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भागवत कथा जीवन को सही दिशा देने वाली ज्ञान गंगा : डॉ. प्रवीण
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 21 Mar 2026 11:46 PM IST
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भपराल तलवाड़ मेला ग्राउंड में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु । स्रोत: जाग
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-भपराल तलवाड़ में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं के गांव भपराल तलवाड़ मेला ग्राउंड में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का शनिवार को समापन हो गया।
समापन दिवस पर बालयोगी डॉ. प्रवीण स्वामी जी ने श्रीमद्भागवत के अंतिम प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक संदेश दिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य ज्ञान गंगा है, जिसका श्रवण मनुष्य को आंतरिक शांति, संतोष और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि मनुष्य को अपने जीवन में सत्य, प्रेम, सेवा, करुणा और त्याग को अपनाना चाहिए। आज का मनुष्य भौतिकता की दौड़ में उलझकर मानसिक तनाव और असंतोष का शिकार हो रहा है, जबकि वास्तविक सुख, शांति केवल भगवान की भक्ति और सत्संग में ही निहित है। उन्होंने बताया कि भागवत कथा का वास्तविक फल तभी प्राप्त होता है जब मनुष्य उसके उपदेशों को अपने व्यवहार और जीवन शैली में उतारता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को नियमित रूप से भगवान का स्मरण करने, अच्छे संस्कार अपनाने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। समापन अवसर पर कथा स्थल पर विशेष रूप से भजन-कीर्तन और महाआरती का आयोजन किया गया। कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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भगेड़ (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं के गांव भपराल तलवाड़ मेला ग्राउंड में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का शनिवार को समापन हो गया।
समापन दिवस पर बालयोगी डॉ. प्रवीण स्वामी जी ने श्रीमद्भागवत के अंतिम प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक संदेश दिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य ज्ञान गंगा है, जिसका श्रवण मनुष्य को आंतरिक शांति, संतोष और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि मनुष्य को अपने जीवन में सत्य, प्रेम, सेवा, करुणा और त्याग को अपनाना चाहिए। आज का मनुष्य भौतिकता की दौड़ में उलझकर मानसिक तनाव और असंतोष का शिकार हो रहा है, जबकि वास्तविक सुख, शांति केवल भगवान की भक्ति और सत्संग में ही निहित है। उन्होंने बताया कि भागवत कथा का वास्तविक फल तभी प्राप्त होता है जब मनुष्य उसके उपदेशों को अपने व्यवहार और जीवन शैली में उतारता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को नियमित रूप से भगवान का स्मरण करने, अच्छे संस्कार अपनाने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। समापन अवसर पर कथा स्थल पर विशेष रूप से भजन-कीर्तन और महाआरती का आयोजन किया गया। कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।