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AIIMS Bilaspur: सीएम सुक्खू का बड़ा फैसला, सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर लगाएगी सरकार
Wed, 12 Aug 2026 12:11 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Wed, 12 Aug 2026 12:11 PM IST
सार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बुधवार को एम्स बिलासपुर पहुंचे। उन्होंने विभिन्न विभागों और फैकल्टी से चर्चा कर अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक की जानकारी ली और मरीजों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में एम्स स्तर की मेडिकल तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। सुपर स्पेशलिस्ट करके प्रदेश लौटने वाले डॉक्टरों को वॉक-इन इंटरव्यू के जरिये नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू संबोधित करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
झंडूता विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बुधवार को एम्स बिलासपुर पहुंचे। उन्होंने एम्स के विभिन्न विभागों का दौरा किया और फैकल्टी सदस्यों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कुछ वार्डों में जाकर मरीजों से भी मुलाकात की और उनका हाल-चाल जाना।
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इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और विशेषज्ञों से एम्स में उपलब्ध अत्याधुनिक मेडिकल तकनीक और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि एम्स दिल्ली में जिस तरह नई और अत्याधुनिक मेडिकल तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है, उसी दिशा में हिमाचल में भी स्वास्थ्य सेवाओं को विकसित किया जाए। स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने काम शुरू कर दिया है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की कमी एक बड़ी चुनौती है। सरकार मेडिकल कॉलेजों में पहले पीजी कक्षाएं और इसके बाद एसआरशिप शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। इसके बाद फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए नियुक्तियां की जाएंगी।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि सुपर स्पेशलिस्ट करके हिमाचल लौटने वाले डॉक्टरों के लिए वॉक-इन इंटरव्यू करवाए जाएंगे। इन डॉक्टरों को कॉन्ट्रैक्ट आधार पर रखने के बजाय नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों को बेहतर वेतन और सुविधाएं उपलब्ध करवाने से उन्हें प्रदेश के अस्पतालों में बनाए रखने में मदद मिलेगी। सरकार मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को भी दूर करने पर ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने के बाद प्रदेश में हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार बनने के समय मेडिकल कॉलेज और डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज एक साथ थे, जिन्हें अब अलग किया गया है।
पहले चरण में करीब पांच मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में तकनीकी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। नाहन और चंबा मेडिकल कॉलेजों को भी नई तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
पहले चरण में करीब पांच मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में तकनीकी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। नाहन और चंबा मेडिकल कॉलेजों को भी नई तकनीक उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।