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Bilaspur News: बिलासपुर नगर परिषद में कांग्रेस के गढ़ रहे दो वार्डों में भाजपा की सेंध

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sun, 17 May 2026 11:50 PM IST
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BJP makes inroads into two Congress stronghold wards in Bilaspur Municipal Council
नगर परिषद बिलासपुर के  कार्यालय के बाहर परिणाम सुनने पहुंचे लोग। संवाद
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डिजिटल न चलाएं

कांग्रेस के नाराज चेहरों पर भाजपा ने खेला था दांव, जीते

बगावत में उलझी कांग्रेस के वोट बैंक बंटने से हाथ से निकल गए पारंपरिक वार्ड
रणनीति और संगठन के दम पर नगर परिषद बिलासपुर पर फिर काबिज हुई भाजपा
वार्ड-8 और 9 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए नेताओं ने पलटा समीकरण

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर परिषद बिलासपुर के चुनाव परिणामों ने शहर की राजनीति में कई बड़े संदेश एक साथ दे दिए हैं। भाजपा ने 11 में से 9 वार्ड जीतकर न केवल नगर परिषद पर दोबारा कब्जा जमाया, बल्कि कांग्रेस के उन वार्डों में भी सेंध लगा दी जिन्हें लंबे समय से पार्टी का सुरक्षित राजनीतिक क्षेत्र माना जाता था। चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया कि भाजपा इस बार पूरी रणनीति और संगठनात्मक तैयारी के साथ मैदान में उतरी थी, जबकि कांग्रेस अंदरूनी खींचतान, बगावत और कमजोर तालमेल में उलझी रह गई।
सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर-8 और 9 के परिणामों की रही। इन दोनों वार्डों को कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार भाजपा ने कांग्रेस के ही नाराज चेहरों को अपने साथ जोड़कर पूरा राजनीतिक समीकरण बदल दिया। वार्ड नंबर-8 से अनिल हैप्पी और वार्ड नंबर-9 से अजय चंदेल हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने बिना देरी किए दोनों नेताओं को समर्थन देकर मैदान में उतारा और दोनों जीत दर्ज करने में सफल रहे। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा ने इस चुनाव में केवल उम्मीदवार नहीं उतारे, बल्कि कांग्रेस के असंतोष को चुनावी हथियार बना दिया। पार्टी को पता था कि कांग्रेस टिकट वितरण और स्थानीय गुटबाजी से जूझ रही है। भाजपा ने उसी कमजोरी पर वार किया और उसका सीधा लाभ चुनाव परिणामों में दिखाई दिया। वार्ड नंबर-8 में कांग्रेस ने नीलम सूद को समर्थन दिया था, लेकिन कांग्रेस विचारधारा से जुड़ी रजनी के निर्दलीय मैदान में उतरने से पार्टी का पूरा गणित बिगड़ गया। कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक दो हिस्सों में बंट गया और भाजपा समर्थित अनिल हैप्पी जीत निकालने में सफल रहे। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी टिकट को लेकर नाराजगी चर्चा का विषय बनी रही। इसी तरह वार्ड नंबर-9 में कांग्रेस ने नईम शेख को मैदान में उतारा, लेकिन कांग्रेस के ही अमित मित्तू बागी होकर चुनाव लड़ गए। इससे कांग्रेस समर्थक मतों का विभाजन हुआ और भाजपा समर्थित अजय चंदेल को सीधा फायदा मिला। यह हार कांग्रेस के लिए इसलिए भी ज्यादा अहम मानी जा रही है क्योंकि पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने में नाकाम रही। हालांकि भाजपा को वार्ड नंबर-10 में झटका लगा। यहां भाजपा समर्थित सुनील सन्नी को कांग्रेस के मनोज पिल्ले के हाथों हार का सामना करना पड़ा। लेकिन एक सीट की यह हार भाजपा के कुल दबदबे को प्रभावित नहीं कर सकी। नगर परिषद बिलासपुर के परिणामों ने यह साफ संकेत दिया है कि शहर की राजनीति में भाजपा फिलहाल मजबूत स्थिति में है। वहीं कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक एकजुटता को बचाए रखना बनती जा रही है। क्योंकि जिन वार्डों को कांग्रेस अपना सुरक्षित क्षेत्र मान रही थी, वहीं बगावत और असंतोष ने पार्टी की सबसे ज्यादा राजनीतिक क्षति कर दी।
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इनसेट
त्रिलोक जमवाल ने संभाली चुनावी कमान
इस चुनाव में भाजपा ने स्थानीय विकास और कांग्रेस सरकार की कथित वादाखिलाफी को प्रमुख मुद्दा बनाया। सदर विधायक त्रिलोक जमवाल लगातार वार्ड स्तर पर सक्रिय रहे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चलाया और मतदाताओं के बीच कांग्रेस सरकार के अधूरे वादों का मुद्दा उठाया। महिलाओं को 1500 रुपये देने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने और विकास कार्यों की रफ्तार जैसे मुद्दों को भाजपा ने पूरी आक्रामकता से प्रचारित किया।

इनसेट
माइक्रो स्तर की रणनीति ने दिलाई बड़ी जीत
भाजपा की चुनावी रणनीति का एक बड़ा पहलू बूथ प्रबंधन भी रहा। पार्टी ने इस बार हर वार्ड में माइक्रो स्तर पर चुनाव संचालन किया। स्थानीय कार्यकर्ताओं को वार्डवार जिम्मेदारियां दी गईं और मतदाताओं तक सीधा संपर्क बनाए रखा गया। इसका असर मतदान और परिणाम दोनों में दिखाई दिया। दूसरी ओर कांग्रेस पूरे चुनाव में रक्षात्मक नजर आई। टिकट वितरण के बाद असंतोष खुलकर सामने आया और पार्टी कई वार्डों में अपने ही बागियों को मनाने में असफल रही। यही कारण रहा कि कांग्रेस विरोधी वोटों से ज्यादा नुकसान उसे अपने ही वोटों के बंटवारे से उठाना पड़ा।
इनसेट
अध्यक्ष पद पर जमना देवी का नाम सबसे आगे
अब नगर परिषद अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। अध्यक्ष पद इस बार महिला अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। भाजपा के स्पष्ट बहुमत के बाद स्टेडियम वार्ड नंबर दो से जीतकर आई भाजपा समर्थित जमना देवी का नाम अध्यक्ष पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है। पार्टी संगठन भी जल्द अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद को लेकर अंतिम निर्णय ले सकता है।
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