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Yamuna Nagar News: उम्मीद लेकर आए, निराश लौटे
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 20 Jan 2026 01:58 AM IST
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कशमीरो देवी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। आंखों में थकी उम्मीद, चेहरों पर समय की गहरी लकीरें और सवालों से भरा मन। यह तस्वीर सोमवार को जिला सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर में सामने आई। व्यवस्था से न्याय की आस लगाए लोग यहां आए थे, लेकिन कई मामलों में उन्हें समाधान के बजाय फिर वही आश्वासन और फाइलों का फेर मिला।
समस्याओं को खत्म करने के उद्देश्य से शुरू किए गए समाधान शिविर कई फरियादियों के लिए उम्मीद के दरवाजे पर निराशा की दस्तक साबित होते नजर आए। जिला सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर में सीटीएम पीयूष गुप्ता के समक्ष कुल 10 शिकायतें रखी गईं। इनमें गांव बहादुरपुर निवासी महिपाल ने बुढ़ापा पेंशन लगवाने, ज्योति नगर निवासी राजन गोयल ने गली से नाजायज कब्जा हटवाने की शिकायत की। यमुनानगर निवासी प्रमोद कुमार ने घर की बिल्डिंग से बिजली की तारें हटवाने, सेक्टर-18 निवासी सुधीर वर्मा ने सेक्टर में स्ट्रीट लाइटें लगवाने तथा टी-प्वाइंट पर ट्रैफिक कंट्रोल सिग्नल और वॉकिंग ट्रैक बनवाने की मांग रखी। इनमें से किसी भी शिकायत का मौके पर समाधान नहीं हो सका। अधिकारियों ने सभी शिकायतों को संबंधित विभागों को भेजकर निपटान का भरोसा दिलाया। इस पर सभी फरियादी निराश लौट गए।
डेढ़ साल से भटक रहीं कश्मीरो
गांव हड़तान सिकंदारा की 65 वर्षीय कश्मीरो देवी की आंखों में आंसू थे। परिवार पहचान पत्र में दर्ज 1.40 लाख रुपये की गलत वार्षिक आय उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। इस त्रुटि को ठीक कराने के लिए वह पिछले डेढ़ साल से कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं। समाधान शिविर से उन्हें आखिरी आस थी कि शायद आज उनकी समस्या का अंत होगा। शिविर में भी उनकी शिकायत को उसी विभाग में दोबारा भेज दिया गया, जहां से यह परेशानी शुरू हुई थी। भारी मन से कश्मीरो देवी ने कहा कि अब फिर से सचिवालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उनका दर्द सिर्फ एक गलती का नहीं, बल्कि उस लंबी प्रक्रिया का है जिसमें हर कदम पर उम्मीद टूटती चली जाती है।
हरस्वरूप को मिला सिर्फ आश्वासन
76 वर्षीय बुजुर्ग हरस्वरूप पहली बार समाधान शिविर में पहुंचे थे। उनकी परेशानी यह है कि उनकी पुत्रवधू के नाम पर दो प्रॉपर्टी आईडी बनी हुई हैं, जिनमें अलग-अलग मोबाइल नंबर दर्ज है। नगर निगम के कई चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। शिविर में अधिकारियों ने उनकी शिकायत दर्ज कर जल्द दुरुस्त करने का आश्वासन दिया। इस थोड़ी राहत जरूर मिली है।
फिर खाली हाथ लौटा हरमिंद्र का परिवार
परवालों गांव के हरमिंद्र अपनी पत्नी पुष्पा के साथ समाधान शिविर पहुंचे थे। उनके पास पीला राशन कार्ड है, इसके बावजूद पिछले पांच महीने से उन्हें सरकारी राशन नहीं मिल रहा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दफ्तरों के कई चक्कर काट चुके हरमिंद्र को भरोसा था कि समाधान शिविर में उनकी समस्या यहीं खत्म हो जाएगी। यहां भी शिकायत को उसी विभाग में वापस मार्क कर दिया गया। निराश हरमिंद्र ने कहा कि अब यह भी तय नहीं कि उन्हें राशन मिलेगा या नहीं।
समाधान शिविर में आने वाले प्रत्येक प्रार्थी की समस्या को मौके पर ही निपटाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। जिन मामलों में दस्तावेजों या जांच की जरूरत है, उनका भी समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। - पीयूष गुप्ता, सीटीएम यमुनानगर।
