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Yamuna Nagar News: जिला अस्पताल की दीवारों से उतर रही टाइलें खोल रही निर्माण सामग्री की पोल
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:04 AM IST
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सिविल सर्जन कार्यालय की दीवारों से उतारी गई टाइलें। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। 105 करोड़ रुपये की लागत से बने 200 बेड के जिला नागरिक अस्पताल में निर्माण कार्य की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल की बाहरी दीवारों से लगातार टाइलें गिरने की घटनाओं के बाद शुरू हुई जांच में बड़ी संख्या में टाइलें खोखली और कमजोर पाई जा रही हैं। ज्यादातर टाइलें मजदूरों के हाथ लगाते ही नीचे गिर रही हैं। कई स्थानों पर पूरी दीवार की टाइलें दोबारा लगाने की नौबत आ गई है।
अस्पताल परिसर में इन दिनों मजदूरों की टीम दीवारों पर लगी टाइलों की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों के निर्देश पर प्रत्येक टाइल को हथौड़ी से ठोककर उसकी मजबूती परखी जा रही है। जांच के दौरान जिन टाइलों के पीछे खालीपन या कमजोरी महसूस हो रही है, उन्हें तुरंत हटाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में टाइलें दीवारों से अलग हो रही हैं।
जिला अस्पताल की दीवारों से अब तक 13 बार टाइलें गिर चुकी हैं। कई बार टाइलें गिरने की घटनाओं ने अस्पताल प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। मामला गंभीर होने पर हाल ही में अतिरिक्त उपायुक्त नवीन आहूजा ने पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद पूरे भवन की टाइलों की तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए गए थे।
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जांच शुरू होने के बाद जो स्थिति सामने आ रही है, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। शुरुआत में अनुमान लगाया जा रहा था कि कुछ स्थानों पर ही टाइलों में समस्या होगी, लेकिन अब कई हिस्सों में बड़ी संख्या में टाइलें हटानी पड़ रही हैं। कुछ स्थानों पर तो चार मंजिला ऊंचाई तक लगी टाइलें निकालने की नौबत आ गई है।
किसी भी भवन में टाइलों का बार-बार उखड़ना या गिरना सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। यदि बड़ी संख्या में टाइलें खोखली मिल रही हैं तो यह या तो निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी या फिर लगाने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही की ओर संकेत करता है। अस्पताल जैसे सार्वजनिक भवन में ऐसी स्थिति सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय है।
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए अस्पताल से बेहतर गुणवत्ता की अपेक्षा थी। लगातार टाइलें गिरने की घटनाओं ने न केवल निर्माण कार्य पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही खामियां यह संकेत दे रही हैं कि अस्पताल निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री और कार्य गुणवत्ता की गहन जांच की आवश्यकता है।
कमजोर और खोखली टाइलों को हटाकर दोबारा लगाया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से टाइलों की जांच करवाई जा रही है। निर्माण सामग्री की जांच कराने के लिए टाइलों के सैंपल भी लिए गए हैं। - पुनीत मित्तल, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी।
यमुनानगर। 105 करोड़ रुपये की लागत से बने 200 बेड के जिला नागरिक अस्पताल में निर्माण कार्य की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल की बाहरी दीवारों से लगातार टाइलें गिरने की घटनाओं के बाद शुरू हुई जांच में बड़ी संख्या में टाइलें खोखली और कमजोर पाई जा रही हैं। ज्यादातर टाइलें मजदूरों के हाथ लगाते ही नीचे गिर रही हैं। कई स्थानों पर पूरी दीवार की टाइलें दोबारा लगाने की नौबत आ गई है।
अस्पताल परिसर में इन दिनों मजदूरों की टीम दीवारों पर लगी टाइलों की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों के निर्देश पर प्रत्येक टाइल को हथौड़ी से ठोककर उसकी मजबूती परखी जा रही है। जांच के दौरान जिन टाइलों के पीछे खालीपन या कमजोरी महसूस हो रही है, उन्हें तुरंत हटाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में टाइलें दीवारों से अलग हो रही हैं।
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जिला अस्पताल की दीवारों से अब तक 13 बार टाइलें गिर चुकी हैं। कई बार टाइलें गिरने की घटनाओं ने अस्पताल प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। मामला गंभीर होने पर हाल ही में अतिरिक्त उपायुक्त नवीन आहूजा ने पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद पूरे भवन की टाइलों की तकनीकी जांच कराने के निर्देश दिए गए थे।
जांच शुरू होने के बाद जो स्थिति सामने आ रही है, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। शुरुआत में अनुमान लगाया जा रहा था कि कुछ स्थानों पर ही टाइलों में समस्या होगी, लेकिन अब कई हिस्सों में बड़ी संख्या में टाइलें हटानी पड़ रही हैं। कुछ स्थानों पर तो चार मंजिला ऊंचाई तक लगी टाइलें निकालने की नौबत आ गई है।
किसी भी भवन में टाइलों का बार-बार उखड़ना या गिरना सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। यदि बड़ी संख्या में टाइलें खोखली मिल रही हैं तो यह या तो निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी या फिर लगाने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही की ओर संकेत करता है। अस्पताल जैसे सार्वजनिक भवन में ऐसी स्थिति सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय है।
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए अस्पताल से बेहतर गुणवत्ता की अपेक्षा थी। लगातार टाइलें गिरने की घटनाओं ने न केवल निर्माण कार्य पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही खामियां यह संकेत दे रही हैं कि अस्पताल निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री और कार्य गुणवत्ता की गहन जांच की आवश्यकता है।
कमजोर और खोखली टाइलों को हटाकर दोबारा लगाया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से टाइलों की जांच करवाई जा रही है। निर्माण सामग्री की जांच कराने के लिए टाइलों के सैंपल भी लिए गए हैं। - पुनीत मित्तल, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी।