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Bilaspur News: भाखड़ा विस्थापितों का सब्र टूटा, आमरण अनशन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 12 Apr 2026 11:24 PM IST
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बिलासपुर में आयोजित सर्वदलीय भाखड़ा विस्थापित समिति की बैठक में मौजूद पदाधिकारी व सदस्य। स्रोत
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आश्वासनों के बाद एक साल में भी नहीं हुई कार्रवाई, सरकार के खिलाफ फूटा गुस्सा
कमिश्नर रैंक की कमेटी गठित, प्लॉट, अतिक्रमण व मामलों की वापसी समेत कई मांगों पर प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सर्वदलीय भाखड़ा विस्थापित समिति ने सरकार की अनदेखी से नाराज होकर आमरण अनशन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। समिति का कहना है कि विभिन्न सरकारों, स्थानीय नेताओं, मंत्रियों, मुख्यमंत्री व केंद्रीय नेताओं से बार-बार मिले आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में विस्थापितों का सब्र जवाब दे रहा है और उन्हें मजबूर होकर आमरण अनशन करना पड़ सकता है।
समिति ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी स्थिति बनती है तो उसके लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार होगी। परिधि गृह बिलासपुर में महासचिव जेके नड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में एक सदस्य रामपाल डोगरा ने आमरण अनशन पर बैठने के लिए स्वयं को प्रस्तुत किया, जिस पर उपस्थित सदस्यों ने आगामी बैठक में विस्तृत चर्चा कर अंतिम रणनीति तय करने का निर्णय लिया। बैठक में वक्ताओं ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व भाखड़ा विस्थापितों का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से उनके सरकारी आवास ओक ओवर, शिमला में मिला था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने विस्थापितों की समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक उस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे विस्थापितों में भारी रोष व्याप्त है।
समिति के महासचिव ने कहा कि जब देश के इस पहले बड़े बांध के निर्माण के समय लोगों को विस्थापित किया गया था, तब न तो सरकार को उनकी समस्याओं का पूरा अंदाजा था और न ही लोग इतने जागरूक थे कि अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष कर सकें। इसका खामियाजा विस्थापितों को आज तक भुगतना पड़ रहा है।
बैठक में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में सरकार और मुख्यमंत्री से मांग की गई कि बिलासपुर नगर में कमिश्नर रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, ताकि भाखड़ा विस्थापितों की सभी लंबित मांगों और समस्याओं का स्थायी समाधान किया जा सके।
इसके अलावा अन्य प्रस्तावों में पुराने बिलासपुर नगर से विस्थापन के समय जन्मे सभी लोगों को विस्थापित का दर्जा देने और उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने, अब तक आवंटित आवासीय व दुकान के प्लॉटों की बिक्री की उच्च स्तरीय जांच कराने, बाहरी लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों की पहचान करने, विस्थापितों के खिलाफ अतिक्रमण के नाम पर विभिन्न अदालतों में चल रहे मामलों को वापस लेने और नगर के पुनः सेटलमेंट कराने की मांग उठाई गई।
समिति ने रेलवे लाइन निर्माण के कारण नष्ट हुए प्राकृतिक जल स्रोतों को बहाल करने, नलवाड़ी मेले के आय-व्यय का ब्योरा सार्वजनिक करने, लक्ष्मी नारायण मंदिर में हुए निर्माण कार्यों की लागत व कुल आय-व्यय का विवरण देने, मंदिर ट्रस्ट में स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों को शामिल करने और जिन विस्थापितों को अभी तक प्लॉट नहीं मिले हैं, उनके लिए वादे के अनुसार दो नए सेक्टर विकसित करने की भी मांग की। इसके साथ ही विवशतावश किए गए अतिक्रमण को प्लॉट की तर्ज पर लीज पर देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करने के साथ आमरण अनशन जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
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कमिश्नर रैंक की कमेटी गठित, प्लॉट, अतिक्रमण व मामलों की वापसी समेत कई मांगों पर प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सर्वदलीय भाखड़ा विस्थापित समिति ने सरकार की अनदेखी से नाराज होकर आमरण अनशन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। समिति का कहना है कि विभिन्न सरकारों, स्थानीय नेताओं, मंत्रियों, मुख्यमंत्री व केंद्रीय नेताओं से बार-बार मिले आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में विस्थापितों का सब्र जवाब दे रहा है और उन्हें मजबूर होकर आमरण अनशन करना पड़ सकता है।
समिति ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी स्थिति बनती है तो उसके लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार होगी। परिधि गृह बिलासपुर में महासचिव जेके नड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में एक सदस्य रामपाल डोगरा ने आमरण अनशन पर बैठने के लिए स्वयं को प्रस्तुत किया, जिस पर उपस्थित सदस्यों ने आगामी बैठक में विस्तृत चर्चा कर अंतिम रणनीति तय करने का निर्णय लिया। बैठक में वक्ताओं ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व भाखड़ा विस्थापितों का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से उनके सरकारी आवास ओक ओवर, शिमला में मिला था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने विस्थापितों की समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक उस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे विस्थापितों में भारी रोष व्याप्त है।
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समिति के महासचिव ने कहा कि जब देश के इस पहले बड़े बांध के निर्माण के समय लोगों को विस्थापित किया गया था, तब न तो सरकार को उनकी समस्याओं का पूरा अंदाजा था और न ही लोग इतने जागरूक थे कि अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष कर सकें। इसका खामियाजा विस्थापितों को आज तक भुगतना पड़ रहा है।
बैठक में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में सरकार और मुख्यमंत्री से मांग की गई कि बिलासपुर नगर में कमिश्नर रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, ताकि भाखड़ा विस्थापितों की सभी लंबित मांगों और समस्याओं का स्थायी समाधान किया जा सके।
इसके अलावा अन्य प्रस्तावों में पुराने बिलासपुर नगर से विस्थापन के समय जन्मे सभी लोगों को विस्थापित का दर्जा देने और उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने, अब तक आवंटित आवासीय व दुकान के प्लॉटों की बिक्री की उच्च स्तरीय जांच कराने, बाहरी लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों की पहचान करने, विस्थापितों के खिलाफ अतिक्रमण के नाम पर विभिन्न अदालतों में चल रहे मामलों को वापस लेने और नगर के पुनः सेटलमेंट कराने की मांग उठाई गई।
समिति ने रेलवे लाइन निर्माण के कारण नष्ट हुए प्राकृतिक जल स्रोतों को बहाल करने, नलवाड़ी मेले के आय-व्यय का ब्योरा सार्वजनिक करने, लक्ष्मी नारायण मंदिर में हुए निर्माण कार्यों की लागत व कुल आय-व्यय का विवरण देने, मंदिर ट्रस्ट में स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों को शामिल करने और जिन विस्थापितों को अभी तक प्लॉट नहीं मिले हैं, उनके लिए वादे के अनुसार दो नए सेक्टर विकसित करने की भी मांग की। इसके साथ ही विवशतावश किए गए अतिक्रमण को प्लॉट की तर्ज पर लीज पर देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन तेज करने के साथ आमरण अनशन जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।