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Bilaspur News: लंझता पंचायत में सीर खड्ड किनारे क्रशर लगाने पर भड़के ग्रामीण
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घुमारवीं के लंझता में सीर खड्ड किनारे क्रैशर के विरोध के लिए इकट्ठा हुए ग्रामीण व मौके पर पहुंच
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मौके पर पहुंचे लोगा, जताया कड़ा विरोध
अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने रखी आपत्तियां
एनओसी को लेकर पंचायत की भूमिका पर भी उठाए सवाल
21 हजार लीची के पौधों, पेयजल योजनाओं पर मंडराया संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। उप तहसील भराड़ी की लंझता पंचायत के तहत सीर खड्ड के किनारे प्रस्तावित क्रशर को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जब एसडीएम घुमारवीं सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी प्रस्तावित साइट का निरीक्षण करने पहुंचे, तो भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और क्रशर लगाने का पुरजोर विरोध किया। ग्रामीणों के तीखे तेवरों को देखते हुए अधिकारियों ने उनकी मांगों को सुना और मामले की गहन जांच करने का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सीर खड्ड किनारे बेला कस्बे के समीप क्रशर लगाने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन स्थानीय लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। ग्रामीणों ने पंचायत की ओर से जारी कथित अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें विश्वास में लिए बिना ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पंचायत ने एनओसी दी भी है, तो वह पूरी तरह से एकतरफा और नियमों के विरुद्ध है। निरीक्षण के दौरान कोऑपरेटिव हॉर्टिकल्चर प्रोडक्शन मैनेजमेंट एसोसिएशन लिमिटेड लंझता के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यहां 'शिवा प्रोजेक्ट' के तहत 21,000 लीची के पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की सिंचाई सीर खड्ड के पानी से ड्रिप पद्धति द्वारा की जा रही है। इसके अलावा, यहां से दो बड़ी पेयजल योजनाएं भी संचालित होती हैं। यदि यहां क्रशर लगता है, तो खड्ड का पानी दूषित हो जाएगा, जिससे न केवल बागवानी बल्कि हजारों लोगों की पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित होगी। ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपे ज्ञापन में कहा कि क्रशर से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण के कारण लंझता और मटयाल स्कूलों के बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि भारी वाहनों की आवाजाही और धूल से खेती योग्य जमीन भी बंजर हो सकती है। ग्रामीणों ने दोटूक कहा कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं जो उनकी आजीविका और पर्यावरण को तबाह कर दे।
इस मामले पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने भी कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहमति के बिना क्रशर लगाने की प्रक्रिया गलत है। गर्ग ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने इसे तुरंत नहीं रोका, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने इस बात की भी जांच की मांग की है कि आखिर पंचायत ने किस आधार पर एनओसी जारी की। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों की सभी आपत्तियों को गंभीरता से दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि सभी पहलुओं की जांच के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों की एकजुटता और विरोध ने यह साफ कर दिया है कि वे अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने रखी आपत्तियां
एनओसी को लेकर पंचायत की भूमिका पर भी उठाए सवाल
21 हजार लीची के पौधों, पेयजल योजनाओं पर मंडराया संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। उप तहसील भराड़ी की लंझता पंचायत के तहत सीर खड्ड के किनारे प्रस्तावित क्रशर को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जब एसडीएम घुमारवीं सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी प्रस्तावित साइट का निरीक्षण करने पहुंचे, तो भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और क्रशर लगाने का पुरजोर विरोध किया। ग्रामीणों के तीखे तेवरों को देखते हुए अधिकारियों ने उनकी मांगों को सुना और मामले की गहन जांच करने का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सीर खड्ड किनारे बेला कस्बे के समीप क्रशर लगाने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन स्थानीय लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। ग्रामीणों ने पंचायत की ओर से जारी कथित अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें विश्वास में लिए बिना ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पंचायत ने एनओसी दी भी है, तो वह पूरी तरह से एकतरफा और नियमों के विरुद्ध है। निरीक्षण के दौरान कोऑपरेटिव हॉर्टिकल्चर प्रोडक्शन मैनेजमेंट एसोसिएशन लिमिटेड लंझता के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यहां 'शिवा प्रोजेक्ट' के तहत 21,000 लीची के पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की सिंचाई सीर खड्ड के पानी से ड्रिप पद्धति द्वारा की जा रही है। इसके अलावा, यहां से दो बड़ी पेयजल योजनाएं भी संचालित होती हैं। यदि यहां क्रशर लगता है, तो खड्ड का पानी दूषित हो जाएगा, जिससे न केवल बागवानी बल्कि हजारों लोगों की पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित होगी। ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपे ज्ञापन में कहा कि क्रशर से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण के कारण लंझता और मटयाल स्कूलों के बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि भारी वाहनों की आवाजाही और धूल से खेती योग्य जमीन भी बंजर हो सकती है। ग्रामीणों ने दोटूक कहा कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं जो उनकी आजीविका और पर्यावरण को तबाह कर दे।
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इस मामले पर पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने भी कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहमति के बिना क्रशर लगाने की प्रक्रिया गलत है। गर्ग ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने इसे तुरंत नहीं रोका, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने इस बात की भी जांच की मांग की है कि आखिर पंचायत ने किस आधार पर एनओसी जारी की। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों की सभी आपत्तियों को गंभीरता से दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि सभी पहलुओं की जांच के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों की एकजुटता और विरोध ने यह साफ कर दिया है कि वे अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।