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Bilaspur News: अदालत की तल्ख टिप्पणी, बिलासपुर बना चिट्टा तस्करी का ट्रांजिट रूट

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 19 Jan 2026 11:51 PM IST
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Bilaspur becomes transit route for Chitta smuggling, court makes harsh remark
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अदालत से--
चिट्टा तस्करी के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज, कहा-समाज को निगल रहा नशा
जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की विशेष अदालत ने मामले में किए आदेश
युवाओं को बर्बादी के रास्ते पर ले जा रही है नशे की लत, बचाने के लिए कड़ाई जरूरी

सरोज पाठक
बिलासपुर। जिला एवं सत्र न्यायालय बिलासपुर की विशेष अदालत ने नशा तस्करी के एक मामले में कड़ा संदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत डढवाल की अदालत ने 60 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) के साथ पकड़े गए आरोपी की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि समाज में फैल रहे नशे के इस जहर को रोकने के लिए कानून का सख्त होना अनिवार्य है। अदालत ने माना कि नशे की लत युवाओं को बर्बादी की राह पर ले जा रही है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला 21 दिसंबर 2025 की रात का है। थाना स्वारघाट की पुलिस टीम करमाला बस स्टॉप के पास गश्त पर थी। इस दौरान रेन शेल्टर में अंधेरे में बैठा एक युवक पुलिस की गाड़ी देखते ही घबरा गया और भागने की कोशिश करने लगा। हड़बड़ाहट में उसने अपनी जेब से एक पीला पैकेट निकालकर बेंच के नीचे फेंक दिया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे घेरा और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में जब पैकेट की जांच की, तो उसमें 60 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद हुआ। आरोपी की पहचान नालागढ़ (सोलन) निवासी रणवीर सिंह के रूप में हुई थी। अदालत ने कहा कि बिलासपुर जिला पंजाब से आने वाले नशे के लिए मुख्य मार्ग (ट्रांजिट रूट) बन गया है,जो बेहद चिंताजनक है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि चिट्टा जैसा घातक नशा एक बार के सेवन से ही युवाओं को अपना गुलाम बना लेता है। समाज के व्यापक हित को देखते हुए ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना जरूरी है।
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आरोपी के वकील ने अदालत में दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है और बरामद मात्रा कम है। वहीं, जिला लोक अभियोजक अभय गुप्ता ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को रिहा करने से समाज में गलत संदेश जाएगा। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी के आचरण और अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि भले ही पुलिस जांच पूरी हो चुकी हो, लेकिन अपराध की गंभीरता और समाज पर इसके बुरे असर को देखते हुए आरोपी को इस स्तर पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है। संवाद
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