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Yamuna Nagar News: विस्थापन के लिए चयनित हुई जमीन ग्रामीणों को नहीं मंजूर, प्रस्ताव नकारा
Mon, 20 Jul 2026 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 20 Jul 2026 01:13 AM IST
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डीसी से मिलने जिला सचिवालय में पहुंचे गांव रतनपुरा के लोग। संवाद
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राजेश कुमार
यमुनानगर। दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट की राख से वर्षों से जूझ रहे रतनपुरा गांव के लोगों ने प्रशासन की ओर से चिह्नित नई जमीन पर बसने से साफ इन्कार कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर उन्हें बसाने की तैयारी की जा रही है, वहां उनकी मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। इस संबंध में ग्रामीणों ने डीसी को मांगपत्र सौंपकर अपनी बात रखी।
ग्रामीणों का तर्क है कि यह जमीन थर्मल पावर प्लांट से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए राख और प्रदूषण का असर पहले की तरह बना रहेगा। साथ ही जमीन का स्तर आसपास की भूमि से चार से पांच फीट नीचे होने के कारण मानसून में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न होगी।
रतनपुरा के विस्थापन के लिए जिला प्रशासन ने नया गांव, बहरामपुर, फतेहपुर और ग्राम पंचायत रतनपुरा की पंचायती भूमि का सर्वे किया है। नया गांव, बहरामपुर और फतेहपुर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं मिलने पर प्रशासन ने रतनपुरा की 14 एकड़ पंचायती जमीन को प्राथमिकता दी है। इसके साथ लगती करीब 14 एकड़ निजी भूमि के अधिग्रहण की भी चर्चा है।
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ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। उनका कहना है कि चयनित भूमि काफी नीची है, जहां बरसात के दौरान पानी भर जाता है। इसके अलावा रास्ता भी बेहद संकरा है, जिससे एक समय में केवल एक ही वाहन गुजर सकता है। ऐसी जगह पर नया गांव बसाना भविष्य में नई समस्याओं को जन्म देगा। समुचित पुनर्वास के लिए कम से कम 28 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।
इसी वर्ष पांच मई को हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने रतनपुरा का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कायमपुरा और रतनपुरा में करीब 300 मकान हैं और आबादी 1700 से अधिक है। वर्तमान में गांव लगभग 23 एकड़ क्षेत्र में बसा है तथा इसकी आबादी थर्मल पावर प्लांट की चारदीवारी से सटी है। राख से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा फसलें और पशु भी प्रभावित हो रहे हैं। संवाद
भूमि का चयन प्रशासन के लिए चुनौती
प्रशासन के सामने उपयुक्त भूमि का चयन भी चुनौती है। ग्राम पंचायत रतनपुरा के पास कुल 18 एकड़ पंचायती भूमि है, जिसमें से चार एकड़ में पहले से 100-100 वर्ग गज के प्लॉट काटे जा चुके हैं। फतेहपुर में 13 एकड़ से कम जमीन उपलब्ध है लेकिन वह अलग-अलग टुकड़ों में बंटी हुई है। बहरामपुर में भी लगभग 13 एकड़ भूमि है और वह भी एक स्थान पर नहीं है। नया गांव में लगभग 268 कनाल 18 मरले भूमि उपलब्ध है, लेकिन वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आती है। यदि नया गांव में निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तो बाजार भाव के अनुसार करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ का भुगतान करना पड़ सकता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने विकास एवं पंचायत विभाग के महानिदेशक को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है।
थर्मल कॉलोनी में विस्थापित करें गांव
रतनपुरा गांव के सरपंच राजकुमार, पूर्व सरपंच गोपाल सिंह और पूर्व सरपंच जितेंद्र राणा का कहना है कि यदि उन्हें रतनपुरा की पंचायती जमीन पर ही बसाया गया तो थर्मल की राख से छुटकारा नहीं मिलेगा। इसके अलावा जमीन की गहराई अधिक है और उसके ऊपर से हाइटेंशन बिजली लाइन भी गुजर रही है, जिससे भविष्य में सुरक्षा संबंधी खतरे बने रहेंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि थर्मल कॉलोनी में करीब 60 एकड़ खाली पड़ी जमीन पर उनका पुनर्वास किया जाए।
