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Yamuna Nagar News: गांव कुंजल की रेखा ने हुनर से बदली 18 महिलाओं की तकदीर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 17 Mar 2026 03:17 AM IST
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हाथों से बनाया गया जूट का बैग। स्वयं
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अशोक कुमार
यमुनानगर। जिले के गांव कुंजल की रहने वाली रेखा ने अपने हुनर और दृढ़ संकल्प के दम पर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि क्षेत्र की कई महिलाओं के लिए नई राह भी खोल दी है। हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर वह ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का काम कर रही हैं।
उनके प्रयासों से कई महिलाएं आज आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं। समूह की अन्य सदस्य रचना, गीता, पूजा, विशाखा, साक्षी, बबली और दीपा भी हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने में अपना योगदान दे रही हैं। इस समूह की महिलाएं जूट के बैग, सॉफ्ट टॉय, वूलेन टॉय और आर्टिफिशियल ज्वेलरी जैसे उत्पाद तैयार करती हैं। रेखा ने वर्ष 2018 में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचआरजीएएम) से जुड़कर स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘न्यू लक्ष्मी ग्रुप’ का गठन किया, जिसमें वर्तमान में 10 महिलाएं सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
समूह में रेखा प्रधान की भूमिका निभा रही हैं, जबकि सरोज बाला सचिव और नीरू शर्मा खजांची की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इन उत्पादों को विभिन्न स्थानों पर आयोजित प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जाता है, जहां लोगों को हस्तनिर्मित वस्तुओं के महत्व और उपयोग के प्रति जागरूक भी किया जाता है।
इससे महिलाओं को अपनी कला दिखाने के साथ-साथ आय के अवसर भी मिल रहे हैं। रेखा नई सोच संगठन से भी जुड़ी हुई हैं और इसके माध्यम से करीब 70 महिलाओं को हस्तनिर्मित सामान बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनके मार्गदर्शन में महिलाएं हुनर सीखकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। संवाद
रेखा के अनुसार स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उनका लक्ष्य है कि अधिक से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। संवाद
खास बात यह भी है कि जब देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम गांव गुलाबगढ़ आए थे, तब उन्होंने रेखा से करीब 20 मिनट तक बातचीत कर उनके कार्य की सराहना की थी। संवाद
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यमुनानगर। जिले के गांव कुंजल की रहने वाली रेखा ने अपने हुनर और दृढ़ संकल्प के दम पर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि क्षेत्र की कई महिलाओं के लिए नई राह भी खोल दी है। हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार कर वह ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का काम कर रही हैं।
उनके प्रयासों से कई महिलाएं आज आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं। समूह की अन्य सदस्य रचना, गीता, पूजा, विशाखा, साक्षी, बबली और दीपा भी हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने में अपना योगदान दे रही हैं। इस समूह की महिलाएं जूट के बैग, सॉफ्ट टॉय, वूलेन टॉय और आर्टिफिशियल ज्वेलरी जैसे उत्पाद तैयार करती हैं। रेखा ने वर्ष 2018 में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचआरजीएएम) से जुड़कर स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘न्यू लक्ष्मी ग्रुप’ का गठन किया, जिसमें वर्तमान में 10 महिलाएं सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।
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समूह में रेखा प्रधान की भूमिका निभा रही हैं, जबकि सरोज बाला सचिव और नीरू शर्मा खजांची की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इन उत्पादों को विभिन्न स्थानों पर आयोजित प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जाता है, जहां लोगों को हस्तनिर्मित वस्तुओं के महत्व और उपयोग के प्रति जागरूक भी किया जाता है।
इससे महिलाओं को अपनी कला दिखाने के साथ-साथ आय के अवसर भी मिल रहे हैं। रेखा नई सोच संगठन से भी जुड़ी हुई हैं और इसके माध्यम से करीब 70 महिलाओं को हस्तनिर्मित सामान बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनके मार्गदर्शन में महिलाएं हुनर सीखकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। संवाद
रेखा के अनुसार स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उनका लक्ष्य है कि अधिक से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। संवाद
खास बात यह भी है कि जब देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम गांव गुलाबगढ़ आए थे, तब उन्होंने रेखा से करीब 20 मिनट तक बातचीत कर उनके कार्य की सराहना की थी। संवाद

हाथों से बनाया गया जूट का बैग। स्वयं

हाथों से बनाया गया जूट का बैग। स्वयं

हाथों से बनाया गया जूट का बैग। स्वयं