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MP: इंदौर का ‘करोड़पति भिखारी’ निकला उधार वसूलने वाला! प्रशासन के दावे पर परिवार का बड़ा पलटवार

अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Tue, 20 Jan 2026 02:16 PM IST
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सार

Indore News: इंदौर में 'करोड़पति भिखारी' मांगीलाल के मामले में एक नया मोड़ आ गया है। जहां प्रशासन ने उनके पास तीन मकान और लग्जरी गाड़ियां होने का दावा किया है, वहीं परिजनों ने इन संपत्तियों को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए दावों को गलत करार दिया है।

Indore News Family refutes millionaire beggar claims as administration investigates assets of rescued man Mang
मांगीलाल - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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इंदौर शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने के अभियान के तहत हाल ही में रेस्क्यू किए गए मांगीलाल का मामला अब विवादों में घिर गया है। प्रशासन ने मांगीलाल को एक करोड़पति भिखारी माना था, लेकिन अब उनके परिजनों ने सामने आकर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। परिजनों का कहना है कि मांगीलाल कोई भिखारी नहीं हैं, बल्कि सराफा बाजार में वह अपने उधार दिए गए पैसे वसूलने जाते थे।
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परिजनों ने संपत्ति के दावों को बताया भ्रामक
प्रशासन द्वारा दावा किया गया था कि मांगीलाल के पास तीन मकान, तीन ऑटो-रिक्शा और एक निजी कार है। इस पर मांगीलाल के भतीजे ने स्पष्ट किया है कि जिस तीन मंजिला इमारत का जिक्र किया जा रहा है, वह असल में उनकी मां के नाम पर पंजीकृत है। भतीजे के अनुसार, इस मकान पर लिए गए ऋण की किस्तें वे स्वयं भरते हैं और उनके पास इसके पुख्ता कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य संपत्तियों को लेकर जो जानकारी फैलाई गई है, वह तथ्यात्मक रूप से गलत है।
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भीख मांगने नहीं उधार वसूलने का काम करता है मांगीलाल
परिजनों के मुताबिक, मांगीलाल पूर्व में राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन कुष्ठ रोग के कारण शारीरिक अक्षमता आने पर उन्होंने काम छोड़ दिया। भतीजे ने बताया कि मांगीलाल बुलियन मार्केट के छोटे व्यापारियों और श्रमिकों को पैसे उधार देते थे। जिस समय उन्हें रेस्क्यू किया गया, वे सराफा बाजार में अपनी उधारी वसूलने ही गए थे। शारीरिक कमजोरी के कारण वे पहियों वाले तख्ते का उपयोग करते हैं, जिसे देखकर लोगों ने उन्हें भिखारी समझ लिया और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में प्रसारित कर दी गईं।

प्रशासन और एनजीओ के अलग-अलग दावे
भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के अधिकारियों का कहना है कि मांगीलाल वर्ष 2021 से इस गतिविधि में लिप्त थे और उन्होंने बाजार में लाखों रुपये ब्याज पर दे रखे हैं। वहीं, इस क्षेत्र में कार्यरत एनजीओ 'प्रवेश' की अध्यक्ष रूपाली जैन का मानना है कि मांगीलाल की पूरी संपत्ति को भीख से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बीमारी और सामाजिक तिरस्कार के कारण मांगीलाल की स्थिति दयनीय हुई है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही कोई कानूनी कदम उठाया जाएगा।
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