100 किलोमीटर दूर करनाल में तैनात एक इंस्पेक्टर को अस्थाई तौर पर दी गई है।
कर्मचारी रिपोर्ट तैयार कर रहे : राजवीर
इंस्पेक्टर राजवीर ने बताया कि उनकी मूल ड्यूटी करनाल में है और फिलहाल उन्हें अस्थाई रूप से कलेसर क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। जंगल में लगी आग का आकलन करने के लिए कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया है। कितने क्षेत्र में नुकसान हुआ है, इसकी रिपोर्ट जल्द तैयार कर ली जाएगी।
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प्रतापनगर। कलेसर जंगल में एक बार भी आग लग गई। आग लगने से करीब 20 एकड़ वन संपदा जल गई। इस घटना ने वन एवं वन्य प्राणी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जंगलों की सुरक्षा के लिए तैनात फायर वाचर और विभागीय कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आते। तेज हवा के बावजूद निगरानी में लापरवाही बरती जा रही है, जिसके कारण आग तेजी से फैल जाती है। इस घटना से जंगल में मौजूद पेड़-पौधों, घास-फूस और जैव विविधता को भारी नुकसान हुआ है।
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जमीन पर रहने वाले छोटे जीव-जंतु जैसे सांप, बिच्छू, छिपकली, खरगोश, तीतर और बटेर के आशियाने पूरी तरह नष्ट हो गए। इनके घोंसले, अंडे और बच्चे भी आग की चपेट में आकर खत्म हो गए, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका है। कलेसर क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है।
इससे पहले चिक्कन, मोहदीनपुर और आसपास के कई इलाकों में भी आग लगने से बड़े क्षेत्र में जंगल जल चुका है। ताजेवाला बैरियर के सामने हाल ही में लगी आग में 10 से 12 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ था। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अति संवेदनशील कलेसर सेंचुरी क्षेत्र की जिम्मेदारी स्थाई रूप से किसी अधिकारी को नहीं सौंपी गई है। वर्तमान में इसकी जिम्मेदारी लगभग 100 किलोमीटर दूर करनाल में तैनात एक इंस्पेक्टर को अस्थाई तौर पर दी गई है।
कर्मचारी रिपोर्ट तैयार कर रहे : राजवीर
इंस्पेक्टर राजवीर ने बताया कि उनकी मूल ड्यूटी करनाल में है और फिलहाल उन्हें अस्थाई रूप से कलेसर क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। जंगल में लगी आग का आकलन करने के लिए कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया है। कितने क्षेत्र में नुकसान हुआ है, इसकी रिपोर्ट जल्द तैयार कर ली जाएगी।

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