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Bilaspur News: 20 साल की कैद के बाद पिंजरों से आजाद हुए 11 तोते, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

Fri, 31 Jul 2026 01:10 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2026 01:10 AM IST
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11 parrots freed from cages after 20 years of captivity; Forest Department carries out rescue.11 parrots freed from cages after 20 years of captivity; Forest Department carries out rescue.
रौड़ा सेक्टर में तोतों को आजाद कराने पहुंचे वन विभाग के अधिकारी। स्रोत: विभाग
बिलासपुर के राैड़ा सेक्टर में की कार्रवाई, उपचार व पुनर्वास के लिए टूटीकांडी शिमला रेस्क्यू सेंटर भेजे गए तोते
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वन विभाग की अपील पक्षियों को न रखे पिंजरे में

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। करीब दो दशक तक पिंजरों में कैद रहे 11 भारतीय तोतों (पैरेकीट) को आखिरकार आजादी मिल गई। हिमाचल प्रदेश वन विभाग के बिलासपुर वन मंडल ने बिलासपुर शहर के राैड़ा सेक्टर में कार्रवाई करते हुए इन सभी तोतों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। लंबे समय से कैद में रहने के कारण अब इन पक्षियों को उपचार, देखभाल और पुनर्वास के लिए शिमला स्थित टूटीकंडी वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास केंद्र भेजा गया है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में इनके स्वास्थ्य की जांच, देखभाल और उड़ान के लिए तैयार करने के बाद इन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाएगा।
वन विभाग के अनुसार भारतीय मूल के पक्षियों को पिंजरे में रखना भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस मामले में अधिनियम की धारा-9 एवं धारा-51 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई गई है। विभाग का कहना है कि कानून के बावजूद कई लोग शौक या व्यापार के लिए भारतीय पक्षियों को पिंजरों में कैद रखते हैं, जो वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन है। वन परिक्षेत्र अधिकारी सदर नरेंद्र सिंह दयाल ने बताया कि रेस्क्यू किए गए तोते लंबे समय तक कैद में रहने के कारण सीधे जंगल में नहीं छोड़े जा सकते। ऐसे पक्षियों को पहले चिकित्सकीय परीक्षण, संतुलित आहार और प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप व्यवहार विकसित करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके बाद विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि उन्हें कब और किस स्थान पर सुरक्षित रूप से प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाए।
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वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे भारतीय मूल के किसी भी पक्षी या अन्य वन्यजीव को पिंजरे में न रखें। यदि किसी के पास ऐसे पक्षी हैं तो उन्हें स्वेच्छा से वन विभाग को सौंप दें। साथ ही यदि कहीं भी भारतीय पक्षियों या अन्य वन्यजीवों को अवैध रूप से कैद कर रखा गया हो तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन कार्यालय को दें, ताकि समय रहते उन्हें मुक्त कराया जा सके। वन विभाग ने कहा कि पक्षी और अन्य वन्यजीव प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। उनका वास्तविक घर जंगल और खुला आसमान है, न कि पिंजरा। विभाग ने लोगों से वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने और जैव विविधता को सुरक्षित रखने की अपील की है।
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