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Yamuna Nagar News: कोच के बिना कैसे निखरेंगे भाला फेंक के खिलाड़ी
Fri, 07 Aug 2026 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:37 AM IST
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जिला खेल अधिकारी कार्यालय। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। सरकार की ओर से हर वर्ष सात अगस्त को राष्ट्रीय जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) दिवस मनाया जाता है। परंतु जिले में खेल विभाग के लिए पास करीब चार वर्ष से इसका कोच ही नहीं है। वर्ष 2022 से यह पद रिक्त पड़ा है और इसके अभाव में भाला फेंक खिलाड़ियों को दिक्कत हो रही है।
इसका सीधा असर जिले के उभरते खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ रहा है। जिले में लड़कों और लड़की वर्ग को मिलाकर भाला फेंक के करीब 70 खिलाड़ी नियमित अभ्यास कर रहे हैं। हालांकि उन्हें विभाग की ओर से विशेषज्ञ कोचिंग उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में खिलाड़ियों को खेल नर्सरियों के भरोसे अभ्यास करना पड़ रहा है।
कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बेहतर तकनीक सीखने के लिए अंबाला, करनाल और अन्य शहरों में निजी स्तर पर प्रशिक्षण लेने को मजबूर हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
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खिलाड़ियों का कहना है कि भाला फेंक तकनीकी खेल है, जिसमें सही पकड़, रन-अप, शरीर का संतुलन और थ्रो की तकनीक सिखाने के लिए अनुभवी कोच की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ मार्गदर्शन के अभाव में कई खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। यदि खेल विभाग में जल्द एथलेटिक्स कोच की नियुक्ति की जाए, तो जिले के खिलाड़ी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पदक व देश में भाला फेंक को नई पहचान मिलने के बाद युवाओं का इस खेल की ओर रुझान बढ़ा है। ऐसे में खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना समय की जरूरत है, ताकि जिले से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकें।
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जगाधरी। सरकार की ओर से हर वर्ष सात अगस्त को राष्ट्रीय जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) दिवस मनाया जाता है। परंतु जिले में खेल विभाग के लिए पास करीब चार वर्ष से इसका कोच ही नहीं है। वर्ष 2022 से यह पद रिक्त पड़ा है और इसके अभाव में भाला फेंक खिलाड़ियों को दिक्कत हो रही है।
इसका सीधा असर जिले के उभरते खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ रहा है। जिले में लड़कों और लड़की वर्ग को मिलाकर भाला फेंक के करीब 70 खिलाड़ी नियमित अभ्यास कर रहे हैं। हालांकि उन्हें विभाग की ओर से विशेषज्ञ कोचिंग उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में खिलाड़ियों को खेल नर्सरियों के भरोसे अभ्यास करना पड़ रहा है।
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कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बेहतर तकनीक सीखने के लिए अंबाला, करनाल और अन्य शहरों में निजी स्तर पर प्रशिक्षण लेने को मजबूर हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
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खिलाड़ियों का कहना है कि भाला फेंक तकनीकी खेल है, जिसमें सही पकड़, रन-अप, शरीर का संतुलन और थ्रो की तकनीक सिखाने के लिए अनुभवी कोच की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ मार्गदर्शन के अभाव में कई खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। यदि खेल विभाग में जल्द एथलेटिक्स कोच की नियुक्ति की जाए, तो जिले के खिलाड़ी राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पदक व देश में भाला फेंक को नई पहचान मिलने के बाद युवाओं का इस खेल की ओर रुझान बढ़ा है। ऐसे में खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना समय की जरूरत है, ताकि जिले से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकें।