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Yamuna Nagar News: सर्दी में फेफड़ों के संक्रमण के मरीज बढ़े
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 31 Jan 2026 12:35 AM IST
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जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी के बाहर लगी लोगों की भीड़। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सर्दी का प्रकोप के बीच जिले में फेफड़ों के संक्रमण के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन फेफड़ों से संबंधित आठ से दस मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार ठंडी हवा के संपर्क में आने से सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। सर्दी के मौसम में विशेष तौर पर अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ब्रोंकाइटिस के मरीजों में ठंड बढ़ने के साथ कफ की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके कारण सांस लेने में रुकावट महसूस होती है और खांसी की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है।
सर्दी में लोग शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण संक्रमण जल्दी पकड़ लेता है। ऐसे में सभी आयु वर्ग के लोगों को हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी जरूर करनी चाहिए, ताकि शरीर सक्रिय बना रहे और बीमारियों से बचाव हो सके। सिर्फ सांस के मरीज ही नहीं, बल्कि सर्दी के मौसम में शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना अधिक रहती है, वहीं मेटाबॉलिक एक्टिविटी कम होने से शुगर लेवल भी अनियंत्रित हो सकता है।
नियमित कराते रहें जांच : डॉ. जितेंद्र
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि अस्पताल में इन दिनों सर्दी-खांसी, अस्थमा, डायबिटीज, हृदय रोग और जोड़ों के दर्द से संबंधित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। संतुलित खानपान, पर्याप्त गर्म कपड़े, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से सर्दी के मौसम में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। शुगर और बीपी के मरीज नियमित जांच कराते रहें और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं बंद न करें। ठंड के मौसम में जरा-सी लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है, इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है।
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यमुनानगर। सर्दी का प्रकोप के बीच जिले में फेफड़ों के संक्रमण के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन फेफड़ों से संबंधित आठ से दस मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार ठंडी हवा के संपर्क में आने से सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। सर्दी के मौसम में विशेष तौर पर अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ब्रोंकाइटिस के मरीजों में ठंड बढ़ने के साथ कफ की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके कारण सांस लेने में रुकावट महसूस होती है और खांसी की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है।
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सर्दी में लोग शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण संक्रमण जल्दी पकड़ लेता है। ऐसे में सभी आयु वर्ग के लोगों को हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी जरूर करनी चाहिए, ताकि शरीर सक्रिय बना रहे और बीमारियों से बचाव हो सके। सिर्फ सांस के मरीज ही नहीं, बल्कि सर्दी के मौसम में शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना अधिक रहती है, वहीं मेटाबॉलिक एक्टिविटी कम होने से शुगर लेवल भी अनियंत्रित हो सकता है।
नियमित कराते रहें जांच : डॉ. जितेंद्र
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि अस्पताल में इन दिनों सर्दी-खांसी, अस्थमा, डायबिटीज, हृदय रोग और जोड़ों के दर्द से संबंधित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। संतुलित खानपान, पर्याप्त गर्म कपड़े, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच से सर्दी के मौसम में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। शुगर और बीपी के मरीज नियमित जांच कराते रहें और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं बंद न करें। ठंड के मौसम में जरा-सी लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है, इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है।
