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Bilaspur News: कहलूर लोकोत्सव में 53 महिला मंडलों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:53 PM IST
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नलवाड़ी मेले में आयोजित कहलूर लोक उत्सव में प्रस्तुति देती महिलाएं। स्रोत: डीपीआरओ
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नलवाड़ी मेला के दूसरे दिन उमड़ी भीड़, दिनभर चलीं आकर्षक प्रस्तुतियां
गिद्दा, लोक-गीत, संस्कार गीत और धाजा ने मोहा मन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला-2026 के अंतर्गत आयोजित कहलूर लोकोत्सव के दूसरे दिन लोक संस्कृति का रंगारंग और भव्य आयोजन देखने को मिला। कार्यक्रम में 53 महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों, व्यक्तिगत कलाकारों, विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं ने भाग लेकर अपनी प्रस्तुतियों से पूरे पंडाल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। सुबह से लेकर शाम तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी रही।
दूसरे दिन मंच पर हिमाचली लोक परंपराओं की विविधता और समृद्धि साफ झलकती नजर आई। महिला मंडलों और स्थानीय सांस्कृतिक दलों ने गिद्दा, पहाड़ी लोक-गीत, संस्कार गीत, लोक-नृत्य, धाजा और एकल गायन जैसी पारंपरिक विधाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने जैसे ही मंच संभाला, पूरा वातावरण लोक संस्कृति के रंग में रंग गया। कार्यक्रम के दौरान ढोल-नगाड़ों और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप ने माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया। कलाकारों की ताल और लय के साथ दर्शक भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाए।
इस अवसर पर कहलूर लोकोत्सव आयोजन समिति की संयोजक एवं जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल भी उपस्थित रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी समृद्ध लोक परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को भविष्य में भी इसी तरह बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया। कहलूर लोकोत्सव के आगामी दिनों में भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें प्रदेशभर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से इस उत्सव को और अधिक रंगीन बनाएंगे।
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गिद्दा, लोक-गीत, संस्कार गीत और धाजा ने मोहा मन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला-2026 के अंतर्गत आयोजित कहलूर लोकोत्सव के दूसरे दिन लोक संस्कृति का रंगारंग और भव्य आयोजन देखने को मिला। कार्यक्रम में 53 महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों, व्यक्तिगत कलाकारों, विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं ने भाग लेकर अपनी प्रस्तुतियों से पूरे पंडाल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। सुबह से लेकर शाम तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी रही।
दूसरे दिन मंच पर हिमाचली लोक परंपराओं की विविधता और समृद्धि साफ झलकती नजर आई। महिला मंडलों और स्थानीय सांस्कृतिक दलों ने गिद्दा, पहाड़ी लोक-गीत, संस्कार गीत, लोक-नृत्य, धाजा और एकल गायन जैसी पारंपरिक विधाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने जैसे ही मंच संभाला, पूरा वातावरण लोक संस्कृति के रंग में रंग गया। कार्यक्रम के दौरान ढोल-नगाड़ों और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप ने माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया। कलाकारों की ताल और लय के साथ दर्शक भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाए।
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इस अवसर पर कहलूर लोकोत्सव आयोजन समिति की संयोजक एवं जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल भी उपस्थित रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमारी समृद्ध लोक परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को भविष्य में भी इसी तरह बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया। कहलूर लोकोत्सव के आगामी दिनों में भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें प्रदेशभर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से इस उत्सव को और अधिक रंगीन बनाएंगे।