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Bilaspur News: यथास्थिति आदेश बरकरार, संपत्ति विवाद में दोनों अपीलें खारिज
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जिला न्यायाधीश ने कहा, ट्रायल कोर्ट का आदेश सही
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला न्यायाधीश की अदालत ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए दोनों सिविल मिक्स अपीलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवादित संपत्ति पर अंतिम निर्णय होने तक सभी पक्षों को यथास्थिति (स्टेटस-क्वो) बनाए रखना होगा।
मामला उत्तराधिकारियों के बीच स्वामित्व और वसीयत को लेकर विवाद चल रहा है। निचली अदालत (सिविल जज, बिलासपुर) ने मई 2024 को आदेश देते हुए सभी पक्षों को संपत्ति की स्थिति में कोई बदलाव न करने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी। मामले में वादियों ने दावा किया है कि वे सभी विवादित संपत्तियों के संयुक्त मालिक और कब्जाधारी हैं। उनका आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में किए गए कुछ बदलाव कथित वसीयत के आधार पर गलत तरीके से दर्ज किए गए हैं, जो न तो वैध है और न ही वास्तविक। वहीं, प्रतिवादियों का कहना है कि संपत्ति का बंटवारा वैध वसीयतों के आधार पर हुआ है और राजस्व रिकॉर्ड में किया गया संशोधन पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया।
जिला न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अंतरिम आदेश (टेंपररी इंजंक्शन) देने के लिए तीन प्रमुख आधार होते हैं-प्रथम दृष्टया मामला, सुविधा का संतुलन और अपूरणीय क्षति। अदालत ने माना कि इस मामले में वसीयत, उत्तराधिकार और म्यूटेशन से जुड़े गंभीर तथ्यात्मक विवाद हैं, जिनका अंतिम निर्णय साक्ष्य के आधार पर ही संभव है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट की ओर से दिया गया स्टेटस-क्वो आदेश विवादित संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए उचित है। अदालत ने यह भी कहा कि अपीलीय अदालत को ट्रायल कोर्ट के विवेकाधीन आदेश में तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब उसमें स्पष्ट रूप से कोई कानूनी त्रुटि या मनमानी हो, जो इस मामले में नहीं पाई गई। दोनों अपीलों को खारिज करते हुए अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही स्पष्ट किया कि इस फैसले का मुख्य मुकदमे की मेरिट पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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बिलासपुर। जिला न्यायाधीश की अदालत ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए दोनों सिविल मिक्स अपीलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवादित संपत्ति पर अंतिम निर्णय होने तक सभी पक्षों को यथास्थिति (स्टेटस-क्वो) बनाए रखना होगा।
मामला उत्तराधिकारियों के बीच स्वामित्व और वसीयत को लेकर विवाद चल रहा है। निचली अदालत (सिविल जज, बिलासपुर) ने मई 2024 को आदेश देते हुए सभी पक्षों को संपत्ति की स्थिति में कोई बदलाव न करने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी। मामले में वादियों ने दावा किया है कि वे सभी विवादित संपत्तियों के संयुक्त मालिक और कब्जाधारी हैं। उनका आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में किए गए कुछ बदलाव कथित वसीयत के आधार पर गलत तरीके से दर्ज किए गए हैं, जो न तो वैध है और न ही वास्तविक। वहीं, प्रतिवादियों का कहना है कि संपत्ति का बंटवारा वैध वसीयतों के आधार पर हुआ है और राजस्व रिकॉर्ड में किया गया संशोधन पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया।
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जिला न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अंतरिम आदेश (टेंपररी इंजंक्शन) देने के लिए तीन प्रमुख आधार होते हैं-प्रथम दृष्टया मामला, सुविधा का संतुलन और अपूरणीय क्षति। अदालत ने माना कि इस मामले में वसीयत, उत्तराधिकार और म्यूटेशन से जुड़े गंभीर तथ्यात्मक विवाद हैं, जिनका अंतिम निर्णय साक्ष्य के आधार पर ही संभव है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट की ओर से दिया गया स्टेटस-क्वो आदेश विवादित संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए उचित है। अदालत ने यह भी कहा कि अपीलीय अदालत को ट्रायल कोर्ट के विवेकाधीन आदेश में तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब उसमें स्पष्ट रूप से कोई कानूनी त्रुटि या मनमानी हो, जो इस मामले में नहीं पाई गई। दोनों अपीलों को खारिज करते हुए अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही स्पष्ट किया कि इस फैसले का मुख्य मुकदमे की मेरिट पर कोई असर नहीं पड़ेगा।