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Bilaspur News: भाखड़ा विस्थापित 23 फरवरी को उठाएंगे लंबित मांगें
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:50 PM IST
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जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति की बैठक में मौजूद सदस्य। स्रोत: समिति
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बिलासपुर के लक्ष्मी नारायण मंदिर से उपायुक्त कार्यालय तक निकालेंगे रोष रैली
मांगे पूरी न होने पर समिति ने लिया आंदोलन का लिया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़(बिलासपुर)। भाखड़ा बांध परियोजना के विस्थापितों का सब्र अब जवाब देने लगा है। पिछले छह दशकों से न्याय की बाट जोह रहे विस्थापितों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने आगामी 23 फरवरी को बिलासपुर में प्रदेश व केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का एलान किया है।
रविवार को राधा-कृष्ण मंदिर धराड़सानी के प्रांगण में समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने की। बैठक में विस्थापितों की समस्याओं पर चर्चा की गई और आगामी रणनीति तैयार की गई। बैठक को संबोधित करते हुए देशराज शर्मा ने कहा कि भाखड़ा बांध के कारण अपना सब कुछ खोने वाले लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन के समक्ष बार-बार गुहार लगाने के बावजूद केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं। इसी के विरोध में 23 फरवरी को विस्थापित लक्ष्मी नारायण मंदिर से उपायुक्त कार्यालय तक रोष रैली निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र भी सौंपा जाएगा।
समिति की प्रमुख मांगों में विस्थापितों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगों की लंबी फेहरिस्त रखी है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल विस्थापितों की भूमि का शीघ्र बंदोबस्त हो और जिन्हें अभी तक प्लॉट नहीं मिले, उन्हें तुरंत आवंटित किए जाएं। काटे गए कनेक्शन बहाल हों और विस्थापितों को बिजली-पानी मुफ्त दिया जाए। बीबीएमबी व सरकारी नौकरियों में विस्थापितों के बच्चों को आरक्षण मिले और बांध से मिलने वाली रॉयल्टी का 25 प्रतिशत हिस्सा इनके कल्याण पर खर्च हो। सतलुज नदी पर बैरी दड़ोलां-लुहणू, ज्योरीपतन, बड़गांव-बुखर सहित अन्य स्थानों पर पुलों का निर्माण किया जाए। मछुआरों के लिए विशेष योजना और सतलुज नदी को पर्यटन के रूप में विकसित करने की मांग शामिल। इस अवसर पर श्रीराम चौहान, चिरंजी लाल, रोहित चंदेल, विनोद, सुरेंद्र, कमल गौतम और प्रदीप सहित अन्य विस्थापित सदस्य मौजूद रहे। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
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मांगे पूरी न होने पर समिति ने लिया आंदोलन का लिया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़(बिलासपुर)। भाखड़ा बांध परियोजना के विस्थापितों का सब्र अब जवाब देने लगा है। पिछले छह दशकों से न्याय की बाट जोह रहे विस्थापितों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने आगामी 23 फरवरी को बिलासपुर में प्रदेश व केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का एलान किया है।
रविवार को राधा-कृष्ण मंदिर धराड़सानी के प्रांगण में समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता समिति के प्रधान देशराज शर्मा ने की। बैठक में विस्थापितों की समस्याओं पर चर्चा की गई और आगामी रणनीति तैयार की गई। बैठक को संबोधित करते हुए देशराज शर्मा ने कहा कि भाखड़ा बांध के कारण अपना सब कुछ खोने वाले लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने रोष प्रकट करते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन के समक्ष बार-बार गुहार लगाने के बावजूद केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं। इसी के विरोध में 23 फरवरी को विस्थापित लक्ष्मी नारायण मंदिर से उपायुक्त कार्यालय तक रोष रैली निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र भी सौंपा जाएगा।
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समिति की प्रमुख मांगों में विस्थापितों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगों की लंबी फेहरिस्त रखी है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल विस्थापितों की भूमि का शीघ्र बंदोबस्त हो और जिन्हें अभी तक प्लॉट नहीं मिले, उन्हें तुरंत आवंटित किए जाएं। काटे गए कनेक्शन बहाल हों और विस्थापितों को बिजली-पानी मुफ्त दिया जाए। बीबीएमबी व सरकारी नौकरियों में विस्थापितों के बच्चों को आरक्षण मिले और बांध से मिलने वाली रॉयल्टी का 25 प्रतिशत हिस्सा इनके कल्याण पर खर्च हो। सतलुज नदी पर बैरी दड़ोलां-लुहणू, ज्योरीपतन, बड़गांव-बुखर सहित अन्य स्थानों पर पुलों का निर्माण किया जाए। मछुआरों के लिए विशेष योजना और सतलुज नदी को पर्यटन के रूप में विकसित करने की मांग शामिल। इस अवसर पर श्रीराम चौहान, चिरंजी लाल, रोहित चंदेल, विनोद, सुरेंद्र, कमल गौतम और प्रदीप सहित अन्य विस्थापित सदस्य मौजूद रहे। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
