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Yamuna Nagar News: महोत्सव का आगाज, सरस्वती की धारा से फिर जुड़ी वैदिक चेतना

संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 20 Jan 2026 01:43 AM IST
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The festival begins, reconnecting Vedic consciousness with the flow of Saraswati
 सरस्वती महोत्सव कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि, मेयर, पूर्व मंत्री व अन्य। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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व्यासपुर। सरस्वती नदी के तट पर वैदिक मंत्रोच्चारण की गूंज के साथ सोमवार को अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का शुभारंभ हुआ। श्री आदिबद्री में शुरू हुए इस पांच दिवसीय महोत्सव ने एक बार फिर सरस्वती की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्ता को केंद्र में ला दिया।
मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय दर्शन लाल जैन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने 11 कुंडीय यज्ञ में पूर्णाहुति डाली और महोत्सव परिसर में लगी चित्रकला प्रतियोगिता का अवलोकन किया।
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उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि हमारी वैदिक पहचान का मूल है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में सरस्वती धरोहर को संरक्षित करने और इसे पर्यटन से जोड़ने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के वाइस चेयरमैन धूमन सिंह किरमिच ने कहा कि स्वर्गीय दर्शन लाल जैन के मार्गदर्शन में सरस्वती नदी शोध संस्थान की स्थापना का उद्देश्य सरस्वती की विलुप्त धारा को धरातल पर प्रमाणित करना और पुनः प्रवाहित करना था। उन्होंने बताया कि श्री आदिबद्री से कैथल के सागरा गांव, जहां घग्गर सरस्वती में मिलती है, तथा वहां से सिरसा तक नदी प्रवाह को प्रमाणिक साक्ष्यों के साथ स्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड के माध्यम से 70 गांवों में सरस्वती के प्रवाह को दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि व्यासपुर से कैथल तक सरस्वती किनारे बसे गांवों में पिछले तीन वर्षों में भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
जल संरक्षण के लिए बनाए गए रिजर्वायरों में बरसात का पानी संग्रहित कर बाद में सरस्वती में छोड़ा जाता है, जिससे अधिकांश पानी रिचार्ज होकर भू-जल स्तर बढ़ा रहा है। इस मॉडल को राष्ट्रीय नदी परिषद और वर्ल्ड बैंक ने भी प्रभावी माना है।
महोत्सव के दौरान चित्रकला, पॉटरी और बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। विजेताओं को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए, जबकि पर्यटन मंत्री ने अपनी ओर से प्रतिभागी टीमों को नकद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया।
विज्ञान ने भी रखी सरस्वती की पुष्टि

विधायक धनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि जल और प्राणवायु मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता हैं और अधिकांश सभ्यताएं नदियों के किनारे ही विकसित हुई हैं। वहीं इसरो के वैज्ञानिक डॉ. ए.के. गुप्ता ने कहा कि उपग्रह अध्ययनों से यह स्पष्ट हो चुका है कि सरस्वती नदी कोई काल्पनिक अवधारणा नहीं थी। शोध में सामने आया है कि इसका उद्गम शिवालिक पर्वत श्रृंखला में था और यह अरब सागर तक प्रवाहित होती थी। उन्होंने बताया कि सरस्वती का बड़ा हिस्सा आज भी थार मरुस्थल के नीचे दबा हुआ है, जिस पर आगे और शोध किया जाना बाकी है। नदी मार्ग पर खोदे गए 34 कुओं में से 10 हरियाणा में स्थित हैं, जिनका मीठा पानी सरस्वती के प्राचीन प्रवाह की पुष्टि करता है।

 सरस्वती महोत्सव कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि, मेयर, पूर्व मंत्री व अन्य। संवाद

 सरस्वती महोत्सव कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि, मेयर, पूर्व मंत्री व अन्य। संवाद

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