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यमुनानगर। दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट की राख से वर्षों से जूझ रहे रतनपुरा गांव के लोगों ने प्रशासन की ओर से चिह्नित नई जमीन पर बसने से साफ इन्कार कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर उन्हें बसाने की तैयारी की जा रही है, वहां उनकी मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। इस संबंध में ग्रामीणों ने डीसी को मांगपत्र सौंपकर अपनी बात रखी।
ग्रामीणों का तर्क है कि यह जमीन थर्मल पावर प्लांट से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए राख और प्रदूषण का असर पहले की तरह बना रहेगा। साथ ही जमीन का स्तर आसपास की भूमि से चार से पांच फीट नीचे होने के कारण मानसून में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न होगी।
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रतनपुरा के विस्थापन के लिए जिला प्रशासन ने नया गांव, बहरामपुर, फतेहपुर और ग्राम पंचायत रतनपुरा की पंचायती भूमि का सर्वे किया है। नया गांव, बहरामपुर और फतेहपुर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं मिलने पर प्रशासन ने रतनपुरा की 14 एकड़ पंचायती जमीन को प्राथमिकता दी है। इसके साथ लगती करीब 14 एकड़ निजी भूमि के अधिग्रहण की भी चर्चा है।
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ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। उनका कहना है कि चयनित भूमि काफी नीची है, जहां बरसात के दौरान पानी भर जाता है। इसके अलावा रास्ता भी बेहद संकरा है, जिससे एक समय में केवल एक ही वाहन गुजर सकता है। ऐसी जगह पर नया गांव बसाना भविष्य में नई समस्याओं को जन्म देगा। समुचित पुनर्वास के लिए कम से कम 28 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।
इसी वर्ष पांच मई को हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने रतनपुरा का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कायमपुरा और रतनपुरा में करीब 300 मकान हैं और आबादी 1700 से अधिक है। वर्तमान में गांव लगभग 23 एकड़ क्षेत्र में बसा है तथा इसकी आबादी थर्मल पावर प्लांट की चारदीवारी से सटी है। राख से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा फसलें और पशु भी प्रभावित हो रहे हैं। संवाद
भूमि का चयन प्रशासन के लिए चुनौती
प्रशासन के सामने उपयुक्त भूमि का चयन भी चुनौती है। ग्राम पंचायत रतनपुरा के पास कुल 18 एकड़ पंचायती भूमि है, जिसमें से चार एकड़ में पहले से 100-100 वर्ग गज के प्लॉट काटे जा चुके हैं। फतेहपुर में 13 एकड़ से कम जमीन उपलब्ध है लेकिन वह अलग-अलग टुकड़ों में बंटी हुई है। बहरामपुर में भी लगभग 13 एकड़ भूमि है और वह भी एक स्थान पर नहीं है। नया गांव में लगभग 268 कनाल 18 मरले भूमि उपलब्ध है, लेकिन वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आती है। यदि नया गांव में निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तो बाजार भाव के अनुसार करीब एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ का भुगतान करना पड़ सकता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने विकास एवं पंचायत विभाग के महानिदेशक को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है।
थर्मल कॉलोनी में विस्थापित करें गांव
रतनपुरा गांव के सरपंच राजकुमार, पूर्व सरपंच गोपाल सिंह और पूर्व सरपंच जितेंद्र राणा का कहना है कि यदि उन्हें रतनपुरा की पंचायती जमीन पर ही बसाया गया तो थर्मल की राख से छुटकारा नहीं मिलेगा। इसके अलावा जमीन की गहराई अधिक है और उसके ऊपर से हाइटेंशन बिजली लाइन भी गुजर रही है, जिससे भविष्य में सुरक्षा संबंधी खतरे बने रहेंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि थर्मल कॉलोनी में करीब 60 एकड़ खाली पड़ी जमीन पर उनका पुनर्वास किया जाए।