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यमुनानगर। आंखों में थकी उम्मीद, चेहरों पर समय की गहरी लकीरें और सवालों से भरा मन। यह तस्वीर सोमवार को जिला सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर में सामने आई। व्यवस्था से न्याय की आस लगाए लोग यहां आए थे, लेकिन कई मामलों में उन्हें समाधान के बजाय फिर वही आश्वासन और फाइलों का फेर मिला।
समस्याओं को खत्म करने के उद्देश्य से शुरू किए गए समाधान शिविर कई फरियादियों के लिए उम्मीद के दरवाजे पर निराशा की दस्तक साबित होते नजर आए। जिला सचिवालय में आयोजित समाधान शिविर में सीटीएम पीयूष गुप्ता के समक्ष कुल 10 शिकायतें रखी गईं। इनमें गांव बहादुरपुर निवासी महिपाल ने बुढ़ापा पेंशन लगवाने, ज्योति नगर निवासी राजन गोयल ने गली से नाजायज कब्जा हटवाने की शिकायत की। यमुनानगर निवासी प्रमोद कुमार ने घर की बिल्डिंग से बिजली की तारें हटवाने, सेक्टर-18 निवासी सुधीर वर्मा ने सेक्टर में स्ट्रीट लाइटें लगवाने तथा टी-प्वाइंट पर ट्रैफिक कंट्रोल सिग्नल और वॉकिंग ट्रैक बनवाने की मांग रखी। इनमें से किसी भी शिकायत का मौके पर समाधान नहीं हो सका। अधिकारियों ने सभी शिकायतों को संबंधित विभागों को भेजकर निपटान का भरोसा दिलाया। इस पर सभी फरियादी निराश लौट गए।
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डेढ़ साल से भटक रहीं कश्मीरो
गांव हड़तान सिकंदारा की 65 वर्षीय कश्मीरो देवी की आंखों में आंसू थे। परिवार पहचान पत्र में दर्ज 1.40 लाख रुपये की गलत वार्षिक आय उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। इस त्रुटि को ठीक कराने के लिए वह पिछले डेढ़ साल से कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं। समाधान शिविर से उन्हें आखिरी आस थी कि शायद आज उनकी समस्या का अंत होगा। शिविर में भी उनकी शिकायत को उसी विभाग में दोबारा भेज दिया गया, जहां से यह परेशानी शुरू हुई थी। भारी मन से कश्मीरो देवी ने कहा कि अब फिर से सचिवालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उनका दर्द सिर्फ एक गलती का नहीं, बल्कि उस लंबी प्रक्रिया का है जिसमें हर कदम पर उम्मीद टूटती चली जाती है।
हरस्वरूप को मिला सिर्फ आश्वासन
76 वर्षीय बुजुर्ग हरस्वरूप पहली बार समाधान शिविर में पहुंचे थे। उनकी परेशानी यह है कि उनकी पुत्रवधू के नाम पर दो प्रॉपर्टी आईडी बनी हुई हैं, जिनमें अलग-अलग मोबाइल नंबर दर्ज है। नगर निगम के कई चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। शिविर में अधिकारियों ने उनकी शिकायत दर्ज कर जल्द दुरुस्त करने का आश्वासन दिया। इस थोड़ी राहत जरूर मिली है।
फिर खाली हाथ लौटा हरमिंद्र का परिवार
परवालों गांव के हरमिंद्र अपनी पत्नी पुष्पा के साथ समाधान शिविर पहुंचे थे। उनके पास पीला राशन कार्ड है, इसके बावजूद पिछले पांच महीने से उन्हें सरकारी राशन नहीं मिल रहा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दफ्तरों के कई चक्कर काट चुके हरमिंद्र को भरोसा था कि समाधान शिविर में उनकी समस्या यहीं खत्म हो जाएगी। यहां भी शिकायत को उसी विभाग में वापस मार्क कर दिया गया। निराश हरमिंद्र ने कहा कि अब यह भी तय नहीं कि उन्हें राशन मिलेगा या नहीं।
समाधान शिविर में आने वाले प्रत्येक प्रार्थी की समस्या को मौके पर ही निपटाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। जिन मामलों में दस्तावेजों या जांच की जरूरत है, उनका भी समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। - पीयूष गुप्ता, सीटीएम यमुनानगर।

कशमीरो देवी।

कशमीरो देवी।

कशमीरो देवी।