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Bilaspur News: सीबीएसई स्कूलों में काउंसलिंग में देरी पर अभ्यर्थियों में रोष
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 12 Apr 2026 11:29 PM IST
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तीन सप्ताह बाद भी शेड्यूल जारी नहीं होने से अभिभावक परेशान
काउंसलिंग में देरी होने से 10 हजार अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता
आचार संहिता से पहले प्रक्रिया पूरी करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई विद्यालयों के लिए आयोजित स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर अभ्यर्थियों में भारी रोष है। 22 मार्च 2026 को हुए इस टेस्ट के बाद तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक काउंसलिंग का शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। इससे करीब 10 हजार अभ्यर्थियों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार परीक्षा के बाद बोर्ड ने आंसर की जारी कर आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए थे। यह प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आगे की कार्रवाई नहीं होने से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक देरी से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। प्रदेश के सीबीएसई विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिले तेज़ी से जारी हैं। अधिकांश स्कूलों में 90 से 95 प्रतिशत तक प्रवेश हो चुके हैं। अभिभावकों का मानना है कि चयनित शिक्षक ही विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दे सकते हैं, ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट ने केवल अंतिम परिणाम पर रोक लगाई है जबकि काउंसलिंग प्रक्रिया पर कोई कानूनी बाधा नहीं है। इसके बावजूद काउंसलिंग को लंबित रखना समझ से परे है। शिक्षकों में नरेश शर्मा, सुरेश ठाकुर, विकास, सतीश कुमार, परिणीता, ज्योति, मेघा चौहान, पूनम कुमारी, संदीपिका, नरेंद्र, अरविंद, सुभाष, दिनेश, कपिल, रविंद्र और हितेंद्रा सहित अन्य अभ्यर्थियों ने सरकार और बोर्ड से मांग की है कि काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से जल्द शुरू किया जाए। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे अपने हक के लिए आगे की रणनीति अपनाने को मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी मांग उठाई है कि आगामी पंचायत चुनावों की आचार संहिता लागू होने से पहले काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी कर ली जाए ताकि चयन प्रक्रिया में और देरी न हो। अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि हजारों शिक्षकों के भविष्य और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लिया जाए।
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काउंसलिंग में देरी होने से 10 हजार अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता
आचार संहिता से पहले प्रक्रिया पूरी करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई विद्यालयों के लिए आयोजित स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर अभ्यर्थियों में भारी रोष है। 22 मार्च 2026 को हुए इस टेस्ट के बाद तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक काउंसलिंग का शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। इससे करीब 10 हजार अभ्यर्थियों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार परीक्षा के बाद बोर्ड ने आंसर की जारी कर आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए थे। यह प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आगे की कार्रवाई नहीं होने से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक देरी से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। प्रदेश के सीबीएसई विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिले तेज़ी से जारी हैं। अधिकांश स्कूलों में 90 से 95 प्रतिशत तक प्रवेश हो चुके हैं। अभिभावकों का मानना है कि चयनित शिक्षक ही विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दे सकते हैं, ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट ने केवल अंतिम परिणाम पर रोक लगाई है जबकि काउंसलिंग प्रक्रिया पर कोई कानूनी बाधा नहीं है। इसके बावजूद काउंसलिंग को लंबित रखना समझ से परे है। शिक्षकों में नरेश शर्मा, सुरेश ठाकुर, विकास, सतीश कुमार, परिणीता, ज्योति, मेघा चौहान, पूनम कुमारी, संदीपिका, नरेंद्र, अरविंद, सुभाष, दिनेश, कपिल, रविंद्र और हितेंद्रा सहित अन्य अभ्यर्थियों ने सरकार और बोर्ड से मांग की है कि काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से जल्द शुरू किया जाए। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे अपने हक के लिए आगे की रणनीति अपनाने को मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी मांग उठाई है कि आगामी पंचायत चुनावों की आचार संहिता लागू होने से पहले काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी कर ली जाए ताकि चयन प्रक्रिया में और देरी न हो। अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि हजारों शिक्षकों के भविष्य और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लिया जाए।
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